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एसकेएम की दो टूक: लखीमपुर रवाना होने से पहले किसान नेता बोले- खीरी मामले में हो कड़ी कार्रवाई, नहीं तो लेंगे बड़ा फैसला

Wed, 04 May 2022 11:44 AM IST
अनुराग सक्सेना संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 04 May 2022 11:44 AM IST
सार

किसान नेताओं ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय दोषी सरकार से मिलीभगत कर लखीमपुर खीरी मामले के गवाहों को ही निशाना बना रहे हैं। पीड़ित परिवारों को धमकाया जा रहा है।

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SKM leader warns government take strong action in the Kheri case otherwise will take a big decision
पत्रकार वार्ता में संयुक्त किसान मोर्चा के नेता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने अपने तेवर एक बार फिर कड़े कर लिए हैं। किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल, हरेंद्र सिंह लखुवाल व अभिमन्यु कोहाड़ ने साफ कहा है कि लखीमपुर खीरी मामले के दोषियों के खिलाफ या तो सरकार कड़ी कार्यवाही करे, नहीं तो किसान कोई बड़ा फैसला लेने पर मजबूर होंगे। वह बुधवार सुबह राई स्थित ढाबे पर संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रह रहे थे।

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बैठक में जत्थेबंदियों के अलावा मोर्चा के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में किसान नेताओं ने लखीमपुर खीरी रवाना होने का निर्णय लिया और वहां पहुंचकर किसानों संग बैठक करने की बात कही। किसान नेताओं ने बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय दोषी सरकार से मिलीभगत कर लखीमपुर खीरी मामले के गवाहों को ही निशाना बना रहे हैं। पीड़ित परिवारों को धमकाया जा रहा है और सरकार एसआईटी की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर रही है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद आशीष मिश्र की जमानत को रद्द किया जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार आरोपियों को बचाने के लिए आए दिन नए हथकंडे अपना रही है। किसानों ने कहा कि लखीमपुर खीरी मामले में उन्हें इंसाफ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र उर्फ टेनी व उनके बेटे आशीष मिश्र को बचा रही है। इस बार किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।

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सरकार ने कदम नहीं उठाया तो बनाएंगे रणनीति

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने तुरंत कोई कदम नहीं उठाया तो किसान आगे की रणनीति बनाएंगे। उन्होंने कहा कि मोर्चा का परिवार एक बार फिर बढ़ रहा है। हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र से किसान संगठन मोर्चा में शामिल हो रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा को किसी सूरत में कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में किसान नेताओं ने बताया कि जो किसान नेता पंजाब में चुनाव लड़े थे, उन्हें 15 मई तक के लिए पहले ही निलंबित किया जा चुका है। उन सभी को लेकर आगामी बैठक में फैसला लिया जाएगा। जहां एमएसपी गारंटी कानून का सवाल है तो सरकार ने अभी कोई कार्यवाही नहीं की है। न तो किसानों को इस प्रारूप की रूपरेखा सौंपी गई है और न ही कमेटी का गठन किया गया है जिससे किसानों में रोष बढ़ रहा है।

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