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मुरथल विवि ने मानी गलती, 35 कर्मियों की सेवा न बढ़ाने का नोटिस लिया वापस

Sat, 17 Jul 2021 01:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jul 2021 01:42 AM IST
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Murthal University admits mistake, took back notice of not increasing the service of 35 personnel
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल में रजिस्ट्रार के जारी किए गए नोटिस से हड़कंप मच गया, जिसमें हारट्रोन से स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट इन कंप्यूटर एप्रिसिएशन पास नहीं करने पर 35 लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा आगे नहीं बढ़ाते हुए समाप्त करने की चेतावनी जारी कर दी गई। इस तरह रजिस्ट्रार के एक नोटिस से अचानक 35 लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी पर संकट आया तो यह मामला वीसी के पास तक पहुंचा। जिसके बाद सरकार के उन आदेशों को निकलवाया गया, जिनमें टेस्ट पास करने का नियम लागू किए जाने की बात कही गई थी। इससे खुलासा हुआ कि अस्थायी कर्मियों के लिए सरकार का यह नियम लागू नहीं है, बल्कि केवल स्थायी कर्मियों के प्रमोशन व इंक्रीमेंट के लिए टेस्ट पास करने का नियम है। इस तरह से यूनिवर्सिटी प्रशासन पूरी तरह से बैकफुट पर आया और वीसी के हस्तक्षेप के बाद नोटिस को वापस लेना पड़ा।
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स्थायी लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए यह है नियम
सरकार ने वर्ष 2018 में आदेश जारी किया था कि सरकारी कार्यालयों में स्थायी लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटरों को एसईटीसी (स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट इन कंप्यूटर एप्रिसिएशन) पास करना होगा। अगर इस टेस्ट को वह पास नहीं करते है तो उनको इंक्रीमेंट नहीं मिल सकेगा और उनका प्रमोशन भी नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही यह साफ कर दिया गया था कि अगर कोई इस टेस्ट को पास नहीं कर पाता है तो उसे नौकरी से नहीं हटाया जाएगा। इस तरह टेस्ट पास नहीं करने की स्थिति में किसी की नौकरी नहीं जा सकती है।
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रजिस्ट्रार ने टेस्ट पास नहीं करने पर सेवा समाप्त का नोटिस थमाया
मुरथल यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार के कार्यालय से 14 जुलाई को एक नोटिस जारी किया गया। उस नोटिस में उन 35 लिपिक व कंप्यूटर ऑपरेटर के नाम थे, जो डीसी रेट या एजेंसी के सहारे अस्थायी तौर पर कार्य कर रहे हैं। उनको नोटिस भेजा गया कि अगर उन्होंने हारट्रोन से स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट इन कंप्यूटर एप्रिसिएशन पास नहीं किया हुआ है तो उनकी सेवा नहीं बढ़ाई जाएगी। इस तरह से उनकी नौकरी समाप्त हो जाएगी। इस तरह से अचानक नौकरी जाने का खतरा होने पर कर्मियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद मामला वीसी प्रो. राजेंद्र अनायत के पास तक पहुंचा। इस संबंध में सरकार का आदेश निकलवाया गया। इसमें साफ लिखा था कि यह केवल स्थायी कर्मियों के लिए नियम है और उसमें भी किसी की सेवाएं समाप्त नहीं हो सकती है। जिसके बाद अपनी गलती मानते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन को वह नोटिस वापस करने पड़े।
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जब यह मामला मेरे संज्ञान में आया तो मैंने उस आदेश को वापस कराने के लिए कहा था, जिसके बाद वह आदेश वापस कर लिया गया। इस बारे में ज्यादा रजिस्ट्रार बता सकते हैं। मैं इस समय बीपीएस यूनिवर्सिटी आया हुआ हूं, लेकिन यह जरूर है कि आदेश वापस हो गए हैं।

- प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत, वीसी मुरथल यूनिवर्सिटी
वर्जन
यह कार्यालय में किसी की गलती से हुआ था, जिस पर बाद में ध्यान दिया गया। जब उसकी पूरी जानकारी मिली तो उस आदेश को तुरंत वापस कर लिया गया था। वह सभी के पास पहुंचा भी नहीं था। इस बारे में बातचीत की गई है कि आगे से इस तरह से नहीं हो सके, लेकिन इसमें किसी की नौकरी को लेकर कुछ नहीं है।
- प्रो. सुरेश कुमार, रजिस्ट्रार मुरथल यूनिवर्सिटी
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