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Sonipat News: लापरवाही...केजीपी-केएमपी जीरो प्वाइंट पर नहीं रात्रि प्रकाश की व्यवस्था
Sat, 23 Nov 2024 05:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 23 Nov 2024 05:31 AM IST
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सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 के जीरो प्वाइंट पर स्थित कुंडली मानेसर पलवल (केएमपी) एक्सप्रेस-वे व कुंडली-गाजियाबाद-पलवल पेरिफेरल-वे पर रात का सफर मुश्किल और खतरों से भरा है। यहां पर सूर्यास्त के बाद अंधेरा छा जाता है। केएमपी पर लगी स्ट्रीट लाइटें महज शो-पीस बनकर रह गई हैं। तीन साल में कुछ दिन ही यह लाइटें जली होंगी। केजीपी व नेशनल हाईवे पर भी यहां स्ट्रीट लाइट नहीं है। सर्दी के साथ कोहरा की समस्या शुरू हो गई है, इससे हादसों का भय बढ़ गया है।
नेशनल हाईवे-44 के पास केएमपी का निर्माण पत्थर वर्ष 2003 में हरियाणा के तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला ने लगाया था, लेकिन इसका काम 2006 में शुरू किया गया था। बाद में फिर से रोक दिया गया। वर्ष 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने केजीपी के साथ इसका शिलान्यास किया था और इसका काम दोबारा शुरू हो सका था। पलवल से मानेसर तक यह वर्ष 2016 में शुरू हो गया था, लेकिन मानेसर से कुंडली तक 19 नवंबर 2018 को शुरू किया गया था। यह एक्सप्रेस वे सोनीपत में कुंडली से शुरू होकर दिल्ली के चक्कर लगाते हुए खरखौदा, बहादुरगढ़, मानेसर, सोहना से होते हुए पलवल में खत्म होता है। वहां से पलवल-गाजियाबाद होते हुए कुंडली तक इसका पूरा चक्कर बनाया गया। इस पर करीब तीन हजार करोड़ से अधिक खर्च किए गए। इसके बाद नेशनल हाईवे का चौड़ीकरण कर इस पर फ्लाईओवर का निर्माण किया गया। उस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद तीनों हाईवे के जीरो प्वाइंट पर अब भी अंधेरा पसरा है। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की गति सीमा 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा होने के चलते यहां वाहन तेज रफ्तार में दौड़ते है, लेकिन अंधेरा रहने से उन्हें हादसा होने का डर सताता रहता है।
टोल देने के बाद भी नहीं आधुनिक सुविधा
केएमपी-केजीपी व नेशनल हाईवे पर यात्रा करने के लिए लोगों को भारी भरकम टोल देना पड़ता है। उसके बावजूद जीरो प्वाइंट पर अंधेरे में सफर करना पड़ रहा है। केएमपी-केजीपी पर किलोमीटर के अनुसार टोल वसूला जाता है। वाहन चालक जितने किलोमीटर यात्रा करता है उतना ही टोल देना पड़ता है। ऐसे में टोल देने के बाद भी लोग इस मार्ग पर डरते हुए यात्रा करने को मजबूर हैं।
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दोनों विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर झाड़ रहे पल्ला
केएमपी-केजीपी व नेशनल हाईवे के जीरो प्वाइंट पर स्ट्रीट लाइट लगाने को दोनों विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ लेते हैं। जहां एचएसआईआईडीसी के एक्सईएन सुरेंद्र सिंह का कहना है कि नेशनल हाईवे पर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम एनएचएआई का है। वहीं एनएचएआई के प्रोजेक्ट इंजीनियर प्रांजल मिश्रा कहते है कि गोल चक्कर का निर्माण एचएसआईआईडीसी ने कराया है। ऐसे में स्ट्रीट लाइट उन्हें लगवानी चाहिए। हालांकि साथ ही उन्होंने कहा कि अगर हमारे प्रोजेक्ट में लाइट लगाने का काम शामिल होगा तो उसे जल्द लगवाया जाएगा।
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नेशनल हाईवे-44 के पास केएमपी का निर्माण पत्थर वर्ष 2003 में हरियाणा के तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला ने लगाया था, लेकिन इसका काम 2006 में शुरू किया गया था। बाद में फिर से रोक दिया गया। वर्ष 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने केजीपी के साथ इसका शिलान्यास किया था और इसका काम दोबारा शुरू हो सका था। पलवल से मानेसर तक यह वर्ष 2016 में शुरू हो गया था, लेकिन मानेसर से कुंडली तक 19 नवंबर 2018 को शुरू किया गया था। यह एक्सप्रेस वे सोनीपत में कुंडली से शुरू होकर दिल्ली के चक्कर लगाते हुए खरखौदा, बहादुरगढ़, मानेसर, सोहना से होते हुए पलवल में खत्म होता है। वहां से पलवल-गाजियाबाद होते हुए कुंडली तक इसका पूरा चक्कर बनाया गया। इस पर करीब तीन हजार करोड़ से अधिक खर्च किए गए। इसके बाद नेशनल हाईवे का चौड़ीकरण कर इस पर फ्लाईओवर का निर्माण किया गया। उस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद तीनों हाईवे के जीरो प्वाइंट पर अब भी अंधेरा पसरा है। एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की गति सीमा 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा होने के चलते यहां वाहन तेज रफ्तार में दौड़ते है, लेकिन अंधेरा रहने से उन्हें हादसा होने का डर सताता रहता है।
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टोल देने के बाद भी नहीं आधुनिक सुविधा
केएमपी-केजीपी व नेशनल हाईवे पर यात्रा करने के लिए लोगों को भारी भरकम टोल देना पड़ता है। उसके बावजूद जीरो प्वाइंट पर अंधेरे में सफर करना पड़ रहा है। केएमपी-केजीपी पर किलोमीटर के अनुसार टोल वसूला जाता है। वाहन चालक जितने किलोमीटर यात्रा करता है उतना ही टोल देना पड़ता है। ऐसे में टोल देने के बाद भी लोग इस मार्ग पर डरते हुए यात्रा करने को मजबूर हैं।
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दोनों विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर झाड़ रहे पल्ला
केएमपी-केजीपी व नेशनल हाईवे के जीरो प्वाइंट पर स्ट्रीट लाइट लगाने को दोनों विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ लेते हैं। जहां एचएसआईआईडीसी के एक्सईएन सुरेंद्र सिंह का कहना है कि नेशनल हाईवे पर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम एनएचएआई का है। वहीं एनएचएआई के प्रोजेक्ट इंजीनियर प्रांजल मिश्रा कहते है कि गोल चक्कर का निर्माण एचएसआईआईडीसी ने कराया है। ऐसे में स्ट्रीट लाइट उन्हें लगवानी चाहिए। हालांकि साथ ही उन्होंने कहा कि अगर हमारे प्रोजेक्ट में लाइट लगाने का काम शामिल होगा तो उसे जल्द लगवाया जाएगा।