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पैरा एशियन गेम्स : गुरु को मिला कांसा, शिष्य जीत गया चांदी

Tue, 24 Oct 2023 01:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Tue, 24 Oct 2023 01:27 AM IST
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Para Asian Games: Guru got bronze, disciple won silver
एशियन गेम्स के पदक विजेता प्रणव सूरमा (बीच में) के साथ धर्मबीर नैन (बाहिने) व अमित सरोहा (दाहि
सोनीपत। चीन के हांगझोऊ में शुरू हुए पैरा एशियन गेम्स में पहले ही दिन सोनीपत के गुरु-शिष्य ने देशवासियों को खुशी मनाने का मौका दिया है। गांव बैंयापुर निवासी अंतरराष्ट्रीय क्लब थ्रोअर अमित सरोहा व उनके शिष्य गांव भदाना निवासी धर्मबीर नैन ने शानदार प्रदर्शन कर कांस्य व रजत पदक देश की झोली में डाले हैं। धर्मबीर नैन ने 28.76 मीटर थ्रो कर रजत व अमित सरोहा ने 26.93 मीटर थ्रो कर कांस्य पदक जीता है। इतना ही नहीं स्पर्धा का स्वर्ण पदक भी हरियाणा के फरीदाबाद के लाडले प्रणव सूरमा ने 30.01 मीटर थ्रो जीता है। अमित व धर्मबीर के परिजनों ने उनकी जीत पर खुशी जताई है।
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अमित सरोहा इससे पहले वर्ष 2010, 2014 व 2018 एशियन गेम्स में दो स्वर्ण व दो रजत पदक जीत चुके हैं। उन्होंने अब पांचवां पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। इससे पहले अमित ने वर्ष 2017 में लंदन में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में 30.27 मीटर थ्रो लगाकर रजत पदक देश को दिलाया था। वह देश के लिए करीब 50 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। दुर्घटना में दिव्यांग होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत व जुनून से नई बुलंदियां हासिल की। अमित सरोहा ने अपनी प्रतिभा को खुद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद कई खिलाड़ी तैयार किए। युवाओं की उभरती पीढ़ी के यूथ आइकन बने अमित सरोहा कई खिलाड़ियों को तराश चुके हैं।
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अमित के शिष्य धर्मबीर नैन ने गुरु से आगे बढ़ते हुए देश को इस स्पर्धा का रजत पदक दिलाया है। धर्मबीर नैन को भी बचपन से ही खेलने का शौक रहा है। तीन बहनों का इकलौता भाई होने के कारण परिवार ने घर से बाहर जाकर खेलने की अनुमति नहीं दी। जून 2012 में एमए प्रथम वर्ष की पढ़ाई के दौरान दोस्तों के साथ नहर में नहाते हुए छलांग लगाने पर जलस्तर कम होने से उनकी गर्दन सीधा जमीन से जा टकराई थी। हादसे में रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और आधे से ज्यादा शरीर ने काम करना बंद कर दिया था। दिल्ली में इलाज कराने के बाद 6 महीने गुरुग्राम में आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण लिया था। जिस खेल से परिवार दूर रखना चाहते थे, इत्तफाक से खेल का मोह दुर्घटना के बाद भी नहीं छूटा और खुद को ऐसा तैयार किया कि हर कोई उनकी काबिलियत का लोहा मान रहा है। वर्ष 2013 से वह अमित के सानिध्य में रहकर आगे बढ़ते चले गए। वर्ष 2018 एशियन गेम्स में अमित ने स्वर्ण व धर्मबीर ने रजत पदक जीता था।
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जीत पर परिजनों ने मनाई खुशी

अमित के घर पर उनकी मां दर्शना, भाई सुमित, भाभी प्रियंका, भतीजी रक्षिता व वंशिता, चाचा ओमप्रकाश, चाची सत्यवती, चचेरे भाई विजय सरोहा, बुआ शकुंतला और भांजी सरिता ने सभी का मुंह मीठा कराया। उन्होंने अमित के साथ गए प्रशिक्षक देवेंद्र व सहायक देवेंद्र सरोहा को भी बधाई दी। मां दर्शना ने कहा कि अमित ने तबीयत खराब होते हुए देश की झोली की पदक डाला है। वहीं मूलरूप से गांव भदाना फिलहाल सूरी पेट्रोल पंप वाली निवासी धर्मबीर के घर पर उनकी मां प्रेम, बुआ सावित्री और पत्नी ज्योति ने खुशी मनाई। ज्योति ने कहा कि उनके पति की जीत में सबसे बड़ा योगदान अमित सरोहा का है।
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