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पावर ग्रिड लाइन का विरोध : धरना स्थल पर जुटे किसान, तनातनी के बीच छह गड्ढों में वापस भर दी मिट्टी
Mon, 01 Apr 2024 07:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 01 Apr 2024 07:21 AM IST
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राई/सोनीपत। गांव नाहरा में पावर ग्रिड के लिए बिछाई जा रही लाइन को लेकर किसानों व पुलिस प्रशासन के बीच फिर से तनातनी हो गई है। किसानों ने लाइन के काम को रोकते हुए खोदे गए गड्ढों में बुलडोजर से फिर मिट्टी भर दी है। किसानों को रोकने के दौरान पुलिस के साथ किसानों की जमकर बहस भी हुई। किसानों के साथ गांव की महिलाओं ने भी मोर्चा खोले रखा। किसानों ने घेरा बनाकर पुलिस को रोक दिया। इससे पहले किसानों ने धरना स्थल पर करीब दो घंटे तक महापंचायत कर कई अहम निर्णय भी लिए हैं। किसान नेताओं ने चेताया है कि सुनवाई नहीं होने पर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी कर सकते हैं।
गुजरात के कच्छ से शुरू हुई हाई ट्रांसमिशन लाइन के हिस्से में दिल्ली के औचंदी से सोनीपत के गांव माहरा तक लाइन बिछाई जा रही है। जिसका गांव नाहरा के किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों को हिरासत में लेकर कंपनी ने टावर लगाने का काम भी शुरू करा दिया था, लेकिन उसके बाद से किसान धरने पर बैठे हुए हैं और लगातार मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यहीं नहीं इस मामले में कंपनी व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसानों की कई दौर की बैठक भी हो चुकी हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इस बीच अब किसानों ने प्रशासन व कंपनी पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए पावर ग्रिड का काम बंद करवा दिया। रविवार को नाहरा धरनास्थल पर महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन के अलावा दहिया चौबीसा व गांव नाहरा के ग्रामीणों ने भाग लिया।
महापंचायत में फैसला लिया गया कि मुआवजा मिलने तक काम नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही किसानों ने टावर लगाने के लिए अब तक खोदे गए गड्ढों को बुलडोजर की मदद से भरना शुरू कर दिया। गांव की महिलाएं भी खेतों में पहुंच गई। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस व प्रशासन की टीम ने किसानों को रोकना चाहा तो किसानों किसानों व महिलाओं ने घेरा बनाकर गड्ढों में मिट्टी भरने का काम जारी रखा। इस दौरान पुलिस के साथ किसानों की बहस व खींचतान भी हुई, लेकिन किसान अपनी मांगों पर डटे रहे। किसान व पुलिस के बीच झड़प तक की नौबत बन गई थी। किसानों ने घोषणा करते हुए कहा वह सभी गड्ढे भरकर ही वापस लौटेंगे।
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किसानों व प्रशासनिक टीम के बीच नहीं बनी सहमति
प्रशासन की तरफ से पहुंचे नायब तहसीलदार राहुल व पावर ग्रिड कंपनी के अधिकारी एसके अरोड़ा व कुंडली थाना प्रभारी देवेंद्र के साथ गांव नाहरा के सरपंच एवं दहिया चौबीसी के प्रधान अधिवक्ता उमेश दहिया, राकेश दहिया, दिल्ली के गांव औचंदी से सत्येंद्र लोहचब व हलालपुर के जय भगवान के बीच बातचीत भी हुई। किसानों ने कहा कि वह 5 अप्रैल से पहले उनकी उपायुक्त से बैठक करा दें और मुआवजा पहले दिया जाए। हालांकि इस पर सहमति नहीं बन सकी। इस पर टीम बैरंग लौट गई। किसानों ने कहा कि मांग पूरी नहीं होने तक वह डटे रहेंगे।
नहीं हुई सुनवाई तो लोकसभा चुनाव का करेंगे बहिष्कार
