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Sonipat News: गंभीर स्तर पर पहुंचा पीएम-2.5 व पीएम-10, बढ़ने लगे सांस व दमा के रोगी

Thu, 17 Oct 2024 06:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Thu, 17 Oct 2024 06:13 AM IST
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PM-2.5 and PM-10 reached critical levels, respiratory and asthma patients started increasing.
सोनीपत। पर्यावरण में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)-2.5 और पीएम-10 गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप-1 लागू कर दिया है। पीएम 2.5 और 10 का स्तर बढ़ने से सांस व दमा के मरीजों को परेशानी होने लगी है। जिला अस्पताल में 100 से ज्यादा मरीज उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ प्रदूषण से बचाव की सलाह दे रहे हैं। निर्माण कार्य में लगे मजदूरों खासकर अस्थमा व दमा के मरीजों को मास्क लगाने की सलाह दी जा रही है। जिले में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)-2.5 का स्तर 500 और पीएम-10 का स्तर 469 पहुंच गया है। दोनों ही गंभीर स्थिति में हैं। इसके कारण अस्पतालों में सांस के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में पहले सांस व दमा के 50-60 मरीज आते थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 100-130 तक पहुंच गई है। चिकित्सक का कहना है कि पहले से ही बढ़े प्रदूषण के बीच मौसम में परिवर्तन हो रहा है। सुबह-शाम यह मौसम सांस व दमा के रोगियों के लिए जटिलताओं वाला साबित हो रहा है, जिसके कारण खतरा बढ़ गया है। जिन लोगों का सांस की समस्या है, उन्हें इन दिनों विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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प्रदूषण से बचने के लिए एहतियात बरतें

छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. जसवंत सिंह पूनिया ने मरीजों को प्रदूषण से बचाव के लिए एहतियात बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोगों को इस मौसम में ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। घर से बाहर बिना किसी कारण के नहीं निकलें। निकलते हैं तो मास्क व चश्मा लगाकर निकलना चाहिए। आंखों को दिन में कई बार पानी से धोते रहना चाहिए। इससे आंखों में परेशानी होने का खतरा कम रहता है।
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एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना चाहिए
फिजिशियन डॉ. शैलेंद्र राणा ने कहा कि जिन्हें सांस और अस्थमा की बीमारी है उन्हें सुबह शाम घर से बाहर टहलना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मौसम में जब हवा थोड़ी सी भी खराब होती है तो परेशानी बढ़ जाती है। हवा साफ रखने के लिए एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना चाहिए।
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बच्चों और बुजुर्गों के लिए चिकित्सकों के सुझाव

- घर में रहें, बहुत जरूरी होने पर ही बाहर निकलें।
- संभव हो तो घर में एयर प्यूरिफायर लगाएं।

- पानी खूब पीएं, इससे शरीर से विषाक्त तत्व निकल जाते हैं।

- एन-95 मास्क पहनकर ही बाहर निकलें।
- प्रदूषण से बचने के लिए चश्मे का इस्तेमाल करें।


क्या है पीएम-2.5 व 10
पीएम-10 में 10 माइक्रोन या उससे कम व्यास वाले कण होते हैं। यह कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंच सकते हैं और सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। वहीं पीएम 2.5 हवा में मौजूद छोटे कणों या बूंदों को कहते हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। यह कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है।
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