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सेवानिवृत्त फौजी अपनी पत्नी के साथ प्रतिदिन करते थे सैर, किसी से नहीं था कोई विवाद
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गोहाना। गांव मदीना में सेवानिवृत्त फौजी जयवीर के पत्नी की हत्या के बाद खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने के मामले से हर कोई हैरान है। दंपती के हर रोज एक साथ सैर पर जाने और कभी एक-दूसरे में विवाद न होने की हर कोई मिसाल दे रहा है। इससे घटना का कारण उलझ गया है। गांव में घटना के बाद मातम छाया है। वहीं, ग्रामीणों और परिजनों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। उधर, पुलिस भी विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है।
सेवानिवृत्त फौजी जयवीर का मकान गांव के बाहरी क्षेत्र में तालाब के पास है। आसपास में कोई मकान नहीं बना हुआ है। परिजनों के अनुसार जयवीर ने सेवानिवृत्त होने के बाद ही मकान बनवाया था। इसके अलावा करीब छह महीने पहले मकान की मरम्मत कराई थी। खेत नजदीक होने पर वह अपनी पत्नी के साथ रोजाना सुबह-शाम घूमने जाते थे। ग्रामीणों का कहना है कि उनका घर भले ही गांव के बाहरी क्षेत्र में है, लेकिन आते-जाते कभी भी एक-दूसरे में कोई कहासुनी व झगड़ा नहीं देखा। इसके साथ ही गांव में किसी अन्य के साथ भी उनका कभी कोई विवाद नहीं हुआ। अब जयवीर के इतना बड़ा कदम उठाने से हर कोई हैरान है, क्योंकि सुसाइड नोट में भी उसने इस घटना का स्पष्ट कारण नहीं किया है।
रेलवे की नौकरी से हटाने को कारण मान रहे ग्रामीण
सेवानिवृत्त होने के बाद जयवीर रेलवे में अनुबंध के आधार पर बतौर गेट मैन की नौकरी करता था। वह गांव रुखी में रोहतक-पानीपत रेलवे लाइन की फाटक पर नियुक्त थे। ग्रामीणों ने बताया कि जयवीर को करीब डेढ़ महीने पहले नौकरी से हटा दिया था। इसके बाद वह घर पर ही रहता था। परिजनों के अनुसार रेलवे में नौकरी के दौरान उसे करीब चार माह का वेतन भी नहीं मिला था। ऐसे में ग्रामीण व परिजन जयवीर के नौकरी को लेकर परेशान होकर यह कदम उठाने की आंशका जता रहे हैं। हालांकि घटना के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है।
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घर में सकुशल होने की सोच किसी ने नहीं खुलवाया गेट
जयवीर के घर के बाहर गली में भी दिन में ग्रामीण आते-जाते रहे। इसके बावजूद लाइसेंसी बंदूक से गोली चलने की आवाज किसी ने सुनाई नहीं दी। घर में सकुशल होने की बात सोचकर किसी ने गेट भी नहीं खुलवाया। शाम को दंपती का बेटा घर पहुंचा तो मशक्कत के बाद गेट पर लगी फाइबर को तोड़ने के बाद अंदर जाने पर घटना का पता चला। इसके बाद से गांव में मातम छा गया। ग्रामीण जयवीर के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। परिवार में अब इकलौता बेटा अंकित ही रह गया है। करीब डेढ़ साल पहले जयवीर की छोटी बेटी का भी देहांत हो गया था।
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सेवानिवृत्त फौजी जयवीर का मकान गांव के बाहरी क्षेत्र में तालाब के पास है। आसपास में कोई मकान नहीं बना हुआ है। परिजनों के अनुसार जयवीर ने सेवानिवृत्त होने के बाद ही मकान बनवाया था। इसके अलावा करीब छह महीने पहले मकान की मरम्मत कराई थी। खेत नजदीक होने पर वह अपनी पत्नी के साथ रोजाना सुबह-शाम घूमने जाते थे। ग्रामीणों का कहना है कि उनका घर भले ही गांव के बाहरी क्षेत्र में है, लेकिन आते-जाते कभी भी एक-दूसरे में कोई कहासुनी व झगड़ा नहीं देखा। इसके साथ ही गांव में किसी अन्य के साथ भी उनका कभी कोई विवाद नहीं हुआ। अब जयवीर के इतना बड़ा कदम उठाने से हर कोई हैरान है, क्योंकि सुसाइड नोट में भी उसने इस घटना का स्पष्ट कारण नहीं किया है।
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रेलवे की नौकरी से हटाने को कारण मान रहे ग्रामीण
सेवानिवृत्त होने के बाद जयवीर रेलवे में अनुबंध के आधार पर बतौर गेट मैन की नौकरी करता था। वह गांव रुखी में रोहतक-पानीपत रेलवे लाइन की फाटक पर नियुक्त थे। ग्रामीणों ने बताया कि जयवीर को करीब डेढ़ महीने पहले नौकरी से हटा दिया था। इसके बाद वह घर पर ही रहता था। परिजनों के अनुसार रेलवे में नौकरी के दौरान उसे करीब चार माह का वेतन भी नहीं मिला था। ऐसे में ग्रामीण व परिजन जयवीर के नौकरी को लेकर परेशान होकर यह कदम उठाने की आंशका जता रहे हैं। हालांकि घटना के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है।
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घर में सकुशल होने की सोच किसी ने नहीं खुलवाया गेट
जयवीर के घर के बाहर गली में भी दिन में ग्रामीण आते-जाते रहे। इसके बावजूद लाइसेंसी बंदूक से गोली चलने की आवाज किसी ने सुनाई नहीं दी। घर में सकुशल होने की बात सोचकर किसी ने गेट भी नहीं खुलवाया। शाम को दंपती का बेटा घर पहुंचा तो मशक्कत के बाद गेट पर लगी फाइबर को तोड़ने के बाद अंदर जाने पर घटना का पता चला। इसके बाद से गांव में मातम छा गया। ग्रामीण जयवीर के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। परिवार में अब इकलौता बेटा अंकित ही रह गया है। करीब डेढ़ साल पहले जयवीर की छोटी बेटी का भी देहांत हो गया था।