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पैदल यूपी जा रहे मजदूरों को पुलिस ने रोका तो किया हंगामा
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केजीपी टोल के पास एकत्रित हुए मजदूर।
- फोटो : Sonipat
राई। लॉकडाउन के चलते फंसे प्रवासी श्रमिकों का सब्र अब टूटने लगा है। वीरवार को केजीपी के रास्ते अपने घर जाने के लिए पैदल ही निकले सैकड़ों मजदूरों को पुलिस ने रोका तो वह बिफर गए और हंगामा कर दिया। मजदूरों ने केजीपी पर जाम लगाने की कोशिश की और नारेबाजी शुरू कर दी। ऐसे में स्थिति को देखकर पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी और मजदूरों को वहां से वापस भेज दिया।
केजीपी पर एकत्रित हुए मजदूरों का कहना था कि सरकार बार-बार उन्हें भरोसा दे रही है कि घर भेजने की व्यवस्था कर रहे हैं। लेकिन एक महीने से अधिक का समय होने के बाद भी उन्हें घर नहीं भेजा जा रहा है। ऐसे में उन्हें मजबूर होकर पैदल ही चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। वीरवार को सुबह सैकड़ों मजदूर बिना किसी सोशल डिस्टेंस के झुंड बनाकर उत्तरप्रदेश अपने गांव जाने के लिए केजीपी के रास्ते से निकल पड़े। जब यह मजदूर केजीपी के टोल के पास पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें रोक दिया और वापस अपने मकान पर जाने को कहा। लेकिन मजदूर अपने प्रदेश जाने की जिद करने लगे। उनका कहना था कि वह राई, सोनीपत, कुंडली, मुरथल से पैदल चलते हुए यमुना बार्डर पार करके यूपी अपने घरों में जाना चाहते हैं। सभी निजी कंपनी में काम करते थे। अब कई दिनों से खाना भी सही तरीके से नहीं मिल रहा था। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वह सड़क से न आकर गांव-गांव के रास्ते पहुंचे हैं। कहीं पर भी किसी ने सुध तक नहीं ली। कई मजदूर तो दो दिन से भूखे प्यासे पैदल चलकर यमुना के पास पहुंचे हैं।
यह कहना है मजदूरों का
मजदूर शंकर, राजाराम, विनोद यादव ने बताया कि वह राई, कुंडली और मुरथल फैक्ट्रियों में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते काम बंद है। डेढ़ महीने से किराये के मकानों में रह रहे थे। काम नहीं मिलने पर पैसे भी खत्म हो गए। इन्हें फैक्ट्रियों से भी खाने-पीने का सामान देना बंद हो जाने पर अब वे अपने घर यूपी जाना चाहते है। रास्ते में दुकानों से मांग कर बिस्कुट आदि खिला कर पानी पिलाकर उनकी भूख-प्यास बुझा रहे हैं।
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केजीपी पर एकत्रित हुए मजदूरों का कहना था कि सरकार बार-बार उन्हें भरोसा दे रही है कि घर भेजने की व्यवस्था कर रहे हैं। लेकिन एक महीने से अधिक का समय होने के बाद भी उन्हें घर नहीं भेजा जा रहा है। ऐसे में उन्हें मजबूर होकर पैदल ही चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। वीरवार को सुबह सैकड़ों मजदूर बिना किसी सोशल डिस्टेंस के झुंड बनाकर उत्तरप्रदेश अपने गांव जाने के लिए केजीपी के रास्ते से निकल पड़े। जब यह मजदूर केजीपी के टोल के पास पहुंचे तो पुलिस ने इन्हें रोक दिया और वापस अपने मकान पर जाने को कहा। लेकिन मजदूर अपने प्रदेश जाने की जिद करने लगे। उनका कहना था कि वह राई, सोनीपत, कुंडली, मुरथल से पैदल चलते हुए यमुना बार्डर पार करके यूपी अपने घरों में जाना चाहते हैं। सभी निजी कंपनी में काम करते थे। अब कई दिनों से खाना भी सही तरीके से नहीं मिल रहा था। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वह सड़क से न आकर गांव-गांव के रास्ते पहुंचे हैं। कहीं पर भी किसी ने सुध तक नहीं ली। कई मजदूर तो दो दिन से भूखे प्यासे पैदल चलकर यमुना के पास पहुंचे हैं।
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यह कहना है मजदूरों का
मजदूर शंकर, राजाराम, विनोद यादव ने बताया कि वह राई, कुंडली और मुरथल फैक्ट्रियों में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते काम बंद है। डेढ़ महीने से किराये के मकानों में रह रहे थे। काम नहीं मिलने पर पैसे भी खत्म हो गए। इन्हें फैक्ट्रियों से भी खाने-पीने का सामान देना बंद हो जाने पर अब वे अपने घर यूपी जाना चाहते है। रास्ते में दुकानों से मांग कर बिस्कुट आदि खिला कर पानी पिलाकर उनकी भूख-प्यास बुझा रहे हैं।
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