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Sonipat News: विधि विधान से की मां कूष्मांडा की पूजा, गूंजे मां के जयकारे
Thu, 19 Oct 2023 01:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 19 Oct 2023 01:36 AM IST
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चिटाने वाली माता मंदिर में माता की आरती करते भक्त। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने मंदिरों में जाकर विधि-विधान से पूजन किया और माता का आशीर्वाद लिया। मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही, अनेक भक्तों ने घरों में ही मां की पूजा की। शहर के देवी मंदिरों सहित माता के दरबार को फूलमाला और लाल चुनरी से सजाया गया।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शोनक ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। उन्होंने बताया कि भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। यह कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। स्कंदमाता की साधना से साधकों को आरोग्य, बुद्धिमता तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।
भक्तों ने किए मां के दर्शन नवरात्र को लेकर देवी मंदिरों में माता के दरबार को फूलमालाओं और रंगीन लाइट से सजाया गया है। बुधवार को मंदिरों में देवी के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। शाम को मंदिरों में भजन कीर्तन हुए। मां का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए। किसी ने मंदिर के अंदर तो किसी ने बाहर से ही माता के दर्शन व पूजन किया। मां के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे।
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बाजार में पूजन सामग्री खरीदने के लिए लगी रही भीड़
नवरात्र पर्व पर अनुष्ठान के लिए शहरवासियों ने बाजार में पूजन सामग्री व प्रसाद की खरीदारी की। पूजन सामग्री की दुकानों पर दिनभर लोगों की भीड़ लगी रही। महिलाएं मां के लिए सजावट का सामान और विशेष रूप से लाल चुनरी खरीदती नजर आईं।
ऐसे करें पूजन
पंडित अमित शोनक ने बताया कि पांचवें दिन की पूजा अर्चना के लिए भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। स्नान कराने के बाद पुष्प अर्पित करें। मां को रोली कुमकुम लगाते हुए मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं। मां स्कंदमाता का ध्यान करें और आरती करें। उन्होंने बताया कि मां स्कंदमाता की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है। मां की उपासना से अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है।
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सोनीपत। नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने मंदिरों में जाकर विधि-विधान से पूजन किया और माता का आशीर्वाद लिया। मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही, अनेक भक्तों ने घरों में ही मां की पूजा की। शहर के देवी मंदिरों सहित माता के दरबार को फूलमाला और लाल चुनरी से सजाया गया।
चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शोनक ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाएगी। उन्होंने बताया कि भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। यह कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। स्कंदमाता की साधना से साधकों को आरोग्य, बुद्धिमता तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।
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भक्तों ने किए मां के दर्शन नवरात्र को लेकर देवी मंदिरों में माता के दरबार को फूलमालाओं और रंगीन लाइट से सजाया गया है। बुधवार को मंदिरों में देवी के चौथे स्वरूप कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की गई। शाम को मंदिरों में भजन कीर्तन हुए। मां का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए। किसी ने मंदिर के अंदर तो किसी ने बाहर से ही माता के दर्शन व पूजन किया। मां के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे।
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बाजार में पूजन सामग्री खरीदने के लिए लगी रही भीड़
नवरात्र पर्व पर अनुष्ठान के लिए शहरवासियों ने बाजार में पूजन सामग्री व प्रसाद की खरीदारी की। पूजन सामग्री की दुकानों पर दिनभर लोगों की भीड़ लगी रही। महिलाएं मां के लिए सजावट का सामान और विशेष रूप से लाल चुनरी खरीदती नजर आईं।
ऐसे करें पूजन
पंडित अमित शोनक ने बताया कि पांचवें दिन की पूजा अर्चना के लिए भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। स्नान कराने के बाद पुष्प अर्पित करें। मां को रोली कुमकुम लगाते हुए मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं। मां स्कंदमाता का ध्यान करें और आरती करें। उन्होंने बताया कि मां स्कंदमाता की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है। मां की उपासना से अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है।