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मां उर्मिला बोलीं - सोना लेकर आएगा बेटा रवि, पसंदीदा खीर-चूरमा खिलाकर करूंगी स्वागत
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ओलंपिक में पहलवान रवि दहिया की जीत पर दीये जलाततीं दादी सावित्री। फोटो : रमेश दहिया
- फोटो : Sonipat
रवींद्र कौशिक
सोनीपत। ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए पदक पक्का कर चुके रवि दहिया की मां उर्मिला बेटे की उपलब्धि पर फूली नहीं समा रहीं। मां ने कहा कि बेटा सोना लेकर घर आएगा। उसके घर आने पर उसका पसंदीदा खीर-चूरमा खिलाकर स्वागत करूंगी। वहीं उनकी मौसी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज तो छोटी दिवाली मनाई है, कल बड़ी मनाएंगे। जमकर आतिशबाजी करेंगे। लाडले ने देश का नाम रोशन कर बहुत बड़ी खुशी दी है।
गांव नाहरी में रवि की जीत के जश्न के बीच उनकी मां उर्मिला ने कहा कि जब उनका बेटा सोना जीतकर आएगा तो उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। उसका पसंदीदा खीर-चूरमा अपने हाथों से खिलाकर उसका स्वागत करूंगी। उन्होंने कहा कि जब वह सेमीफाइनल में खेल रहा था तो एक बार लगा कि वह हार जाएगा और हमारी आंखों से आंसू निकल गए थे, लेकिन उसने आखिर तक हार नहीं मानी और देश के लिए पदक पक्का कर दिया। (संवाद)
मौसी ने कहा, कल मनाएंगे बड़ी दिवाली
रवि की मौसी रिंकी ने कहा कि लाडले ने उन्हें बहुत बड़ी खुशी दी है। आज उसके सेमीफाइनल में जीत के बाद छोटी दिवाली मनाई और कल जब वह देश के लिए सोना जीतेगा तो जमकर आतिशबाजी कर बड़ी दिवाली मनाएंगे। रवि का गांव में पहुंचने पर ऐसा स्वागत होगा कि सभी देखते रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि रवि ने देश के लिए पदक जीतने के लिए तपस्या की है।
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दादी को कहा था, अभी मरना नहीं, गोल्ड लेकर आऊंगा
रवि की दादी सावित्री ने कहा कि जब रवि से बात हुई थी तो उसने कहा था कि दादी अभी मरना नहीं, वह गोल्ड लेकर आएगा और उसे जश्न में शामिल होना है। मैंने अपने पोते को बचपन से ही दूध और घी खिलाकर पहलवान बनाया है और उसी का नतीजा है कि आज वह देश का नाम रोशन कर रहा है। सावित्री ने कहा कि रवि ने 6 साल की उम्र से ही कुश्ती खेलना शुरू कर दिया था। रवि ने उनका सपना साकार कर दिया है।
दिवाली के बाद से घर नहीं आया रवि
ग्रामीण पदम सिंह दहिया ने कहा कि रवि के अंदर कुश्ती के प्रति जुनून है। वह दिवाली के बाद से घर भी नहीं लौटा है। ओलंपिक में जाने से पहले छत्रसाल स्टेडियम से ही रूस चल गया। वहां अभ्यास के बाद टोक्यो पहुंच गया। रवि परिजनों व आसपास के लोगों को कहकर गया था कि वह ओलंपिक का पदक लेकर ही गांव में आएगा। उसने अपने वादे को निभाया है। इतना ही नहीं रवि ने अपने परिजनों से करीब एक माह से बात तक नहीं की है। बेशक उसने बुधवार को मैच जीतकर देश के लिए पदक पक्का कर लिया, उसके बावजूद उसने फोन नहीं किया। वह देश के लिए सोना जीतकर ही परिवार के लोगों से बात करेगा।
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सोनीपत। ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए पदक पक्का कर चुके रवि दहिया की मां उर्मिला बेटे की उपलब्धि पर फूली नहीं समा रहीं। मां ने कहा कि बेटा सोना लेकर घर आएगा। उसके घर आने पर उसका पसंदीदा खीर-चूरमा खिलाकर स्वागत करूंगी। वहीं उनकी मौसी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज तो छोटी दिवाली मनाई है, कल बड़ी मनाएंगे। जमकर आतिशबाजी करेंगे। लाडले ने देश का नाम रोशन कर बहुत बड़ी खुशी दी है।
गांव नाहरी में रवि की जीत के जश्न के बीच उनकी मां उर्मिला ने कहा कि जब उनका बेटा सोना जीतकर आएगा तो उसका भव्य स्वागत किया जाएगा। उसका पसंदीदा खीर-चूरमा अपने हाथों से खिलाकर उसका स्वागत करूंगी। उन्होंने कहा कि जब वह सेमीफाइनल में खेल रहा था तो एक बार लगा कि वह हार जाएगा और हमारी आंखों से आंसू निकल गए थे, लेकिन उसने आखिर तक हार नहीं मानी और देश के लिए पदक पक्का कर दिया। (संवाद)
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मौसी ने कहा, कल मनाएंगे बड़ी दिवाली
रवि की मौसी रिंकी ने कहा कि लाडले ने उन्हें बहुत बड़ी खुशी दी है। आज उसके सेमीफाइनल में जीत के बाद छोटी दिवाली मनाई और कल जब वह देश के लिए सोना जीतेगा तो जमकर आतिशबाजी कर बड़ी दिवाली मनाएंगे। रवि का गांव में पहुंचने पर ऐसा स्वागत होगा कि सभी देखते रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि रवि ने देश के लिए पदक जीतने के लिए तपस्या की है।
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दादी को कहा था, अभी मरना नहीं, गोल्ड लेकर आऊंगा
रवि की दादी सावित्री ने कहा कि जब रवि से बात हुई थी तो उसने कहा था कि दादी अभी मरना नहीं, वह गोल्ड लेकर आएगा और उसे जश्न में शामिल होना है। मैंने अपने पोते को बचपन से ही दूध और घी खिलाकर पहलवान बनाया है और उसी का नतीजा है कि आज वह देश का नाम रोशन कर रहा है। सावित्री ने कहा कि रवि ने 6 साल की उम्र से ही कुश्ती खेलना शुरू कर दिया था। रवि ने उनका सपना साकार कर दिया है।
दिवाली के बाद से घर नहीं आया रवि
ग्रामीण पदम सिंह दहिया ने कहा कि रवि के अंदर कुश्ती के प्रति जुनून है। वह दिवाली के बाद से घर भी नहीं लौटा है। ओलंपिक में जाने से पहले छत्रसाल स्टेडियम से ही रूस चल गया। वहां अभ्यास के बाद टोक्यो पहुंच गया। रवि परिजनों व आसपास के लोगों को कहकर गया था कि वह ओलंपिक का पदक लेकर ही गांव में आएगा। उसने अपने वादे को निभाया है। इतना ही नहीं रवि ने अपने परिजनों से करीब एक माह से बात तक नहीं की है। बेशक उसने बुधवार को मैच जीतकर देश के लिए पदक पक्का कर लिया, उसके बावजूद उसने फोन नहीं किया। वह देश के लिए सोना जीतकर ही परिवार के लोगों से बात करेगा।

ओलंपिक में पहलवान रवि दहिया की जीत पर विजयी चिह्न बनातीं मां उर्मिला (बायीं से दूसरी), दादी सावित्?- फोटो : Sonipat