कैंसर रोगियों की मदद: केशदान के लिए छात्रा ने चलाई मुहिम, खुद दान कर चुकी 25 इंच लंबे बाल, ग्रुप बना दूसरों को भी कर रही प्रेरित
छात्रा पलक गर्ग ने कैंसर रोगियों के लिए केशदान की मुहिम चलाई। सबसे पहले पलक गर्ग ने केश दान किए। एम्स में बिना केश की कैंसर पीड़िताओं को देखकर केशदान का संकल्प लिया था। अभी तक पांच युवतियां व तीन युवक बाल दान कर चुके हैं। केशदान ग्रुप में इस समय सोनीपत की 27 लड़कियां शामिल हैं।
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दूसरों के लिए नि:स्वार्थ भावना से कुछ कर गुजरने वाले विरले ही होते हैं। इन्हीं में से एक हैं हरियाणा के सोनीपत सेक्टर-15 निवासी पलक गर्ग। इन्होंने कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए बेहिचक अपने 25 इंच लंबे बालों को दान कर दिया। किसी ने इनके प्रयास को सराहा तो किसी ने हतोत्साहित भी किया, लेकिन मन में कैंसर पीड़ितों के लिए कुछ कर गुजरने की ठान चुकी पलक ने सभी बातों को दरकिनार कर इनकी सहायता के लिए निरंतर प्रयास करती रहीं।
इसी के तहत उन्होंने एक ग्रुप बनाया और कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए चलाई जा रही मुहिम के बारे में अपने दोस्तों व जानकारों को बताया। पलक का प्रयास रंग लाया और वर्तमान में केशदान ग्रुप में जिले की 27 लड़कियां शामिल हैं। यही नहीं अभी तक पांच युवतियां व तीन युवक भी अपने केश दान कर चुके हैं।
सेक्टर-15 निवासी प्रधान गन हाउस के मालिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता पवन गर्ग की बेटी पलक गर्ग स्नातक की छात्रा हैं। पलक ने 2 सितंबर 2021 को कैंसर पीड़ितों के लिए बचपन से संवारे अपने सिर से बालों को कटवाकर सैनिटाइज कर मुंबई के लिए कोरियर कर दिया था। पलक द्वारा दान किए गए बालों से तीन रोगियों की विग तैयार की गई। कैंसर रोगियों के लिए बेटी के प्रयास की परिजनों ने जमकर सराहना की।
पलक ने बताया कि वह कैंसर पीड़ितों की सहायता के लिए हमेशा प्रयासरत रहेंगी। उनके केशदान ग्रुप में 27 छात्राएं शामिल हो चुकी हैं। वह युवाओं को भी केशदान करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। ग्रुप में शामिल अन्य छात्राएं भी अपने बालों को कैंसर पीड़ितों के लिए दान करेंगी। उनके अभियान को युवाओं का लगातार सहयोग मिल रहा है।
कैंसर पीड़ितों के उड़ जाते हैं बाल
कैंसर से पीड़ित मरीजों के अक्सर बाल उड़ जाते हैं। युवा लड़कियां बिना बालों के अजीब लगती हैं। इसलिए ऐसे कैंसर पीड़ित, जिनके बाल उड़ जाते हैं, वे विग का प्रयोग करते हैं। उनके लिए विग केरल और मुंबई के कैंसर अस्पतालों की देखरेख में तैयार की जाती हैं। इन विग को तैयार करने के लिए 12 इंच से लंबे बालों की जरूरत होती है। लड़कों के इतने लंबे बाल होते नहीं है और लड़कियां बालों को उतरवाने से हिचकिचाती हैं। यही कारण है कि सभी कैंसर पीड़ितों को विग मुहैया नहीं हो पाती।
ऐसे मिली प्रेरणा
पलक ने बताया कि मेरे नाना राधेश्याम दिल्ली एम्स के कैंसर वार्ड में भर्ती थे। मैं उनसे मिलने गई थी, जहां युवतियों को बिना बालों के देखा था। इसके बाद एम्स के चिकित्सकों से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि कैंसर रोगी महिलाओं को विग पहननी होती है। विग के लिए 12 इंच से बड़े बाल चाहिए। वह बालों को दान के रूप में स्वीकार करते हैं, लेकिन जरूरत के अनुसार बड़े बाल नहीं मिल पाते हैं। इसके लिए रेजर से उतरे हुए लंबे बालों की जरूरत होती है। चिकित्सकों की बातें सुनने के दौरान ही मैंने अपने बालों को कैंसर पीड़ितों को दान करने का संकल्प कर लिया था।
अब दूसरों को भी कर रही हैं प्रेरित
पलक गर्ग ने बाल उतरवाने के लिए अन्य लड़कियों को भी इसके लिए प्रेरित किया। पलक ने बताया कि लड़कियां और उनके स्वजन अक्सर बाल उतरवाने के लिए तैयार नहीं होते हैं। ऐसे में हम उनको केशदान के लिए प्रेरित करते हैं। उनको कैंसर पीड़ितों की परेशानी समझाई जाती है, तब कुछ लड़कियां तैयार हो जाती हैं। उनके ग्रुप में साथी छात्राओं सहित 27 लड़कियां शामिल हैं। वह केशदान के लिए तैयार हैं।
शुरू किया प्रोजेक्ट अद्भुत
स्प्रेड स्माइल फाउंडेशन के संस्थापक नितिन जैन ने बताया कि फाउंडेशन की संगठन के साथी सचिन बत्रा ने अपने 18 इंच लंबे बाल कैंसर पीड़ितों के लिए दान किए थे। उसके बाद पलक इसके लिए आगे आई। हम पलक गर्ग के नेतृत्व में प्रोजेक्ट अद्भुत के तहत केशदान करने के लिए अभियान चला रहे हैं। इसमें तान्या मल्होत्रा, तमन्ना जैन, तान्या, अभिषेक कामरा, हिमांशु सहित कुछ अन्य ने अपने बाल दान करने का संकल्प लिया है। केश दान करने वालों को अस्पताल की तरफ से प्रमाणपत्र भी दिया जाता है। नितिन ने बताया कि कोरोना के कारण अभी केशदान बंद है। अब मार्च-अप्रैल में बाल उतरवाकर भिजवाए जाएंगे।