Sonipat: नागरिक अस्पताल में डेढ़ माह से दवाओं की किल्लत, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही
अस्पताल में डेढ़ माह से दर्द निवारक, पेट और आंखों में संक्रमण, गुम चोट, एंटीबायोटिक समेत 10 दवाएं खत्म हैं। यहां रोजाना 1500 से ज्यादा ओपीडी हो रही है। दवाएं नहीं मिलने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
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हरियाणा के सोनीपत के नागरिक अस्पताल में डेढ़ माह से दवाओं की किल्लत है। जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों की परेशानी बढ़ जाती है। अस्पताल में रोजाना 1500 से ज्यादा ओपीडी हो रही है, लेकिन यहां मरीजों को दर्द निवारक दवाएं तक नहीं मिल रहीं। डेढ़ माह से अस्पताल में दर्द निवारक, पेट और आंखों में संक्रमण, गुम चोट व एंटीबायोटिक समेत 10 दवाएं उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल में मुफ्त दवाएं नहीं मिलने के कारण मरीजों को मजबूरी में बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। साथ ही दो माह से अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन भी नहीं आ रहे हैं। हेपेटाइटिस जांच के लिए टेंडर नहीं होने के कारण नए मरीजों को उपचार मिलना मुश्किल हो रहा है। हेपेटाइटिस के नए मरीजों के लिए दवा तक उपलब्ध नहीं हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों की सुविधा के लिए दवाओं को स्थानीय स्तर पर भी खरीद नहीं की जा रही है।
नागरिक अस्पताल में लगभग डेढ़ माह से दर्द निवारक (पेन किलर) और एंटीबायोटिक दवाओं की कमी बनी हुई है। अस्पताल में दवाएं नहीं होने के कारण डॉक्टर की तरफ से ओपीडी पर्ची पर लिखी दवाई बाहर से खरीदनी पड़ रही है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में पेट की बीमारी ठीक करने की टैबलेट से लेकर आई ड्राप्स और स्किन तक की दवाई नहीं मिल रही है।
ऐसे में मरीजों को पैसे खर्च करके बाहर(बाजार) से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। दवाओं की कमी काफी समय से चल रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की तरफ से इसे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अस्पताल में डॉक्टर जिन दवाओं को मरीजों की ओपीडी पर्ची पर लिख रहे हैं, उनमें से कुछ दवाइयां अस्पताल की डिस्पेंसरी में मिल जाती हैं तो अन्य मरीजों को बाहर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इनमें अधिकतर ऐसी दवाइयां हैं जो सामान्य बीमारी में मरीजों को जरूरत पड़ती है।
अस्पताल में इन दवाओं की कमी
नागरिक अस्पताल में पहले दर्द निवारक में डाईक्लो फिफ्टी, डाईकलोपारा और एंटीबायोटिक में अमोक्सी, अमोक्सीक्लेव, पेट के संक्रमण के लिए सिप्रोफ्लोक्सासिन, पेट दर्द निवारक के लिए मेट्रोजिल दवाएं आती थी। इसके अलावा गुम चोट के लिए डिक्लो जेल व आंख के लिए आई ड्रॉप सिपरो भी खत्म है। मरीजों ने बताया कि इन बीमारियों की दवा अस्पताल में नहीं मिली तो पर्ची पर लिखी दवाएं बाहर से लेनी पड़ रही है।
कई दिन से आंखों में दर्द हो रहा है। मैं अस्पताल में आंखों का उपचार कराने आया तो जांच के बाद चिकित्सक ने दवाइयां लिख दीं। अस्पताल की डिस्पेंसरी में दवा लेने गया तो वहां फार्मासिस्ट ने दवा न होने की बात कही। -नीलेंद्र निवासी बीसवां मील
सरकार एक तरफ अस्पताल में ही मरीजों को मुफ्त दवाएं देने का वादा कर रही है, लेकिन अस्पताल में दवाओं की कमी है। डिस्पेंसरी से आंखों की कुछ दवाएं तो मिली, बाकी बाहर से खरीदना पड़ रहा है। सरकार की ओर से दवाओं का कोटा पूरा नहीं किया जा रहा है। -श्रीकृष्ण निवासी महलाना
अस्पताल में कई महीने पहले आंखों का ऑपरेशन कराया था। अब आंख के नीचे सूजन आ गई है। अस्पताल में आंखों की जांच कराने के लिए आया तो चिकित्सक ने जो दवाई लिखी वह नहीं मिल सकी। - प्रकाश सिंह निवासी जनता कॉलोनी
मुझे कई दिन से कमर दर्द है। अस्पताल में चिकित्सक ने ओपीडी पर्ची पर दर्द निवारक की दवाइयां लिख दीं, डिस्पेंसरी में दवा नहीं होने के कारण परेशानी हुई। वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा को लेकर दवा लेने के लिए अलग से खिड़की खोल रखी है, लेकिन वहां से दवा तक नहीं मिल रही। -संतोष जैन निवासी हनुमान कॉलोनी
अस्पताल में चर्म रोग निवारक की दवा तक नहीं है। सुबह अस्पताल में इलाज कराने के लिए आया। डिस्पेंसरी में चर्म रोग की दवा तक नहीं मिली। जिससे उसे बाहर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। -सुरेश निवासी शास्त्री कॉलोनी
अस्पताल में दो माह से एंटी रैबीज इंजेक्शन भी नहीं है। दवाओं की किल्लत को पूरा करने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। मरीजों को दूसरे साल्ट की दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे परेशानी का सामना न करना पड़े। डिस्पेंसरी में दवाओं के संकट को दूर करने के लिए रोहतक वेयरहाउस से दवाएं ली जाएंगी। - डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन