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ओलंपिक कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया आधी रात को पहुंचे सोनीपत, खेल प्रमियों ने किया जोरदार स्वागत
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सोनीपत में पहुंचने पर बेटे द्वारा ओलंपिक का मेडल पहनाए जाने के बाद उसे दिखाती मां रामप्यारी।
- फोटो : Sonipat
सोनीपत। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाले पहलवान बजरंग पूनिया सोमवार आधी रात को दिल्ली से सोनीपत स्थित अपने घर पहुंचे। यहां पहुंचने पर उनका खेल प्रेमियों व परिजनों ने जोरदार स्वागत किया। आधी रात को खेल प्रेमी उनके घर के बाहर जुट गए और डीजे बजाकर नाचते रहे।
सोमवार देर रात घर पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। बजरंग ने घर के गेट पर ही अपना ओलंपिक पदक अपनी मां रामप्यारी के गले में पहना दिया, जिससे अभिभूत होकर मां ने उसे अपने हाथों से तैयार चूरमा खिलाया। भाभी मोनिका ने भी उन्हें चूरमा खिलाया। पिता बलवान सिंह इस दौरान भावुक हो गए और अपने लाडले को गले से लगा लिया। रात को बंगलूरू कैंप से लौटीं बजरंग की पत्नी अंतरराष्ट्रीय पहलवान संगीता पूनिया ने उन्हें सरप्राइज दिया। बजरंग भी उनके गले में डाली जा रही नोटों की माला निकालकर अपने परिजनों के गले में पहनाते दिखे। घर के गेट पर ही विजयी योद्धा की तरह उनकी आरती उतारी और फिर बजरंग ने घर में प्रवेश किया। इस दौरान करीब दो घंटे तक परिजन व खेल प्रेमी झूमते रहे और जमकर नाच-गाना भी हुआ।
तिरंगों से सजा था घर
रात को जब बजरंग घर पहुंचे तो पूरा घर तिरंगों से सजा था। गुब्बारे भी राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के ही लगाए गए थे। बजरंग के भाई हरेंद्र पूरी तरह गदगद थे। उन्होंने कहा कि बजरंग ने देश का मान विश्व पटल पर चमका दिया है।
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पिता ने सिखाया था धोबी पछाड़ दांव, चोटिल होकर 15 दिन में ठीक हुए थे बजरंग
बजरंग के पिता बलवान सिंह ने पुरानी याद साझा करते हुए बताया कि शुरुआत में उन्होंने खेत में बजरंग को धोबी पछाड़ दांव सिखाया था, लेकिन इस दौरान बजरंग घायल हो गया था और 15 दिन में ठीक हुआ था। इसके बाद उसने कुश्ती सीखने का मन बनाया और खेलना शुरू कर दिया।
दिनभर लगा रहा बधाई देने वालों का तांता
बजरंग का परिवार झज्जर के गांव खुडन का रहने वाला है, लेकिन 2015 से वह सोनीपत में मॉडल टाउन में रहते हैं। शहर में पहुंचने के बाद मंगलवार को दिनभर बजरंग के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। वहीं, खेल प्रेमियों ने शहरभर में बजरंग के पोस्टर लगा दिए। बजरंग के घर पर पहुंचने वालों को लड्डू व रसगुल्ले खिलाए गए।
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सोमवार देर रात घर पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। बजरंग ने घर के गेट पर ही अपना ओलंपिक पदक अपनी मां रामप्यारी के गले में पहना दिया, जिससे अभिभूत होकर मां ने उसे अपने हाथों से तैयार चूरमा खिलाया। भाभी मोनिका ने भी उन्हें चूरमा खिलाया। पिता बलवान सिंह इस दौरान भावुक हो गए और अपने लाडले को गले से लगा लिया। रात को बंगलूरू कैंप से लौटीं बजरंग की पत्नी अंतरराष्ट्रीय पहलवान संगीता पूनिया ने उन्हें सरप्राइज दिया। बजरंग भी उनके गले में डाली जा रही नोटों की माला निकालकर अपने परिजनों के गले में पहनाते दिखे। घर के गेट पर ही विजयी योद्धा की तरह उनकी आरती उतारी और फिर बजरंग ने घर में प्रवेश किया। इस दौरान करीब दो घंटे तक परिजन व खेल प्रेमी झूमते रहे और जमकर नाच-गाना भी हुआ।
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तिरंगों से सजा था घर
रात को जब बजरंग घर पहुंचे तो पूरा घर तिरंगों से सजा था। गुब्बारे भी राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के ही लगाए गए थे। बजरंग के भाई हरेंद्र पूरी तरह गदगद थे। उन्होंने कहा कि बजरंग ने देश का मान विश्व पटल पर चमका दिया है।
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पिता ने सिखाया था धोबी पछाड़ दांव, चोटिल होकर 15 दिन में ठीक हुए थे बजरंग
बजरंग के पिता बलवान सिंह ने पुरानी याद साझा करते हुए बताया कि शुरुआत में उन्होंने खेत में बजरंग को धोबी पछाड़ दांव सिखाया था, लेकिन इस दौरान बजरंग घायल हो गया था और 15 दिन में ठीक हुआ था। इसके बाद उसने कुश्ती सीखने का मन बनाया और खेलना शुरू कर दिया।
दिनभर लगा रहा बधाई देने वालों का तांता
बजरंग का परिवार झज्जर के गांव खुडन का रहने वाला है, लेकिन 2015 से वह सोनीपत में मॉडल टाउन में रहते हैं। शहर में पहुंचने के बाद मंगलवार को दिनभर बजरंग के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। वहीं, खेल प्रेमियों ने शहरभर में बजरंग के पोस्टर लगा दिए। बजरंग के घर पर पहुंचने वालों को लड्डू व रसगुल्ले खिलाए गए।

सोनीपत में पहुंचे बजरंग पूनिया को चूरमा खिलाती मां।- फोटो : Sonipat