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Sonipat News: बहुचर्चित रहा था निशा-सूरज हत्याकांड, वारदात के बाद लगा दी गई थी अकादमी में आग
Sat, 06 Jun 2026 01:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 06 Jun 2026 01:04 AM IST
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फोटो : हत्या का दोषी पवन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। गांव हलालपुर की महिला पहलवान निशा अपने खेल कौशल और मेहनत के दम पर कुश्ती जगत में तेजी से पहचान बना रही थी। कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। परिवार को उम्मीद थी कि उचित मार्गदर्शन और बेहतर प्रशिक्षण मिलने पर वह भविष्य में देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकती थी। पांच साल पहले निशा के साथ उनके भाई की हत्या का मामला काफी चर्चित रहा था। घटना के बाद कुश्ती अकादमी को आग के हवाले कर दिया था।
गांव हलालपुर की कुश्ती अकादमी में मौत के घाट उतारी गई निशा की खेलों में रुचि छात्र जीवन के दौरान बढ़ी थी। प्रताप स्कूल में 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कुश्ती को गंभीरता से अपनाया था और नियमित अभ्यास शुरू कर दिया था। उनकी मेहनत और लगन ने जल्द ही उसे जिले और प्रदेश की सीमाओं से आगे पहचान दिलानी शुरू कर दी।
निशा ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई उपलब्धियां हासिल कीं। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आयोजित अंतर विश्वविद्यालय कुश्ती प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उसके प्रदर्शन को देखते हुए खेल विशेषज्ञ और परिवार के लोग उनके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद कर रहे थे।
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परिचितों का कहना है कि निशा अपने लक्ष्य को लेकर बेहद गंभीर थी और रोजाना घंटों अभ्यास करती थी। कुश्ती के प्रति उनका समर्पण ही उन्हें अन्य खिलाडिय़ों से अलग बनाता था। यही कारण था कि परिजनों को विश्वास था कि यदि उसे लगातार बेहतर अवसर और प्रशिक्षण मिलता रहता तो वह राष्ट्रीय टीम तक पहुंचकर ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकती थी।
ग्रामीणों और खेल प्रेमियों के बीच भी निशा की पहचान एक मेहनती और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में थी। उनकी उपलब्धियों ने क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी खेलों में आगे बढऩे की प्रेरणा दी थी। आज भी गांव के लोग उन्हें एक उभरती हुई पहलवान के रूप में याद करते हैं, जिसने अपने प्रदर्शन से क्षेत्र का नाम रोशन किया था।
निशा के साथ उनके इकलौते भाई सूरज की भी जान ले ली गई थी। इससे गुस्साए लोगों ने तब अकादमी को भी आग लगा दी थी। पोस्टर फाड़ दिए गए थे। काफी हंगामा हुआ था। दोषी पवन पहले नांगल ठाकरान में देता था प्रशिक्षण, फिर हलालपुर में खोल ली अकादमी दोषी कोच पवन ने हलालपुर में 6 दिसंबर, 2018 को अकादमी खोली थी। इससे पहले वह दिल्ली के गांव नांगल ठाकरान में प्रशिक्षण देता था। निशा को परिचित ने पवन से मिलवाया था। जिसके बाद वह नांगल ठाकरान में जाकर प्रशिक्षण लेने लगी।
वहां से साझेदार अखाड़ा संचालक के साथ विवाद होने पर पवन ने पहले बवाना व बाद में निशा के गांव में अकादमी खोली थी। निशा वर्ष 2016-17 में प्रताप स्कूल खरखौदा में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। वहां पर अन्य खिलाड़ियों को खेलते देख उसमें कुश्ती के प्रति लालसा जगी थी। उसने वहां कुछ प्रतियोगिताओं में भाग भी लिया, लेकिन पदक नहीं जीत सकी थी। बाद में स्कूल छोडऩे के बाद कुश्ती अकादमी में जाने लगी।
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सोनीपत। गांव हलालपुर की महिला पहलवान निशा अपने खेल कौशल और मेहनत के दम पर कुश्ती जगत में तेजी से पहचान बना रही थी। कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। परिवार को उम्मीद थी कि उचित मार्गदर्शन और बेहतर प्रशिक्षण मिलने पर वह भविष्य में देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकती थी। पांच साल पहले निशा के साथ उनके भाई की हत्या का मामला काफी चर्चित रहा था। घटना के बाद कुश्ती अकादमी को आग के हवाले कर दिया था।
गांव हलालपुर की कुश्ती अकादमी में मौत के घाट उतारी गई निशा की खेलों में रुचि छात्र जीवन के दौरान बढ़ी थी। प्रताप स्कूल में 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कुश्ती को गंभीरता से अपनाया था और नियमित अभ्यास शुरू कर दिया था। उनकी मेहनत और लगन ने जल्द ही उसे जिले और प्रदेश की सीमाओं से आगे पहचान दिलानी शुरू कर दी।
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निशा ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई उपलब्धियां हासिल कीं। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में आयोजित अंतर विश्वविद्यालय कुश्ती प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उसके प्रदर्शन को देखते हुए खेल विशेषज्ञ और परिवार के लोग उनके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद कर रहे थे।
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परिचितों का कहना है कि निशा अपने लक्ष्य को लेकर बेहद गंभीर थी और रोजाना घंटों अभ्यास करती थी। कुश्ती के प्रति उनका समर्पण ही उन्हें अन्य खिलाडिय़ों से अलग बनाता था। यही कारण था कि परिजनों को विश्वास था कि यदि उसे लगातार बेहतर अवसर और प्रशिक्षण मिलता रहता तो वह राष्ट्रीय टीम तक पहुंचकर ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकती थी।
ग्रामीणों और खेल प्रेमियों के बीच भी निशा की पहचान एक मेहनती और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में थी। उनकी उपलब्धियों ने क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी खेलों में आगे बढऩे की प्रेरणा दी थी। आज भी गांव के लोग उन्हें एक उभरती हुई पहलवान के रूप में याद करते हैं, जिसने अपने प्रदर्शन से क्षेत्र का नाम रोशन किया था।
निशा के साथ उनके इकलौते भाई सूरज की भी जान ले ली गई थी। इससे गुस्साए लोगों ने तब अकादमी को भी आग लगा दी थी। पोस्टर फाड़ दिए गए थे। काफी हंगामा हुआ था। दोषी पवन पहले नांगल ठाकरान में देता था प्रशिक्षण, फिर हलालपुर में खोल ली अकादमी दोषी कोच पवन ने हलालपुर में 6 दिसंबर, 2018 को अकादमी खोली थी। इससे पहले वह दिल्ली के गांव नांगल ठाकरान में प्रशिक्षण देता था। निशा को परिचित ने पवन से मिलवाया था। जिसके बाद वह नांगल ठाकरान में जाकर प्रशिक्षण लेने लगी।
वहां से साझेदार अखाड़ा संचालक के साथ विवाद होने पर पवन ने पहले बवाना व बाद में निशा के गांव में अकादमी खोली थी। निशा वर्ष 2016-17 में प्रताप स्कूल खरखौदा में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। वहां पर अन्य खिलाड़ियों को खेलते देख उसमें कुश्ती के प्रति लालसा जगी थी। उसने वहां कुछ प्रतियोगिताओं में भाग भी लिया, लेकिन पदक नहीं जीत सकी थी। बाद में स्कूल छोडऩे के बाद कुश्ती अकादमी में जाने लगी।

फोटो : हत्या का दोषी पवन