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नियम 134ए : दाखिला देने से इनकार करने पर भड़के अभिभावक, डीईओ कार्यालय पर जड़ा ताला
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जिला शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र नरवाल बैठक में अभिभावकों व निजी स्कूल संचालकों से बातचीत करते हुए?
- फोटो : Sonipat
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नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों को दाखिला देने के विवाद को सुलझाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर बुलाई बैठक में जमकर हंगामा हुआ। निजी स्कूल संचालकों के बैठक में 134ए के तहत किसी भी बच्चे को इस नियम के तहत दाखिला देने से इंकार करने पर अभिभावक भड़क गए और बैठक छोड़ बाहर आ गए। गुस्साए अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर ताला जड़कर नारेबाजी शुरू कर दी। अभिभावक कार्यालय द्वार पर ताला लगाकर धरने पर बैठ गए। जिससे डीईओ व निजी स्कूल संचालक भी अंदर ही बंद हो गए।
छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी के नेतृत्व में अभिभावकों ने सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि जब तक पात्र बच्चों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे। इसके लिए वे अपनी गिरफ्तारियां तक देने को तैयार हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभिभावक अपनी मांगों पर अडिग रहे।
नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने की मांग को लेकर रोजाना हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर बैठक बुलाई गई थी, ताकि मामले का समाधान किया जा सके। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र नरवाल, कई निजी स्कूल संचालक, छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष व अभिभावक शामिल हुए। बैठक के दौरान अभिभावकों ने उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए पात्र विद्यार्थियों को दाखिला देने की बात कही। इस पर निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि सरकार ने नियम 134ए खत्म कर दिया है, अब वे इस नियम के तहत किसी भीर विद्यार्थी को दाखिला नहीं देंगे। इस मामले को लेकर काफी देर तक बहस चलती रही। इससे अभिभावक भड़क गए और बैठक छोड़ बाहर आ गए और गेट पर ताला जड़ नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर पहुंची पुुलिस ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभिभावक नहीं माने। देर शाम जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में उच्च अधिकारियों से बातचीत कर समाधान करवाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद ही अभिभावक लौटने पर राजी हुए।
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यह है मामला
नियम 134ए के तहत 5 दिसंबर को हुई मूल्यांकन परीक्षा में उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों के अभिभावकों ने सरकार व शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार पुराने स्कूलों से एसएलसी निकलवा लिए और अलॉट किए गए स्कूलों मेें आवेदन करने पहुंचे। अधिकतर निजी स्कूलों ने नियम 134ए के तहत किसी भी बच्चे का दाखिला करने से इनकार कर दिया। शिक्षा विभाग ने तीन बार तिथि बढ़ाई, लेकिन निजी स्कूल दाखिला देने पर राजी नहीं हुए। इस बीच शिक्षा विभाग दावा करता रहा कि पात्र विद्यार्थियों को हर हाल में दाखिला दिलवाया जाएगा। इसके लिए निजी स्कूलों को नोटिस भी जारी किए गए।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग के कदम से लगने लगा था कि उनके बच्चों को दाखिला दिलवाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिसके बाद 53 अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसका फैसला अभिभावकों के पक्ष में आया है। हालांकि इस बीच सरकार ने नियम 134ए को ही खत्म कर दिया। हालांकि अभिभावकों का दावा है कि उच्च न्यायालय के फैसले में स्पष्ट है कि पात्र विद्यार्थियों को अलॉट स्कूलों में दाखिला दिलवाया जाए। अभिभावकों ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद ही वे पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने की मांग की है।
दाखिला न मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने की मांग को लेकर चार महीने से सैकड़ों अभिभावक धक्के खो रहे हैं, लेकिन सरकार व प्रशासनिक अधिकारी बच्चों के भविष्य की तरफ ध्यान नहीं दे रहे। दाखिला न मिलने के कारण बच्चों का साल बर्बाद हो चुका है। उच्च न्यायालय ने भी अपने फैसले में सभी पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन निजी स्कूल दाखिला नहीं देना चाहते। सरकार व प्रशासनिक अधिकारी भी ठोस कदम नहीं उठा रहे। जब तक पात्र विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। प्रवेश कुमारी, उपाध्यक्ष, छात्र अभिभावक संघ।
