{"_id":"69a1bbbfb01d5d9ca90b6fd8","slug":"mind-is-the-basis-for-attaining-liberation-acharya-ankit-sonipat-news-c-197-1-snp1003-150228-2026-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुक्ति को पाने का आधार होता है मन : आचार्य अंकित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुक्ति को पाने का आधार होता है मन : आचार्य अंकित
Sat, 28 Feb 2026 03:13 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 28 Feb 2026 03:13 AM IST
विज्ञापन
फोटो : सोनीपत के सेक्टर-14 कम्युनिटी सेंटर में वृहद यज्ञ के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। स्रोत: स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनीपत। हमारा मन आलसी व प्रमादी नहीं अपितु पूर्ण रूप से सजग रहना चाहिए। मुक्ति को पाने का आधार मन ही है। अतः आत्मा को इसे उत्तम विचार देकर सफल बनाना चाहिए इसलिए दोनों संध्या समय में प्रतिदिन स्वयं के किए कार्यों का निरीक्षण करना चाहिए। यह बात आचार्य अंकित प्रभाकर ने कही।
वे सेक्टर-14 कम्युनिटी सेंटर में वैदिक यज्ञ समिति की ओर से वृहद यज्ञ में वेद मंत्रों की व्याख्या कर रहे थे। समिति के 47वें वार्षिकोत्सव के पांचवें दिन आचार्य वेदपाल ने अथर्ववेद के मंत्रों पर आधारित भूमि के विषय में अथर्व शब्द का अर्थ कंपन रहित बताया।
बताया कि भूमि के तीन प्रकार के स्थान जो खेती करने योग्य हैं भूमि के ऊपरी सतह पर खेती की जाती है। पहाड़ों की जड़ों के सूखने से पहाड़ों का स्खलन हो जाता है। अन्य प्रसंग में बताया सूर्य की रश्मियां क्रिमियों को नष्ट कर देती हैं और वह रश्मियां शुद्ध जल वर्षा के रूप में पुन: नीचे गिरकर भूमि को सिंचित करती हुई आयु को प्रदान करती हैं।
विज्ञापन
आचार्य प्रदीप शास्त्री ने प्रभु को प्यार से एक बार पुकारो तो सही भजन गाया। मंच संचालन आचार्य दीक्षा आर्य ने किया। इस दौरान निवर्तमान पार्षद सुरेंद्र मदान, दिनेश आर्य, सुरेश बत्रा, प्रभा बत्रा, श्रेष्ठ, संतोष खुराना भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
वे सेक्टर-14 कम्युनिटी सेंटर में वैदिक यज्ञ समिति की ओर से वृहद यज्ञ में वेद मंत्रों की व्याख्या कर रहे थे। समिति के 47वें वार्षिकोत्सव के पांचवें दिन आचार्य वेदपाल ने अथर्ववेद के मंत्रों पर आधारित भूमि के विषय में अथर्व शब्द का अर्थ कंपन रहित बताया।
विज्ञापन
बताया कि भूमि के तीन प्रकार के स्थान जो खेती करने योग्य हैं भूमि के ऊपरी सतह पर खेती की जाती है। पहाड़ों की जड़ों के सूखने से पहाड़ों का स्खलन हो जाता है। अन्य प्रसंग में बताया सूर्य की रश्मियां क्रिमियों को नष्ट कर देती हैं और वह रश्मियां शुद्ध जल वर्षा के रूप में पुन: नीचे गिरकर भूमि को सिंचित करती हुई आयु को प्रदान करती हैं।
विज्ञापन
आचार्य प्रदीप शास्त्री ने प्रभु को प्यार से एक बार पुकारो तो सही भजन गाया। मंच संचालन आचार्य दीक्षा आर्य ने किया। इस दौरान निवर्तमान पार्षद सुरेंद्र मदान, दिनेश आर्य, सुरेश बत्रा, प्रभा बत्रा, श्रेष्ठ, संतोष खुराना भी मौजूद रहे।