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एग्रो पेज के लिए :: व्यापार छोड़ शुरू की मशरूम की खेती, 70 लोगों को दे रहे रोजगार

Mon, 30 Jan 2023 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 30 Jan 2023 01:09 AM IST
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Leaving business started mushroom farming, giving employment to 70 people

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गन्नौर। प्रदेश में कई किसान परंपरागत खेती कर रहे है। खेती में बढ़ती लागत और कम उत्पादन को देखते हुए किसानों का मोह खेती से दूर होता जा रहा है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो परंपरागत खेती को छोड़ आधुनिक खेती अपनाकर न सिर्फ लाखों रुपये कमा रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। इन्हीं किसानों में एक है गन्नौर के गांव गढ़ी केसरी निवासी प्रदीप कौशिक, जिन्होंने अपना व्यापार छोड़ मशरूम की खेती अपनाई और आज लाखों रुपये कमा रहे हैं। यही नहीं लोगों को रोजगार देने के साथ ही दूसरे किसानों के लिए मिसाल बने हुए हैं।
किसान प्रदीप कौशिक ने बताया कि उनका पहले दिल्ली में स्पेयर पार्ट्स का व्यापार था। एक बार प्रो. डॉ. अजय यादव से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने मशरूम की खेती के बारे में बताया। जिसके बाद मशरूम की खेती करने का मन बना लिया। वर्ष 2013 में मशरूम की खेती करने के लिए व्यापार छोड़ दिया और डॉ. अजय यादव से तीन महीने तक प्रशिक्षण लिया। जिसके बाद दो झोपड़ियों से मशरूम उत्पादन की शुरुआत की, जिसमें हजारों रुपये की बचत हुई। उसके बाद लग्न और बढ़ गई। धीरे-धीरे उन्होंने मशरूम की खेती को बढ़ाना शुरू किया। दो झोपड़ियों से शुरू कर अब 40 झोपड़ी लगाकर मशरूम की खेती कर लाखों रुपये कमा रहे है। प्रदीप बताते हैं कि डॉ. अजय यादव से आज भी मशरूम उत्पादन की नई तकनीक सीखते रहते हैं।
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फार्म देखने विदेशों से आ रहे लोग, खाद की दूसरे राज्यों में भी डिमांड
किसान प्रदीप कौशिक बताते हैं कि उन्होंने मशरूम की खेती को लगातार बढ़ाने का प्रयास किया है। वर्तमान समय में करीब एक एकड़ भूमि पर मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। इसके साथ ही मशरूम की खाद भी तैयार करते हैं। उनकी खाद की डिमांड प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है। यही नहीं विदेशों से लोग उनका फार्म देखने के लिए आ रहे हैं। जिस कारण उनकी मशरूम की डिमांड बढ़ती जा रही है। उनकी मशरूम प्रदेश के साथ ही दूसरे राज्यों में भी भेजी जा रही है। वर्तमान में मशरूम तैयार होने से पहले ही ऑर्डर बुक हो जाते हैं।
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वर्ष 2015 में राष्ट्रीय पुरस्कार से किया गया था सम्मानित
किसान प्रदीप कौशिक ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के सोलन में प्रतिवर्ष मशरूम मेला लगाया जाता है। जिसमें उनकी मशरूम प्रथम श्रेणी में आ चुकी है। उच्च स्तर की मशरूम उत्पादन के लिए उन्हें साल 2015 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके साथ ही उन्हें अलग-अलग स्थानों पर अनेकों बार सम्मान मिला है। वर्ष 2014 में करनाल के घरौंडा में मशरूम मेला लगाया गया, जहां उनकी मशरूम प्रथम व द्वितीय श्रेणी में रही और पुरस्कार प्राप्त किया।

6 महीने की खेती में कमा रहे 20 से 22 लाख रुपये
किसान प्रदीप कौशिक ने बताया कि मशरूम की खेती सितंबर माह में शुरू होती है और मार्च तक चलती है। करीब 6 महीने की खेती होती है। जिसमें उनको 20 से 22 लाख रुपये तक की बचत होती है। यही नहीं मशरूम की खेती करते हुए 60 से 70 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। साथ ही अन्य किसानों को भी मशरूम की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
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