{"_id":"69163e7ee288551d770a1dc6","slug":"panel-lawyer-is-available-free-of-cost-for-income-less-than-three-lakhs-vinod-sonipat-news-c-197-1-snp1012-145217-2025-11-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन लाख से कम आय पर निशुल्क मिलता है पैनल अधिवक्ता : विनोद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन लाख से कम आय पर निशुल्क मिलता है पैनल अधिवक्ता : विनोद
Fri, 14 Nov 2025 01:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 14 Nov 2025 01:54 AM IST
विज्ञापन
सोनीपत। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से वीरवार को गांव चटिया औलिया की चौपाल पर जागरूकता शिविर लगाया गया। इस दौरान ग्रामीणों को कानून की जानकारी देने के साथ उन्हें पराली न जलाने की शपथ दिलाई
अधिवक्ता विनोद ने ग्रामीणों को बताया कि जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम है वह अपने मामलों के लिए निशुल्क पैनल अधिवक्ता की सहायता ले सकता है। प्राधिकरण के सदस्य आशीष ने किसानों को पराली जलाने के पर्यावरणीय दुष्परिणाम बताए।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से हवा में हानिकारक गैसें मिलती हैं जिससे वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता में कमी और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि पराली जलाना भारतीय दंड संहिता की धारा 188 एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत दंडनीय अपराध है।
विज्ञापन
इसके तहत 5 से 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने किसानों को पूसा डी कंपोजर, कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट तथा पशुचारे के रूप में पराली के उपयोग जैसे पर्यावरण हितैषी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया। शिविर के अंत में ग्रामीणों ने यह संकल्प लिया कि वह पर्यावरण संरक्षण और कानूनी जागरूकता के प्रसार में सक्रिय योगदान देंगे।
विज्ञापन
अधिवक्ता विनोद ने ग्रामीणों को बताया कि जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम है वह अपने मामलों के लिए निशुल्क पैनल अधिवक्ता की सहायता ले सकता है। प्राधिकरण के सदस्य आशीष ने किसानों को पराली जलाने के पर्यावरणीय दुष्परिणाम बताए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से हवा में हानिकारक गैसें मिलती हैं जिससे वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता में कमी और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि पराली जलाना भारतीय दंड संहिता की धारा 188 एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत दंडनीय अपराध है।
विज्ञापन
इसके तहत 5 से 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने किसानों को पूसा डी कंपोजर, कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट तथा पशुचारे के रूप में पराली के उपयोग जैसे पर्यावरण हितैषी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया। शिविर के अंत में ग्रामीणों ने यह संकल्प लिया कि वह पर्यावरण संरक्षण और कानूनी जागरूकता के प्रसार में सक्रिय योगदान देंगे।