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वीरता और मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण है सीता स्वयंवर : ओपी अरोड़ा
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हरिनाम संकीर्तन व श्रीराम कथा में झूमते श्रद्धालु। स्रोत : संस्था
माई सिटी रिपोर्टर
सोनीपत। राम परिवार, सोनीपत की ओर से शनि मंदिर रोड स्थित शिव मंदिर में शनिवार को सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं श्रीराम कथा का आयोजन मुकेश आनंद की ओर से किया गया। कथा सुनाते हुए संस्था प्रमुख ओमप्रकाश अरोड़ा ने कहा कि श्री रामचरितमानस के बालकांड में वर्णित सीता स्वयंवर एक अत्यंत दिव्य प्रसंग है।
उन्होंने कहा कि राजा जनक ने भगवान शिव के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी। यह प्रसंग रामायण में वीरता और मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के कई बलशाली राजा और रावण जैसे योद्धा भी धनुष को हिला नहीं सके।
राजा जनक ने दुखी होकर कहा कि क्या पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। यह सुन लक्ष्मण क्रोधित हो गए थे। इस पर गुरु विश्वामित्र के आदेश से श्रीराम ने धनुष को प्रणाम कर सहजता से उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई और फिर धनुष तोड़ दिया। धनुष टूटते ही सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली।
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इसके बाद राजा जनक ने राजा दशरथ को निमंत्रण भेजा और विवाह संपन्न कराया। प्रसंग सुनकर पूरे पंडाल में जय श्रीराम के जयघोष लगने लगे। इस अवसर पर पवन सहगल, श्याम रहेजा, सूरजकांत, राकेश बहल, मनु नारंग, महेश पांडे, दिनेश, महेश आदि मौजूद रहे।
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सोनीपत। राम परिवार, सोनीपत की ओर से शनि मंदिर रोड स्थित शिव मंदिर में शनिवार को सुंदरकांड पाठ, हरिनाम संकीर्तन एवं श्रीराम कथा का आयोजन मुकेश आनंद की ओर से किया गया। कथा सुनाते हुए संस्था प्रमुख ओमप्रकाश अरोड़ा ने कहा कि श्री रामचरितमानस के बालकांड में वर्णित सीता स्वयंवर एक अत्यंत दिव्य प्रसंग है।
उन्होंने कहा कि राजा जनक ने भगवान शिव के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी। यह प्रसंग रामायण में वीरता और मर्यादा का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश के कई बलशाली राजा और रावण जैसे योद्धा भी धनुष को हिला नहीं सके।
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राजा जनक ने दुखी होकर कहा कि क्या पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। यह सुन लक्ष्मण क्रोधित हो गए थे। इस पर गुरु विश्वामित्र के आदेश से श्रीराम ने धनुष को प्रणाम कर सहजता से उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई और फिर धनुष तोड़ दिया। धनुष टूटते ही सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली।
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इसके बाद राजा जनक ने राजा दशरथ को निमंत्रण भेजा और विवाह संपन्न कराया। प्रसंग सुनकर पूरे पंडाल में जय श्रीराम के जयघोष लगने लगे। इस अवसर पर पवन सहगल, श्याम रहेजा, सूरजकांत, राकेश बहल, मनु नारंग, महेश पांडे, दिनेश, महेश आदि मौजूद रहे।