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जन्मदिन मुबारक...ऊंचाई छूने को बेताब म्हारा सोनीपत
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत
Updated Wed, 21 Dec 2016 11:45 PM IST
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सभी को शुभ प्रभात। मैं अपने जीवन के 44 बसंत देखने के बाद लगातार बेहतरी की तरफ बढ़ता जा रहा हूं। जन्म के बाद से ही मैंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। आज शिक्षा के हर स्वरूप में मेरा कोई सानी नहीं है। शिक्षा के साथ ही खेलों में भी मेरा नाम अग्रणी रूप से लिया जाता है। राजनीति के पटल पर भी मेेरे कई बाशिंदों ने अपनी छाप छोड़ी हैै और आगे भी कई मेरा नाम रोशन करेंगे।
इतिहास में मुझे ही स्वर्णप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। तब से अब तक मेरे लोगों ने मुझे प्रगति की बुलंदी पर पहुंचाया है। मैं जिन लोगों की जन्म व कर्म भूमि बना हूं वह गुणों के मालिक हैं। अपने कर्म को सर्वप्रमुख मानने वाले मेहनती लोगों की बदौलत ही अन्य जिले मुझे सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। अपने लोगों के कारण आज में सफलता के चरम की तरफ बढ़ रहा हूं।
शिक्षा के साथ खेल में अग्रणी
प्रदेश का गठन एक नवंबर, 1966 को हुआ था। प्रदेश के गठन के बाद रोहतक जिले से अलग कर वर्ष 1972 में सोनीपत जिला बनाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने 22 दिसंबर को सोनीपत को नया जिला बनाया था। हालांकि तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी सोनीपत विश्व पटल पर गहरी छाप छोड़ेगा, लेकिन सोनीपत लगातार देश और विदेश में अपनी प्रगति की नई कहानी लिखता चला गया।
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सोनीपत नगर पालिका से अब नगर निगम बन चुका है। खेल और शिक्षा के दम पर देशभर में जिले की अलग ही पहचान बन चुकी है। सोनीपत के गठन के समय महज दो महाविद्यालय और 250 के करीब स्कूल थे। अब यहां करीब दर्जनभर विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान हैं। महाविद्यालय तो चार दर्जन से अधिक हो चुके है औैर स्कूलों की संख्या एक हजार के पार हो गई है।
इतना ही नहीं खेलों का नाम आते ही सोनीपत सभी की जुबान पर आ जाता है। इसमें चाहे ओलंपिक कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त हो या महिला हाकी की अर्जुन अवॉर्डी प्रीतम सिवाच, पहलवान रमेश गुलिया, एथलीट सीमा आंतिल, पहलवान अमित दहिया, मौसम खत्री और पैरा ओलंपियन अमित सरोहा व वीरेंद्र धनखड़ जिले की शान बढ़ा रहे हैं। अब युवा पीढ़ी में हॉकी खिलाड़ी विकास दहिया, सुमित, बैडमिंटन के सरताज की और बढ़ रहे सौरभ शर्मा, महिला हाकी खिलाड़ी पूनम, महिमा व ज्योति इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पांडवों ने मांगा था सोनीपत
सोनीपत का नाम पुराणों में भी है। पांडवों ने कौरवों से युद्ध न करने की एवज में जो पांच गांव मांगे थे, उनमें सोनीपत भी था। जिसे उस समय स्वर्णप्रस्थ कहा जाता था।
गुरुग्राम व फरीदाबाद को टक्कर देगा सोनीपत
प्रदेश की केबिनेट मंत्री कविता जैन का कहना है कि, मेरी जन्मभूमि तो रोहतक है, लेकिन कर्मभूमि सोनीपत है। सोनीपत भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही गुरुग्राम व फरीदाबाद को विकास के मामले में टक्कर देगा। करोड़ों रुपये शहर के विकास पर खर्च हो चुके हैं और करोड़ों के विकास कार्य सीएम मनोहर लाल घोषित करके गए थे। अगले तीन साल में शहर कायाकल्प तय है।
इतिहास में मुझे ही स्वर्णप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। तब से अब तक मेरे लोगों ने मुझे प्रगति की बुलंदी पर पहुंचाया है। मैं जिन लोगों की जन्म व कर्म भूमि बना हूं वह गुणों के मालिक हैं। अपने कर्म को सर्वप्रमुख मानने वाले मेहनती लोगों की बदौलत ही अन्य जिले मुझे सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। अपने लोगों के कारण आज में सफलता के चरम की तरफ बढ़ रहा हूं।
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शिक्षा के साथ खेल में अग्रणी
प्रदेश का गठन एक नवंबर, 1966 को हुआ था। प्रदेश के गठन के बाद रोहतक जिले से अलग कर वर्ष 1972 में सोनीपत जिला बनाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने 22 दिसंबर को सोनीपत को नया जिला बनाया था। हालांकि तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी सोनीपत विश्व पटल पर गहरी छाप छोड़ेगा, लेकिन सोनीपत लगातार देश और विदेश में अपनी प्रगति की नई कहानी लिखता चला गया।
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सोनीपत नगर पालिका से अब नगर निगम बन चुका है। खेल और शिक्षा के दम पर देशभर में जिले की अलग ही पहचान बन चुकी है। सोनीपत के गठन के समय महज दो महाविद्यालय और 250 के करीब स्कूल थे। अब यहां करीब दर्जनभर विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान हैं। महाविद्यालय तो चार दर्जन से अधिक हो चुके है औैर स्कूलों की संख्या एक हजार के पार हो गई है।
इतना ही नहीं खेलों का नाम आते ही सोनीपत सभी की जुबान पर आ जाता है। इसमें चाहे ओलंपिक कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त हो या महिला हाकी की अर्जुन अवॉर्डी प्रीतम सिवाच, पहलवान रमेश गुलिया, एथलीट सीमा आंतिल, पहलवान अमित दहिया, मौसम खत्री और पैरा ओलंपियन अमित सरोहा व वीरेंद्र धनखड़ जिले की शान बढ़ा रहे हैं। अब युवा पीढ़ी में हॉकी खिलाड़ी विकास दहिया, सुमित, बैडमिंटन के सरताज की और बढ़ रहे सौरभ शर्मा, महिला हाकी खिलाड़ी पूनम, महिमा व ज्योति इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पांडवों ने मांगा था सोनीपत
सोनीपत का नाम पुराणों में भी है। पांडवों ने कौरवों से युद्ध न करने की एवज में जो पांच गांव मांगे थे, उनमें सोनीपत भी था। जिसे उस समय स्वर्णप्रस्थ कहा जाता था।
गुरुग्राम व फरीदाबाद को टक्कर देगा सोनीपत
प्रदेश की केबिनेट मंत्री कविता जैन का कहना है कि, मेरी जन्मभूमि तो रोहतक है, लेकिन कर्मभूमि सोनीपत है। सोनीपत भाजपा सरकार के कार्यकाल में ही गुरुग्राम व फरीदाबाद को विकास के मामले में टक्कर देगा। करोड़ों रुपये शहर के विकास पर खर्च हो चुके हैं और करोड़ों के विकास कार्य सीएम मनोहर लाल घोषित करके गए थे। अगले तीन साल में शहर कायाकल्प तय है।