कुंडली। लॉकडाउन में भूखे-प्यासे अपने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों पर यूपी पुलिस का कहर टूट रहा है। पहले ही सैकड़ों किमी चलकर आने वाले प्रवासी मजदूर जब केजीपी पर यूपी बॉर्डर पर पहुंचते हैं तो यूपी पुलिस उनको समझाकर वापस भेजने की जगह लाठियां भांजने में लगी हुई है। यूपी पुलिस ने रविवार दोपहर को बॉर्डर पर पहुंचे मध्य प्रदेश के 22 मजदूरों पर जमकर लाठियां भांजीं। यूपी पुलिस ने दिव्यांग मजदूरों तक को नहीं छोड़ा और पुलिस की पिटाई से मजदूर का हाथ भी टूट गया। इससे मजदूरों का दर्द आंसू बनकर छलकने लगा और मजदूरों ने कहा कि उनको पहले ही कुदरत की मार झेलनी पड़ रही, अब पुलिस उनको पीट रही है।
लॉकडाउन के बाद से अपने घर जाने के लिए हिमाचल, पंजाब समेत हरियाणा के अलग-अलग जिलों से मजदूर केजीपी से होते हुए यूपी, मध्य प्रदेश व बिहार जाने के लिए निकले हुए हैं। वह किसी तरह से केजीपी पर यूपी बॉर्डर तक पहुंच जाते हैं, लेकिन बॉर्डर पर यूपी पुलिस उनको समझाने की जगह लाठियां भांजनी शुरू कर देती हैं। इस तरह ही केजीपी से होते हुए रविवार दोपहर को मध्य प्रदेश के दमोई के रहने वाले लगभग 22 मजदूर यूपी बॉर्डर की ओर जा रहे थे। वह यूपी बॉर्डर पर पहुंचे तो वह केजीपी के किनारे बैठकर आराम करने लगे। उनमें कुछ बुजुर्ग व दिव्यांग मजदूर भी शामिल थे तो उनमें एक मजदूर की आंख भी खराब थी। उसी समय वहां यूपी पुलिस के कई जवान पहुंचे और उन बैठे हुए मजदूरों पर लाठियां भांजनी शुरू कर दी। उन मजदूरों से बात तक नहीं की गई और उनको लाठियों से पीटा गया। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई और बुजुर्ग मजदूरों को सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ी। एक दिव्यांग मजदूर कुमान का हाथ भी पुलिस की लाठी लगने से टूट गया और वह रोते हुए अपना दुखड़ा सुनाने लगा। कुमान ने बताया कि वह पिछले कई दिन से भूखा है और बस किसी तरह अपने घर जाना चाहता है। लेकिन आराम करने के लिए यहां बैठ गए थे और पुलिस ने उनको लाठियों से पीटना शुरू कर दिया।