{"_id":"69f21d954f2c5af17d0fa846","slug":"municipal-corporation-elections-ai-dominates-campaigning-changing-the-electoral-mood-sonipat-news-c-197-1-snp1015-153216-2026-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम चुनाव : प्रचार में एआई का दबदबा, बदल रहा चुनावी मिजाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम चुनाव : प्रचार में एआई का दबदबा, बदल रहा चुनावी मिजाज
Thu, 30 Apr 2026 03:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 30 Apr 2026 03:32 AM IST
विज्ञापन
सोनीपत। नगर निगम चुनाव में इस बार प्रचार का स्वरूप पूरी तरह बदला नजर आ रहा है। पारंपरिक बैनर, पोस्टर और स्थानीय कलाकारों की जगह अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने तेजी से अपनी पकड़ बना ली है। मेयर पद के 9 उम्मीदवारों और 22 वार्डों में 89 पार्षद प्रत्याशियों के बीच मुकाबला जहां रोचक है वहीं प्रचार का तरीका भी अत्याधुनिक हो गया है।
पहले जहां चुनावी पोस्टर तैयार कराने और गीत रिकॉर्ड करवाने में कई दिन लग जाते थे अब एआई आधारित साधनों से यह कार्य कुछ ही मिनटों में संभव हो रहा है। प्रत्याशी अपनी तस्वीर अपलोड कर आकर्षक पोस्टर, वीडियो और चुनावी गीत तुरंत तैयार कर रहे हैं।
कई उम्मीदवारों ने अपने नाम और चुनाव चिह्न के साथ विशेष थीम गीत भी बनवाए हैं जो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं।
सोशल मीडिया बना मुख्य रणक्षेत्र
इस बार चुनावी प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम सोशल मीडिया बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर एआई से निर्मित तस्वीरें और वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। इनमें से कई वीडियो इतने वास्तविक प्रतीत होते हैं कि आमजन के लिए असली और कृत्रिम में अंतर कर पाना कठिन हो जाता है। इससे प्रत्याशियों को कम लागत में अधिक लोगों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।
विज्ञापन
स्थानीय कलाकारों पर पड़ा प्रभाव
एआई के बढ़ते उपयोग का असर स्थानीय कलाकारों और डिजाइनरों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। चुनावी मौसम में जहां पहले पोस्टर डिजाइनर, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और स्थानीय गायकों की मांग बढ़ जाती थी वहीं अब उनका काम सीमित होता जा रहा है। कलाकारों का कहना है कि एआई के कारण उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रत्याशी कम खर्च और कम समय में अधिक सामग्री तैयार कर पा रहे हैं।
युवा प्रत्याशी आगे, तकनीक का बेहतर उपयोग
एआई आधारित प्रचार में युवा प्रत्याशी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। तकनीक की बेहतर समझ के चलते वे नए-नए प्रयोग कर अपने प्रचार अभियान को अधिक आकर्षक बना रहे हैं। वहीं पारंपरिक तरीकों पर निर्भर प्रत्याशी भी अब इस बदलते रुझान को अपनाने लगे हैं।
भ्रामक सामग्री का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एआई चुनावी प्रचार का स्थायी हिस्सा बन सकता है। हालांकि इसके साथ भ्रामक और फर्जी सामग्री के प्रसार का खतरा भी बढ़ रहा है जिस पर निगरानी रखना आवश्यक होगा।
विज्ञापन
पहले जहां चुनावी पोस्टर तैयार कराने और गीत रिकॉर्ड करवाने में कई दिन लग जाते थे अब एआई आधारित साधनों से यह कार्य कुछ ही मिनटों में संभव हो रहा है। प्रत्याशी अपनी तस्वीर अपलोड कर आकर्षक पोस्टर, वीडियो और चुनावी गीत तुरंत तैयार कर रहे हैं।
विज्ञापन
कई उम्मीदवारों ने अपने नाम और चुनाव चिह्न के साथ विशेष थीम गीत भी बनवाए हैं जो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं।
सोशल मीडिया बना मुख्य रणक्षेत्र
इस बार चुनावी प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम सोशल मीडिया बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर एआई से निर्मित तस्वीरें और वीडियो व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। इनमें से कई वीडियो इतने वास्तविक प्रतीत होते हैं कि आमजन के लिए असली और कृत्रिम में अंतर कर पाना कठिन हो जाता है। इससे प्रत्याशियों को कम लागत में अधिक लोगों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।
विज्ञापन
स्थानीय कलाकारों पर पड़ा प्रभाव
एआई के बढ़ते उपयोग का असर स्थानीय कलाकारों और डिजाइनरों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। चुनावी मौसम में जहां पहले पोस्टर डिजाइनर, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और स्थानीय गायकों की मांग बढ़ जाती थी वहीं अब उनका काम सीमित होता जा रहा है। कलाकारों का कहना है कि एआई के कारण उनके रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रत्याशी कम खर्च और कम समय में अधिक सामग्री तैयार कर पा रहे हैं।
युवा प्रत्याशी आगे, तकनीक का बेहतर उपयोग
एआई आधारित प्रचार में युवा प्रत्याशी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। तकनीक की बेहतर समझ के चलते वे नए-नए प्रयोग कर अपने प्रचार अभियान को अधिक आकर्षक बना रहे हैं। वहीं पारंपरिक तरीकों पर निर्भर प्रत्याशी भी अब इस बदलते रुझान को अपनाने लगे हैं।
भ्रामक सामग्री का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में एआई चुनावी प्रचार का स्थायी हिस्सा बन सकता है। हालांकि इसके साथ भ्रामक और फर्जी सामग्री के प्रसार का खतरा भी बढ़ रहा है जिस पर निगरानी रखना आवश्यक होगा।