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Sonipat News: बेहद खराब स्तर पर पहुंचा प्रदूषण...देश में सबसे प्रदूषित शहर बना सोनीपत
Sun, 30 Nov 2025 01:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 30 Nov 2025 01:37 AM IST
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फोटो :29: सोनीपत के मुरथल क्षेत्र में लगी आग से उठता धुआं। संवाद
सोनीपत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक बार फिर बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया है। ग्रैप-3 हटते ही हालात तेजी से बिगड़ने लगे और सोनीपत देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। शनिवार को शहर का एक्यूआई 329 दर्ज किया गया जोकि ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। ग्रैप-2 लागू होने के बावजूद कूड़ा जलाने और धूल उड़ने की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है।
शनिवार को पूरे देश के प्रदूषित शहरों की सूची में सोनीपत शीर्ष पर रहा। एनसीआर के अन्य शहरों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। बहादुरगढ़ का एक्यूआई 322, हापुड़ और नोएडा का 310 और धारुहेड़ा का 309 दर्ज किया गया। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि पूरे क्षेत्र में वायु प्रदूषण बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है।
मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 9.5 डिग्री दर्ज किया गया। हवा 10 किमी प्रति घंटा की दर चलने के बाद भी प्रदूषण फैलाने या घटाने में प्रभावी नहीं हो पा रही, जिससे प्रदूषक तत्व निचली वायु परत में ही जमा हो रहे हैं।
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आग लगाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। शनिवार को मुरथल क्षेत्र में कूड़े में आग लगी थी। जिससे धुआं का गुबार उठ रहा था।
सांस, दिल और फेफड़ों के मरीजों के लिए बढ़ा खतरा
एक्यूआई के 300 पार जाते ही हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों को सीधे नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इसी को लेकर चिकित्सक ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉ. जेएस पूनिया ने कहा कि 329 का एक्यूआई स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय व श्वसन रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
चिकित्सक ने दी सलाह
- सुबह-शाम घर में रहें, अनावश्यक बाहर न निकलें।
- बिना मास्क के बाहर न जाएं।
- शरीर को हाइड्रेटेड रखें, श्वास नलिकाओं में नमी बनी रहेगी।
- विटामिन सी और ओमेगा फैटी एसिड का सेवन करें। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता और फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं।
- जॉगिंग और भारी व्यायाम से प्रदूषित हवा गहरे फेफड़ों तक पहुंच जाती है।
- श्वसन रोगों से ग्रसित मरीज दवा बंद न करें।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आंशिक रूप से बादल छाए हुए थे। अब पहाड़ी क्षेत्रों की ठंडी हवा मैदानी क्षेत्रों में पहुंचना शुरू हो गई है। जिसके चलते तापमान में कमी आएगी। सप्ताह के अंत तक न्यूनतम तापमान के साथ-साथ अधिकतम तापमान भी कम होगा।
- डॉ. प्रेमदीप, मौसम वैज्ञानिक, केवीके सोनीपत
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शनिवार को पूरे देश के प्रदूषित शहरों की सूची में सोनीपत शीर्ष पर रहा। एनसीआर के अन्य शहरों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। बहादुरगढ़ का एक्यूआई 322, हापुड़ और नोएडा का 310 और धारुहेड़ा का 309 दर्ज किया गया। यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि पूरे क्षेत्र में वायु प्रदूषण बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है।
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मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 9.5 डिग्री दर्ज किया गया। हवा 10 किमी प्रति घंटा की दर चलने के बाद भी प्रदूषण फैलाने या घटाने में प्रभावी नहीं हो पा रही, जिससे प्रदूषक तत्व निचली वायु परत में ही जमा हो रहे हैं।
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आग लगाने के मामलों में कमी नहीं आ रही है। शनिवार को मुरथल क्षेत्र में कूड़े में आग लगी थी। जिससे धुआं का गुबार उठ रहा था।
सांस, दिल और फेफड़ों के मरीजों के लिए बढ़ा खतरा
एक्यूआई के 300 पार जाते ही हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों को सीधे नुकसान पहुंचाने लगते हैं। इसी को लेकर चिकित्सक ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। डॉ. जेएस पूनिया ने कहा कि 329 का एक्यूआई स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय व श्वसन रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
चिकित्सक ने दी सलाह
- सुबह-शाम घर में रहें, अनावश्यक बाहर न निकलें।
- बिना मास्क के बाहर न जाएं।
- शरीर को हाइड्रेटेड रखें, श्वास नलिकाओं में नमी बनी रहेगी।
- विटामिन सी और ओमेगा फैटी एसिड का सेवन करें। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता और फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं।
- जॉगिंग और भारी व्यायाम से प्रदूषित हवा गहरे फेफड़ों तक पहुंच जाती है।
- श्वसन रोगों से ग्रसित मरीज दवा बंद न करें।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से आंशिक रूप से बादल छाए हुए थे। अब पहाड़ी क्षेत्रों की ठंडी हवा मैदानी क्षेत्रों में पहुंचना शुरू हो गई है। जिसके चलते तापमान में कमी आएगी। सप्ताह के अंत तक न्यूनतम तापमान के साथ-साथ अधिकतम तापमान भी कम होगा।
- डॉ. प्रेमदीप, मौसम वैज्ञानिक, केवीके सोनीपत