एक दशक की खूनी रंजिश ने बदल दिया झरोठ का दिल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचायत चुनाव में खरखौदा खंड के जाट बाहुल्य गांव झरोठ ने इतिहास रच दिया है। एक दशक की खूनी रंजिश ने झरोठ के दिल को ऐसा बदला कि भाईचारे के सामने चुनावी तामझाम फीका पड़ गया। ग्रामीणों ने मिलकर पूरी पंचायत को ही सर्वसम्मति से चुन लिया। हालांकि पंच के लिए वार्ड नंबर-9 से भरा सुरेंद्र का फार्म रद हो गया। वहीं, मौजमनगर के सरपंच पद के चार प्रत्याशियों के फार्म शर्तें पूरी न करने पर रद हो गए। एकमात्र बची दावेदार सुनीता बिना सर्वसम्मति व चुनाव लड़े सरपंच बन गईं। वहीं, मुंडलाना ब्लॉक में 282 पंच सर्वसम्मति से चुने गए हैं।
झरौठ गांव में 2002 में मामूली बात को लेकर दो पक्षों में कहासुनी हो गई, जो बाद में खूनी संघर्ष में बदल गई। सात साल चली रंजिश में दोनों पक्षों के करीब सात लोगों की जान गई। रंजिश को खत्म करने के लिए खाप पंचायत व दहिया चालीसा आगे गई। 2009 में खरखौदा में महापंचायत हुई, जिसमें खुद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी शिरकत की। पंचायत में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। 2010 में पंचायत चुनाव चाचा-भतीजे के बीच बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में लड़ा गया। भतीजे प्रवीण ने चाचा रोहताश को हराकर पंचायत की कमान संभाली।
अब कमलेश सर्वसम्मति से बनी सरपंच
शिक्षा का नियम लागू होने के बाद झरोठ गांव ने नया इतिहास लिखने का फैसला किया। चार माह पहले ही ग्रामीणों ने एकत्रित होकर सर्वसम्मति से सरपंच व पंच चुनने का निर्णय लिया था। इसी के चलते हर पद के लिए एक-एक आवेदन किया गया। नियमों पर खरा उतरते कमलेश अब सरपंच पद की कमान संभालेंगी। वहीं, ओमबीर, बीना कुमारी, दीपक, नीरज, सुनीलदत्त, कृष्ण, नरेश व सविता सर्वसम्मति से पंच चुनी गई हैं।
पड़ोसी गांवों ने भी दिखाया भाईचारा
झरौठ से शुरू हुई भाईचारे की मिसाल का पड़ोसी गांव झरौठी व आनंदपुर पर भी असर हुआ। तीनों गांव ब्लॉक समिति के वार्ड नंबर-18 में आते हैं, जहां से झरौठ गांव निवासी राजबीर सिंह को सर्वसम्मति से ब्लॉक समिति का सदस्य चुना गया है।
यहां हुई गड़बड़ी
गांव में पंच के वार्ड नंबर-9 से ग्रामीणों ने पांचवीं पास सुरेंद्र का फार्म दाखिल करवाया था, जो नए नियमों के तहत रद हो गया। नए नियमानुसार, पंच के लिए सामान्य श्रेणी में आठवीं पास होना अनिवार्य है। अब पंच के लिए बाद में उपचुनाव होगा।
मौजमनगर में चार विरोधियों के फार्म रद, सुनीता बनीं सरपंच
खरखौदा ब्लॉक के गांव मौजमनगर की किस्मत ने ऐसी पलटी मारी कि बिना चुनाव लड़े ही गांव की सरपंच तय हो गई। सरपंच पद के लिए पांच में से चार उम्मीदवारों के नामांकन रद हो गए। पंचायत चुनाव अधिकरी सुमित बख्शी ने बताया कि दूसरे प्रत्याशियों के फार्म रद होने से सुनीता सरपंच बन गई हैं।
मुंडलाना खंड में 282 व सोनीपत में 272 पंच बने सर्वसम्मति से
पंचायत चुनाव के पहले चरण में मुंडलाना खंड के पंच, सरपंच के भरे गए नामांकनों की जांच व छंटनी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदकों को चुनाव चिन्ह भी दिए जा चुके हैं। मुंडलाना खंड के 394 पंचों में से 282 को सर्वसम्मति से चुना गया है। अब केवल 185 पंचों के चुनाव होने हैं। इसके अलावा 34 सरपंचों के चुनाव भी साथ ही होने हैं। मुंडलाना खंड में पंच के 7 वार्ड किसी के नामांकन न भरने के कारण खाली रह गए हैं।
मुंडलाना ब्लॉक में 34 पंचायतें हैं, जिसमें 282 पंच सर्वसम्मति से बने। सात फार्म न भरने के चलते खाली रह गए, जिसमें दो बुटाना खेतलान, 1 बुटाना कुंडू, 1 बिचपड़ी, 1 जागसी व 2 नूरनखेड़ा में शामिल है। वहीं, सोनीपत ब्लाक में 598 में से 272 सर्वसम्मति बनी है, जबकि 15 वार्ड फार्म न भरने के चलते खाली रह गए। इनमें गठी हकीकत, जाजी, जुआ प्रथम, महलाना, महीपुर, रत्नगढ़, सांदलखुर्द, सांदल कलां, सलीमपुर ट्राली, भठगांव, बागड़ में एक-एक और भटाना-जाफराबाद और बाहदशापुर माच्छरी में दो-दो पंचों के वार्ड खाली रह गए।
फोटो-05 झरोठ की सर्वसम्मति से सरपंच बनी कमलेश।