नाहरा में किसान नेता रवि आजाद, वीरेंद्र पहल, आजाद सिंह ने कहा कि किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है। ऐसे में मार्केट रेट पर मुआवजा मिलने तक किसी भी सूरत में पावर ग्रिड का काम शुरू नहीं होने देंगे। यही नहीं, उन्होंने कहा कि सुनवाई नहीं होने पर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। हाईटेंशन तारों के लिए लगाए जा रहे टावरों को लेकर प्रदेश के अन्य जिलों में भी धरना प्रदर्शन चल रहा है। सरकार को चाहिए कि तुरंत किसानों को मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा जारी किया जाए, अन्यथा आंदोलन को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर किसान पार्टी विशेष के नेताओं का भी विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे।
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गुजरात के कच्छ से शुरू हुई हाई ट्रांसमिशन लाइन के हिस्से में दिल्ली के औचंदी से सोनीपत के गांव माहरा तक लाइन बिछाई जा रही है। जिसका गांव नाहरा के किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों को हिरासत में लेकर कंपनी ने टावर लगाने का काम भी शुरू करा दिया था, लेकिन उसके बाद से किसान धरने पर बैठे हुए हैं और लगातार मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यहीं नहीं इस मामले में कंपनी व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसानों की कई दौर की बैठक भी हो चुकी हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इस बीच अब किसानों ने प्रशासन व कंपनी पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए पावर ग्रिड का काम बंद करवा दिया। रविवार को नाहरा धरनास्थल पर महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन के अलावा दहिया चौबीसा व गांव नाहरा के ग्रामीणों ने भाग लिया।
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महापंचायत में फैसला लिया गया कि मुआवजा मिलने तक काम नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही किसानों ने टावर लगाने के लिए अब तक खोदे गए गड्ढों को बुलडोजर की मदद से भरना शुरू कर दिया। गांव की महिलाएं भी खेतों में पहुंच गई। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस व प्रशासन की टीम ने किसानों को रोकना चाहा तो किसानों किसानों व महिलाओं ने घेरा बनाकर गड्ढों में मिट्टी भरने का काम जारी रखा। इस दौरान पुलिस के साथ किसानों की बहस व खींचतान भी हुई, लेकिन किसान अपनी मांगों पर डटे रहे। किसान व पुलिस के बीच झड़प तक की नौबत बन गई थी। किसानों ने घोषणा करते हुए कहा वह सभी गड्ढे भरकर ही वापस लौटेंगे।
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किसानों व प्रशासनिक टीम के बीच नहीं बनी सहमति
प्रशासन की तरफ से पहुंचे नायब तहसीलदार राहुल व पावर ग्रिड कंपनी के अधिकारी एसके अरोड़ा व कुंडली थाना प्रभारी देवेंद्र के साथ गांव नाहरा के सरपंच एवं दहिया चौबीसी के प्रधान अधिवक्ता उमेश दहिया, राकेश दहिया, दिल्ली के गांव औचंदी से सत्येंद्र लोहचब व हलालपुर के जय भगवान के बीच बातचीत भी हुई। किसानों ने कहा कि वह 5 अप्रैल से पहले उनकी उपायुक्त से बैठक करा दें और मुआवजा पहले दिया जाए। हालांकि इस पर सहमति नहीं बन सकी। इस पर टीम बैरंग लौट गई। किसानों ने कहा कि मांग पूरी नहीं होने तक वह डटे रहेंगे।
नहीं हुई सुनवाई तो लोकसभा चुनाव का करेंगे बहिष्कार
नाहरा में किसान नेता रवि आजाद, वीरेंद्र पहल, आजाद सिंह ने कहा कि किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है। ऐसे में मार्केट रेट पर मुआवजा मिलने तक किसी भी सूरत में पावर ग्रिड का काम शुरू नहीं होने देंगे। यही नहीं, उन्होंने कहा कि सुनवाई नहीं होने पर लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा। हाईटेंशन तारों के लिए लगाए जा रहे टावरों को लेकर प्रदेश के अन्य जिलों में भी धरना प्रदर्शन चल रहा है। सरकार को चाहिए कि तुरंत किसानों को मार्केट रेट के हिसाब से मुआवजा जारी किया जाए, अन्यथा आंदोलन को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर किसान पार्टी विशेष के नेताओं का भी विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे।