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Sonipat News: एक हजार रुपये के लिए दो सहकर्मियों की हत्या के दोषी को उम्रकैद
Wed, 07 May 2025 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 07 May 2025 01:28 AM IST
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सोनीपत। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. नरिंद्र कौर ने दो सहकर्मियों की हत्या करने के दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर एक हजार रुपये के लिए अपने दो सहकर्मियों की हत्या व तीसरे साथी को घायल करने का आरोप था।
उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ के लेंटर वाली मस्जिद कॉलोनी, अलहदापुर निवासी इस्लाम ने 7 सितंबर, 2019 को कुंडली थाना पुलिस को बताया था कि उनके बेटे अमरूद्दीन उर्फ धर्मेंद्र गांव नाहरी के पास स्थित कृष्णा ईंट भट्ठे पर काम करते थे। अमरूद्दीन कुछ दिन पहले अपने घर से कुंडली आते हुए तीन अन्य मजदूरों सलीम, सलीम के साले इसराफिक व अपने पड़ोसी साजिद को लेकर आए थे। 6 सितंबर, 2019 की रात को चारों खाना खाने के बाद ईंट के ढेर पर सो गए थे। 7 सितंबर, 2019 को सुबह अमरूद्दीन व सलीम के शव मिले थे। पुलिस ने मामले में इस्लाम के बयान पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था।
पुलिस ने मामले में सलीम के साले झारखंड के जिला गुमला के कुश निवासी इसराफिक की तलाश की तो वह दिल्ली में मिला था। बाद में उनके चौथे साथी की अलीगढ़ के गांव नंदरोई व घटना के समय अलीगढ़ स्थित ससनी गेट लेंटर वाली मस्जिद कॉलोनी निवासी साजिद की तलाश की गई थी। कुंडली थाना पुलिस ने उसे अलीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया था। उसने ही वारदात को अंजाम देना कबूल किया था।
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आरोपी ने पुलिस को बताया था कि उन्हें वारदात की शाम को एडवांस के चार हजार रुपये मिले थे। वह उसमें से अपना हिस्सा मांगने लगा तो झगड़ा हो गया था। इसी रंजिश में उसने अमरूद्दीन, सलीम व इसराफिक पर ईंट व रॉड से हमला कर दिया था। उसने बताया था कि वह तीनों की हत्या मानकर झूठी कहानी बनाकर बचना चाहता था। हालांकि इसराफिक के जिंदा बचने के चलते वह कहानी नहीं बना सका और पकड़ा गया। उसने बताया था कि वह वारदात को अंजाम देकर पहले दिल्ली व बाद में अलीगढ़ भाग गया था। पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया था। अब मामले की सुनवाई के बाद एएसजे डॉ. नरिंद्र कौर ने साजिद को दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ के लेंटर वाली मस्जिद कॉलोनी, अलहदापुर निवासी इस्लाम ने 7 सितंबर, 2019 को कुंडली थाना पुलिस को बताया था कि उनके बेटे अमरूद्दीन उर्फ धर्मेंद्र गांव नाहरी के पास स्थित कृष्णा ईंट भट्ठे पर काम करते थे। अमरूद्दीन कुछ दिन पहले अपने घर से कुंडली आते हुए तीन अन्य मजदूरों सलीम, सलीम के साले इसराफिक व अपने पड़ोसी साजिद को लेकर आए थे। 6 सितंबर, 2019 की रात को चारों खाना खाने के बाद ईंट के ढेर पर सो गए थे। 7 सितंबर, 2019 को सुबह अमरूद्दीन व सलीम के शव मिले थे। पुलिस ने मामले में इस्लाम के बयान पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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पुलिस ने मामले में सलीम के साले झारखंड के जिला गुमला के कुश निवासी इसराफिक की तलाश की तो वह दिल्ली में मिला था। बाद में उनके चौथे साथी की अलीगढ़ के गांव नंदरोई व घटना के समय अलीगढ़ स्थित ससनी गेट लेंटर वाली मस्जिद कॉलोनी निवासी साजिद की तलाश की गई थी। कुंडली थाना पुलिस ने उसे अलीगढ़ से गिरफ्तार कर लिया था। उसने ही वारदात को अंजाम देना कबूल किया था।
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आरोपी ने पुलिस को बताया था कि उन्हें वारदात की शाम को एडवांस के चार हजार रुपये मिले थे। वह उसमें से अपना हिस्सा मांगने लगा तो झगड़ा हो गया था। इसी रंजिश में उसने अमरूद्दीन, सलीम व इसराफिक पर ईंट व रॉड से हमला कर दिया था। उसने बताया था कि वह तीनों की हत्या मानकर झूठी कहानी बनाकर बचना चाहता था। हालांकि इसराफिक के जिंदा बचने के चलते वह कहानी नहीं बना सका और पकड़ा गया। उसने बताया था कि वह वारदात को अंजाम देकर पहले दिल्ली व बाद में अलीगढ़ भाग गया था। पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर जेल भेज दिया था। अब मामले की सुनवाई के बाद एएसजे डॉ. नरिंद्र कौर ने साजिद को दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं देने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।