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भविष्य की तस्वीर : दृष्टि बाधित के लिए वरदान बनेगी तीसरी आंख, बिना सहायता आ-जा सकेंगे
Sun, 29 Dec 2024 01:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 29 Dec 2024 01:08 AM IST
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फोटो 17- सोनीपत के राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर
सोनीपत। प्रकृति की सुंदरता को निहारने और इसका आनंद लेने के लिए मनुष्य के पास दो आंखें हैं, लेकिन दुनिया में बहुत से लोग ऐसे में जिनके पास आंखें नहीं है। इन्हें कहीं आने-जाने या किसी कार्य के लिए दूसरों की जरूरत पड़ती है। ऐसे दृष्टि बाधित लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तेलंगाना की छात्रा सात्विका ने तीसरी आंख नामक उपकरण बनाया है, जो दृष्टिबाधित लोगों के लिए वरदान बनेगा।
हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई में आयोजित छह दिवसीय 51वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे विद्यार्थियों ने नवाचार पर आधारित शानदार मॉडल प्रस्तुत किए। तेलंगाना से अपनी मां व शिक्षिका के साथ पहुंची सात्विका ने दृष्टि बाधित लोगों के लिए तीसरी आंख का मॉडल प्रस्तुत किया। सात्विका ने बताया कि दृष्टि बाधित लोगों की दूसरों पर निर्भरता देख उन्हें कुछ ऐसा करने का विचार आया, जिससे दृष्टि बाधित लोग भी आत्म निर्भर बन सके। उन्होंने एक चश्मा और हाथ व पैर में पहनने वाले बैंड बनाए, जो दृष्टि बाधित लोगों की तीसरी आंख बनेंगे।
ऐसे करेगा काम
सात्विका ने बताया कि चश्मे में एक डिवाइस लगाया है, जो सामने किसी व्यक्ति या वस्तु के आने पर बीप की आवाज करेगा। इससे व्यक्ति को पता लग सकेगा कि सामने कोई है। वहीं हाथ व पैर में पहनने के लिए भी बैंड बनाए हैं। दृष्टि बाधित व्यक्ति के बराबर से जब कोई वाहन या व्यक्ति गुजरेगा तो हाथ पर बंधा बैंड बीप की आवाज करते हुए संकेत देगा। वहीं रास्ते में चलते हुए सामने कोई पत्थर, वस्तु, सीढियां या अन्य कोई बाधा आती है तो पैर पर बंधा बैंड बीप की आवाज कर संकेत देगा। यह उपकरण दृष्टि बाधित लोगों की दूसरों पर निर्भरता खत्म करेंगे। वह अपने इस उपकरण में जीपीएस सिस्टम का भी प्रयोग करने वाली हैं, जिससे दृष्टिबाधित व्यक्ति परिवार के संपर्क में रहेगा।
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बेहद कम मूल्य पर होगा उपलब्ध
सात्विका ने बताया कि उनके इस मॉडल को बनाने में दो से तीन हजार रुपये का खर्च आया है। जिसे कोई भी आम व्यक्ति आसानी से खरीद सकता है। वर्तमान में दृष्टि बाधित लोगों की सहायता के लिए इस प्रकार के जो उपकरण उपलब्ध हैं, उनकी कीमत करीब तीन लाख रुपये तक है। जिसे खरीदना सबके लिए संभव नहीं है।
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हरियाणा खेल विश्वविद्यालय, राई में आयोजित छह दिवसीय 51वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे विद्यार्थियों ने नवाचार पर आधारित शानदार मॉडल प्रस्तुत किए। तेलंगाना से अपनी मां व शिक्षिका के साथ पहुंची सात्विका ने दृष्टि बाधित लोगों के लिए तीसरी आंख का मॉडल प्रस्तुत किया। सात्विका ने बताया कि दृष्टि बाधित लोगों की दूसरों पर निर्भरता देख उन्हें कुछ ऐसा करने का विचार आया, जिससे दृष्टि बाधित लोग भी आत्म निर्भर बन सके। उन्होंने एक चश्मा और हाथ व पैर में पहनने वाले बैंड बनाए, जो दृष्टि बाधित लोगों की तीसरी आंख बनेंगे।
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ऐसे करेगा काम
सात्विका ने बताया कि चश्मे में एक डिवाइस लगाया है, जो सामने किसी व्यक्ति या वस्तु के आने पर बीप की आवाज करेगा। इससे व्यक्ति को पता लग सकेगा कि सामने कोई है। वहीं हाथ व पैर में पहनने के लिए भी बैंड बनाए हैं। दृष्टि बाधित व्यक्ति के बराबर से जब कोई वाहन या व्यक्ति गुजरेगा तो हाथ पर बंधा बैंड बीप की आवाज करते हुए संकेत देगा। वहीं रास्ते में चलते हुए सामने कोई पत्थर, वस्तु, सीढियां या अन्य कोई बाधा आती है तो पैर पर बंधा बैंड बीप की आवाज कर संकेत देगा। यह उपकरण दृष्टि बाधित लोगों की दूसरों पर निर्भरता खत्म करेंगे। वह अपने इस उपकरण में जीपीएस सिस्टम का भी प्रयोग करने वाली हैं, जिससे दृष्टिबाधित व्यक्ति परिवार के संपर्क में रहेगा।
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बेहद कम मूल्य पर होगा उपलब्ध
सात्विका ने बताया कि उनके इस मॉडल को बनाने में दो से तीन हजार रुपये का खर्च आया है। जिसे कोई भी आम व्यक्ति आसानी से खरीद सकता है। वर्तमान में दृष्टि बाधित लोगों की सहायता के लिए इस प्रकार के जो उपकरण उपलब्ध हैं, उनकी कीमत करीब तीन लाख रुपये तक है। जिसे खरीदना सबके लिए संभव नहीं है।

फोटो 17- सोनीपत के राई स्थित हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर