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जज्बा : पर्यावरण संरक्षण के लिए वेतन का आधा हिस्सा खर्च कर रहा प्रशांत बूरा

Sun, 09 Jan 2022 01:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 01:42 AM IST
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Prashant Bura is spending half of his salary for environmental protection
नर्सरी में तैयार किए पौधों के बीच साथी के साथ खड़े पर्यावरण मित्र प्रशांत बूरा। संवाद - फोटो : Sonipat
विष्णु कुमार
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सोनीपत। अपने लिए जीयें तो क्या जीयें, तू जी ए दिल जमाने के लिए... फिल्म के इस गाने में कहे गए बोलों को सोनीपत के गांव बली कुतुबपुर निवासी युवा प्रशांत बूरा ने अपने जीवन में धारण करते हुए पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चलाई हुई है। खास बात यह है कि लोगों को शुद्ध हवा और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर भविष्य देने के उद्देश्य से प्रशांत बूरा अपने वेतन का आधा हिस्सा पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण पर खर्च कर रहा है। गांव के इस युवा के जज्बे को देखते हुए अब ग्रामीण भी पर्यावरण संरक्षण के लिए छेड़ी गई मुहिम में सहयोग करने लगे हैं।
सोनीपत के गांव बली कुतुबपुर निवासी प्रशांत बूरा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की चंडीगढ़ शाखा में कार्यरत हैं। प्रशांत बूरा का कहना है कि वर्तमान में बढ़ती आबादी और घटते पेड़ों के कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। बस यही सोचकर लोगों को शुद्ध वायु और पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम छेड़ दी। युवा प्रशांत बूरा द्वारा शुरू की गई इस मुहिम ने न सिर्फ गांव को हरा-भरा बनाया, बल्कि ग्रामीणों को भी पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
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ट्री मैन अकेले चले, आज कारवां साथ, उन्हीं से मिली प्रेरणा
पर्यावरण मित्र प्रशांत बूरा बताते हैं कि रिजर्व बैंक में नौकरी करते हुए उन्होंने ट्री मैन देवेंद्र सूरा के बारे में सुना, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहते हैं। देवेंद्र सूरा अकेले चले और आज पूरा कारवां उनकी मुहिम को मजबूती प्रदान कर रहा है। चंडीगढ़ पुलिस के इस जवान की मुहिम ने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया, बस उसी दिन से पर्यावरण संरक्षण में जुट गया और पर्यावरण मित्र के रूप में देवेंद्र सूरा के साथ मिलकर प्रदेश को हरा-भरा बनाने में योगदान दे रहा हूं।
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गांव में लगा चुके हैं ऑक्सीजन बाग
दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपका रास्ता नहीं रोक सकती, बस जरूरत है कि लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए परिश्रम करने की। पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देने के लिए प्रशांत बूरा ने भी अपना परिश्रम जारी रखा और बली कुतुबपुर में 5 एकड़ जमीन पर आक्सीजन का बाग लगाया। इसमें ग्रामीणों ने भी पूरा सहयोग किया। पर्यावरण मित्र प्रशांत बूरा के प्रयास से आज गांव हरा-भरा बन चुका और और ग्रामीण भी पेड़ों का महत्व समझ चुके हैं। यही कारण है कि पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में ग्रामीण सहयोग को तत्पर रहते हैं।

वेतन पर 2 लाख रुपये का लोन लेने के लिए किया आवेदन
पर्यावरण मित्र प्रशांत बूरा ड्यूटी के अलावा ज्यादातर समय नर्सरी में विभिन्न किस्मों की पौध तैयार करने और उनमें खाद-पानी देने में समय व्यतीत करते हैं। पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देते हुए प्रशांत ने अपने वेतन पर दो लाख रुपये लोन लेने के लिए आवेदन किया है। प्रशांत का कहना है कि लोन मिलते ही नए पौधे खरीदेंगे और उन्हें नि:शुल्क वितरित करेंगे। जो पौधे लगाए गए हैं, वे पेड़ बन सकें, इसके लिए भी प्रयास करेंगे। प्रशांत बूरा पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
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