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Sonipat News: खराब प्रदूषण के बीच बढ़ रहे सांस और आंखों के मरीज
Wed, 20 Nov 2024 03:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 20 Nov 2024 03:25 AM IST
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बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में सांस, दमा, छाती रोग व आंखों के मरीज बढ़े हैं। अब भी वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर बना हुआ है। मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 390 दर्ज किया गया। अस्पताल में चिकित्सक कक्ष के बाहर मरीजाें की लाइनें लग रही हैं। सांस व दमा के गंभीर रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है। वर्तमान में अस्पताल के मेडिकल वार्ड में आठ मरीज भर्ती हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में पहले 1300 तक ओपीडी होती थी, प्रदूषण की बीच ओपीडी 30 फीसदी बढ़ी है। वायु प्रदूषण के कारण लोगों की आंखों से पानी आने, खांसी, सांस लेने में कठिनाई और छाती में संक्रमण जैसी समस्याएं हो रही हैं। प्रदूषण से प्रभावित होकर लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सांस, आंखों में जलन व छाती में जकड़न के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में अन्य बीमारियों की तुलना में खांसी, जुकाम, गले में खराश के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। प्रदूषण के संपर्क में आने वाली त्वचा पर लाल धब्बे व खुजली के मरीज भी बढ़े हैं।
अस्पताल की ओपीडी में तीन सप्ताह पहले एलर्जी, सांस-दमा पीड़ितों की संख्या 100 के आसपास थी। अब यह यह संख्या 150 से 180 तक पहुंच गई। चिकित्सकों की ओर से मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वह उच्च प्रदूषण वाले घंटों में बाहर न निकलें और प्रदूषण के संपर्क में कम से कम आएं। जो लोग पहले से ही सांस की दवा ले रहे हैं, उन्हें दवा जारी रखने की जरूरत है।
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फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने ओपीडी के दौरान मरीजों व तीमारदारों को प्रदूषण से बचाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जितनी अपने आसपास सफाई होगी, उतना ही प्रदूषण कम होगा। एलर्जी और जुकाम-खांसी पीड़ित को अनिवार्य रूप से मास्क लगाना चाहिए। खांसी, जुकाम, गला खराब, बुखार है तो तुरंत चिकित्सक से दवा लें। सड़क पर सैर न करें। विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में लें।
यह एहतियात बरतें
- घर से बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं।
- 60 से अधिक उम्र के सांस-दमा के गंभीर मरीजों को फ्लू वैक्सीन लगवा सकते हैं।
- एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें।
- इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-सी जरूरी है।
- पर्याप्त मात्रा में संतरा-आंवला व रेशेदार फल का सेवन करें।
- नियमित रूप से हाथ धोएं।
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जिला नागरिक अस्पताल में पहले 1300 तक ओपीडी होती थी, प्रदूषण की बीच ओपीडी 30 फीसदी बढ़ी है। वायु प्रदूषण के कारण लोगों की आंखों से पानी आने, खांसी, सांस लेने में कठिनाई और छाती में संक्रमण जैसी समस्याएं हो रही हैं। प्रदूषण से प्रभावित होकर लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सांस, आंखों में जलन व छाती में जकड़न के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में अन्य बीमारियों की तुलना में खांसी, जुकाम, गले में खराश के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। प्रदूषण के संपर्क में आने वाली त्वचा पर लाल धब्बे व खुजली के मरीज भी बढ़े हैं।
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अस्पताल की ओपीडी में तीन सप्ताह पहले एलर्जी, सांस-दमा पीड़ितों की संख्या 100 के आसपास थी। अब यह यह संख्या 150 से 180 तक पहुंच गई। चिकित्सकों की ओर से मरीजों को सलाह दी जा रही है कि वह उच्च प्रदूषण वाले घंटों में बाहर न निकलें और प्रदूषण के संपर्क में कम से कम आएं। जो लोग पहले से ही सांस की दवा ले रहे हैं, उन्हें दवा जारी रखने की जरूरत है।
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फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने ओपीडी के दौरान मरीजों व तीमारदारों को प्रदूषण से बचाव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जितनी अपने आसपास सफाई होगी, उतना ही प्रदूषण कम होगा। एलर्जी और जुकाम-खांसी पीड़ित को अनिवार्य रूप से मास्क लगाना चाहिए। खांसी, जुकाम, गला खराब, बुखार है तो तुरंत चिकित्सक से दवा लें। सड़क पर सैर न करें। विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में लें।
यह एहतियात बरतें
- घर से बाहर निकलें तो मास्क जरूर लगाएं।
- 60 से अधिक उम्र के सांस-दमा के गंभीर मरीजों को फ्लू वैक्सीन लगवा सकते हैं।
- एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें।
- इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन-सी जरूरी है।
- पर्याप्त मात्रा में संतरा-आंवला व रेशेदार फल का सेवन करें।
- नियमित रूप से हाथ धोएं।