{"_id":"668f345cb0992decec01cff6","slug":"religion-karma-chaturmas-will-start-from-devshayani-ekadashi-auspicious-works-will-be-prohibited-sonipat-news-c-197-1-snp1004-121022-2024-07-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्म-कर्म : देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होगा चातुर्मास, मांगलिक कार्य होंगे वर्जित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्म-कर्म : देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होगा चातुर्मास, मांगलिक कार्य होंगे वर्जित
Thu, 11 Jul 2024 06:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 11 Jul 2024 06:54 AM IST
विज्ञापन
सोनीपत। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास शुरू हो रहे हैं। अबकी बार 17 जुलाई को शुभ योग व अनुराधा नक्षत्र में देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होगी। चातुर्मास की समय अवधि 17 जुलाई से प्रारंभ होकर 12 नवंबर तक रहेगी। इन 4 माह में होने वाले मांगलिक कार्य पूर्ण रूप से वर्जित रहेंगे।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि भगवान विष्णु 17 जुलाई शाम से 4 माह के लिए शयन मुद्रा में चले जाएंगे। चातुर्मास के दौरान विवाह, लगन, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होंगे, क्योंकि यह कार्य शुभ मुहूर्त व शुभ तिथि के अनुसार ही किए जाते हैं। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने से 15 जुलाई से मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। शास्त्रों में भी बताया है कि हर शुभ कार्य के लिए भगवान गणेश जी के साथ विष्णु जी का भी आह्वान किया जाता है। साथ ही इन माह में सूर्य, चंद्रमा व प्रकृति का तेज कम हो जाता है। चातुर्मास में व्रत, साधना, जप-तप, ध्यान, पवित्र नदियों में स्नान व दान का विशेष महत्व रहेगा। चातुर्मास में साधु-संत तीर्थ यात्रा करने की बजाय अधिकतर समय मौन व्रत का पालन करते हैं। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
14 जुलाई को रहेगा शुभ मुहूर्त
जुलाई में 14 तारीख को भड़ली नवमी पर आखिरी शुभ मुहूर्त रहेगा। इस तिथि को स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी माना जाता है। साथ ही इस दिन गुप्त नवरात्रि का समापन हो जाता है। ऐसे में भड़ली नवमी के दिन शुभ मुहूर्त होने से सभी मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे। इसके बाद 15 जुलाई से 12 नवंबर तक मांगलिक कार्यों के लिए कोई मुहूर्त नहीं रहेगा। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 16 जुलाई रात 8:33 बजे से प्रारंभ होकर 17 जुलाई रात 9:02 बजे तक रहेगी। एकादशी का व्रत 17 जुलाई को रहेगा।
विज्ञापन
गुरु पूर्णिमा पर देव पूजा से होगी सावन की शुरुआत
इस बार सावन 22 जुलाई से प्रारंभ होकर 19 अगस्त तक रहेगा। यह 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर देव पूजा के बाद 22 जुलाई से प्रारंभ होकर 19 अगस्त रक्षाबंधन तक रहेगा। सावन में 5 सोमवार के व्रत रहेंगे। इनमें भगवान शिव का श्रृंगार व जलाभिषेक करने के साथ उनकी उपासना की जाएगी। सावन माह में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
चातुर्मास में ले सकते हैं कोई एक नियम
- व्रतधारी सामर्थ्य के अनुसार एक समय भोजन कर सकते हैं।
- तेल, साबुन, जूते, चप्पल, झूठ, पाप का त्याग कर सकते हैं।
- बल व मान-सम्मान में वृद्धि के लिए सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करें।
- मानसिक शांति के लिए एक स्थान पर रहकर ध्यान लगाएं, ओम नमो नारायणाय जाप के साथ भगवान विष्णु की आराधना करें।
- नौकरी व व्यवसाय संबंधी परेशानी के लिए अन्न, कपड़े, कपूर, चप्पल व छाते का दान करें।
- सुख-शांति व समृद्धि के लिए पशु-पक्षियों के लिए छत पर जल की व्यवस्था करें।
- कर्ज संबंधी समस्या के लिए अन्न व गो दान के साथ जरूरतमंद की सहायता करें।
- पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करना, जरूरतमंदों व साधु-संतों को भोजन करना शुभ फलदायी रहेगा।
- मास-मदिरा, प्याज, लहसुन के सेवन से परहेज कर व्रत के नियम व संयम का पालन करें।
विज्ञापन
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि भगवान विष्णु 17 जुलाई शाम से 4 माह के लिए शयन मुद्रा में चले जाएंगे। चातुर्मास के दौरान विवाह, लगन, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होंगे, क्योंकि यह कार्य शुभ मुहूर्त व शुभ तिथि के अनुसार ही किए जाते हैं। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने से 15 जुलाई से मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। शास्त्रों में भी बताया है कि हर शुभ कार्य के लिए भगवान गणेश जी के साथ विष्णु जी का भी आह्वान किया जाता है। साथ ही इन माह में सूर्य, चंद्रमा व प्रकृति का तेज कम हो जाता है। चातुर्मास में व्रत, साधना, जप-तप, ध्यान, पवित्र नदियों में स्नान व दान का विशेष महत्व रहेगा। चातुर्मास में साधु-संत तीर्थ यात्रा करने की बजाय अधिकतर समय मौन व्रत का पालन करते हैं। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
विज्ञापन
14 जुलाई को रहेगा शुभ मुहूर्त
जुलाई में 14 तारीख को भड़ली नवमी पर आखिरी शुभ मुहूर्त रहेगा। इस तिथि को स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी माना जाता है। साथ ही इस दिन गुप्त नवरात्रि का समापन हो जाता है। ऐसे में भड़ली नवमी के दिन शुभ मुहूर्त होने से सभी मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे। इसके बाद 15 जुलाई से 12 नवंबर तक मांगलिक कार्यों के लिए कोई मुहूर्त नहीं रहेगा। आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 16 जुलाई रात 8:33 बजे से प्रारंभ होकर 17 जुलाई रात 9:02 बजे तक रहेगी। एकादशी का व्रत 17 जुलाई को रहेगा।
विज्ञापन
गुरु पूर्णिमा पर देव पूजा से होगी सावन की शुरुआत
इस बार सावन 22 जुलाई से प्रारंभ होकर 19 अगस्त तक रहेगा। यह 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर देव पूजा के बाद 22 जुलाई से प्रारंभ होकर 19 अगस्त रक्षाबंधन तक रहेगा। सावन में 5 सोमवार के व्रत रहेंगे। इनमें भगवान शिव का श्रृंगार व जलाभिषेक करने के साथ उनकी उपासना की जाएगी। सावन माह में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।
चातुर्मास में ले सकते हैं कोई एक नियम
- व्रतधारी सामर्थ्य के अनुसार एक समय भोजन कर सकते हैं।
- तेल, साबुन, जूते, चप्पल, झूठ, पाप का त्याग कर सकते हैं।
- बल व मान-सम्मान में वृद्धि के लिए सुबह जल्दी उठकर सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करें।
- मानसिक शांति के लिए एक स्थान पर रहकर ध्यान लगाएं, ओम नमो नारायणाय जाप के साथ भगवान विष्णु की आराधना करें।
- नौकरी व व्यवसाय संबंधी परेशानी के लिए अन्न, कपड़े, कपूर, चप्पल व छाते का दान करें।
- सुख-शांति व समृद्धि के लिए पशु-पक्षियों के लिए छत पर जल की व्यवस्था करें।
- कर्ज संबंधी समस्या के लिए अन्न व गो दान के साथ जरूरतमंद की सहायता करें।
- पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करना, जरूरतमंदों व साधु-संतों को भोजन करना शुभ फलदायी रहेगा।
- मास-मदिरा, प्याज, लहसुन के सेवन से परहेज कर व्रत के नियम व संयम का पालन करें।