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छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी के नेतृत्व में अभिभावकों ने सरकार व जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि जब तक पात्र बच्चों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे। इसके लिए वे अपनी गिरफ्तारियां तक देने को तैयार हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभिभावक अपनी मांगों पर अडिग रहे।
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नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने की मांग को लेकर रोजाना हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर बैठक बुलाई गई थी, ताकि मामले का समाधान किया जा सके। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र नरवाल, कई निजी स्कूल संचालक, छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष व अभिभावक शामिल हुए। बैठक के दौरान अभिभावकों ने उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए पात्र विद्यार्थियों को दाखिला देने की बात कही। इस पर निजी स्कूल संचालकों ने कहा कि सरकार ने नियम 134ए खत्म कर दिया है, अब वे इस नियम के तहत किसी भीर विद्यार्थी को दाखिला नहीं देंगे। इस मामले को लेकर काफी देर तक बहस चलती रही। इससे अभिभावक भड़क गए और बैठक छोड़ बाहर आ गए और गेट पर ताला जड़ नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर पहुंची पुुलिस ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन अभिभावक नहीं माने। देर शाम जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में उच्च अधिकारियों से बातचीत कर समाधान करवाने का आश्वासन दिया। जिसके बाद ही अभिभावक लौटने पर राजी हुए।
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यह है मामला
नियम 134ए के तहत 5 दिसंबर को हुई मूल्यांकन परीक्षा में उत्तीर्ण हुए विद्यार्थियों के अभिभावकों ने सरकार व शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार पुराने स्कूलों से एसएलसी निकलवा लिए और अलॉट किए गए स्कूलों मेें आवेदन करने पहुंचे। अधिकतर निजी स्कूलों ने नियम 134ए के तहत किसी भी बच्चे का दाखिला करने से इनकार कर दिया। शिक्षा विभाग ने तीन बार तिथि बढ़ाई, लेकिन निजी स्कूल दाखिला देने पर राजी नहीं हुए। इस बीच शिक्षा विभाग दावा करता रहा कि पात्र विद्यार्थियों को हर हाल में दाखिला दिलवाया जाएगा। इसके लिए निजी स्कूलों को नोटिस भी जारी किए गए।
अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग के कदम से लगने लगा था कि उनके बच्चों को दाखिला दिलवाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिसके बाद 53 अभिभावकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसका फैसला अभिभावकों के पक्ष में आया है। हालांकि इस बीच सरकार ने नियम 134ए को ही खत्म कर दिया। हालांकि अभिभावकों का दावा है कि उच्च न्यायालय के फैसले में स्पष्ट है कि पात्र विद्यार्थियों को अलॉट स्कूलों में दाखिला दिलवाया जाए। अभिभावकों ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद ही वे पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने की मांग की है।
दाखिला न मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
नियम 134ए के तहत पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने की मांग को लेकर चार महीने से सैकड़ों अभिभावक धक्के खो रहे हैं, लेकिन सरकार व प्रशासनिक अधिकारी बच्चों के भविष्य की तरफ ध्यान नहीं दे रहे। दाखिला न मिलने के कारण बच्चों का साल बर्बाद हो चुका है। उच्च न्यायालय ने भी अपने फैसले में सभी पात्र विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन निजी स्कूल दाखिला नहीं देना चाहते। सरकार व प्रशासनिक अधिकारी भी ठोस कदम नहीं उठा रहे। जब तक पात्र विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। प्रवेश कुमारी, उपाध्यक्ष, छात्र अभिभावक संघ।

निजी स्कूल संचालकों के दाखिला देने से इनकार करने के बाद गुस्साए अभिभावक धरने पर बैठकर प्रदर्शन क- फोटो : Sonipat

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के गेट पर ताला जड़कर रोष जताते अभिभावक। संवाद- फोटो : Sonipat

छात्र अभिभावक संघ की उपाध्यक्ष प्रवेश कुमारी जिला शिक्षा अधिकारी बिजेंद्र नरवाल व पुलिस अधिकार- फोटो : Sonipat