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Sonipat News: आज से सावन का शुभारंभ, शिवालयों में गूंजेंगे जयघोष
Mon, 22 Jul 2024 04:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 22 Jul 2024 04:35 AM IST
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सोनीपत की कैलाश कॉलोनी स्थित ओम शिव धाम मंदिर में सावन माह को लेकर सजाया गया शिवलिंग।
सोनीपत। शास्त्र-पुराणों व वेदों के अनुसार सावन माह भगवान शिव को अति प्रिय है। इस वर्ष सावन सोमवार से शुरू हो रहा है और समापन भी। 22 जुलाई सोमवार से प्रारंभ होकर सावन 19 अगस्त सोमवार तक 29 दिन का रहेगा। यह शुभ संयोग 72 वर्ष बाद बन रहा है। इस दौरान भगवान शिव के साथ विष्णु की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।
मोहन नगर स्थित श्री बगलामुखी विष्णेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पंडित राम कृष्ण पाठक ने बताया कि सावन में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। ऐसे में संसार के पालन का कार्यभार भगवान शिव पर होता है। ऐसे में भगवान शिव व विष्णु की आराधना, व्रत, साधना व पूजा-पाठ का काफी महत्व है। सावन के प्रारंभ पर प्रीति योग, आयुष्मान योग व सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सावन में पुण्य कार्य करने, पूजा-अर्चना के साथ दान पुण्य करने व जरूरतमंदों की सहायता करने से 100 गुणा फल की प्राप्ति होती है। साथ ही मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, आभूषण खरीदना व शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
झांकी वाली डाक कांवड़ का दिव्य होगा नजारा
कैलाश कॉलोनी स्थित ओम शिव धाम मंदिर के पुजारी पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि सावन में भगवान शंकर का नित्य रुद्राभिषेक किया जाता है। पूरा माह मंदिर शिव भक्तों के बम बम बोल बम के जयकारों से गुंजायमान रहेगा। शिव भक्त प्रतिवर्ष हरिद्वार से आस्था के साथ डाक कांवड़ लाते हैं। इस बार मंदिर में पहली बार झांकी वाली डाक कांवड़ का दिव्य नजारा होगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। शिव धाम में 2 अगस्त को महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा भाव व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। कांवड़ लाने वाले भक्तों के लिए मंदिर में व्यवस्थाएं की गई हैं।
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2 अगस्त को मनाया जाएगा महाशिवरात्रि पर्व
इस बार सावन माह में पांच सोमवार के व्रत रहेंगे, जबकि 2 अगस्त को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। 19 अगस्त रक्षाबंधन पर्व रहेगा। प्रथम सोमवार व्रत 22 जुलाई, द्वितीय 29, तृतीय 5 अगस्त, चौथा 12 अगस्त व पांचवां 19 अगस्त को रहेगा। इनमें भगवान शिव का जलाभिषेक व श्रृंगार करने के साथ उनकी उपासना की जाएगी।
भगवान शिव के जलाभिषेक का महत्व
- मनोकामना पूर्ति के लिए पंचामृत व मोक्ष प्राप्ति के लिए तीर्थ के जल से जलाभिषेक करें।
- घर प्राप्ति व वंश विस्तार के लिए घी और शहद से जलाभिषेक करें।
- रोगों से मुक्ति पाने व शांति व्यवस्था के लिए जल में कुशा डालकर जलाभिषेक करें।
- सुख-शांति व पुत्र प्राप्ति के लिए दूध से भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
- वाहन की प्राप्ति के लिए दही व व्यापार वृद्धि के लिए गन्ने के रस से जलाभिषेक करें।
- टोना टोटका व शत्रु बाधा से मुक्ति पाने के लिए नारियल जल से जलाभिषेक करें।
- शीघ्र विवाह बंधन में बंधने के लिए अनार के रस से जलाभिषेक करें।
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मोहन नगर स्थित श्री बगलामुखी विष्णेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पंडित राम कृष्ण पाठक ने बताया कि सावन में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। ऐसे में संसार के पालन का कार्यभार भगवान शिव पर होता है। ऐसे में भगवान शिव व विष्णु की आराधना, व्रत, साधना व पूजा-पाठ का काफी महत्व है। सावन के प्रारंभ पर प्रीति योग, आयुष्मान योग व सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सावन में पुण्य कार्य करने, पूजा-अर्चना के साथ दान पुण्य करने व जरूरतमंदों की सहायता करने से 100 गुणा फल की प्राप्ति होती है। साथ ही मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, आभूषण खरीदना व शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
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झांकी वाली डाक कांवड़ का दिव्य होगा नजारा
कैलाश कॉलोनी स्थित ओम शिव धाम मंदिर के पुजारी पंडित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि सावन में भगवान शंकर का नित्य रुद्राभिषेक किया जाता है। पूरा माह मंदिर शिव भक्तों के बम बम बोल बम के जयकारों से गुंजायमान रहेगा। शिव भक्त प्रतिवर्ष हरिद्वार से आस्था के साथ डाक कांवड़ लाते हैं। इस बार मंदिर में पहली बार झांकी वाली डाक कांवड़ का दिव्य नजारा होगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। शिव धाम में 2 अगस्त को महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा भाव व हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। कांवड़ लाने वाले भक्तों के लिए मंदिर में व्यवस्थाएं की गई हैं।
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2 अगस्त को मनाया जाएगा महाशिवरात्रि पर्व
इस बार सावन माह में पांच सोमवार के व्रत रहेंगे, जबकि 2 अगस्त को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। 19 अगस्त रक्षाबंधन पर्व रहेगा। प्रथम सोमवार व्रत 22 जुलाई, द्वितीय 29, तृतीय 5 अगस्त, चौथा 12 अगस्त व पांचवां 19 अगस्त को रहेगा। इनमें भगवान शिव का जलाभिषेक व श्रृंगार करने के साथ उनकी उपासना की जाएगी।
भगवान शिव के जलाभिषेक का महत्व
- मनोकामना पूर्ति के लिए पंचामृत व मोक्ष प्राप्ति के लिए तीर्थ के जल से जलाभिषेक करें।
- घर प्राप्ति व वंश विस्तार के लिए घी और शहद से जलाभिषेक करें।
- रोगों से मुक्ति पाने व शांति व्यवस्था के लिए जल में कुशा डालकर जलाभिषेक करें।
- सुख-शांति व पुत्र प्राप्ति के लिए दूध से भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
- वाहन की प्राप्ति के लिए दही व व्यापार वृद्धि के लिए गन्ने के रस से जलाभिषेक करें।
- टोना टोटका व शत्रु बाधा से मुक्ति पाने के लिए नारियल जल से जलाभिषेक करें।
- शीघ्र विवाह बंधन में बंधने के लिए अनार के रस से जलाभिषेक करें।