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Sonipat News: जलनिकासी नहीं होने से खेतों में सड़ने लगी फसल, किसानों में रोष
Fri, 19 Sep 2025 01:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 19 Sep 2025 01:55 AM IST
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फोटो 04: सोनीपत लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर धान की सड़ी फसल दिखाते किसान। संवाद
सोनीपत। बड़वासनी, बागडू व महलाना गांव में खेतों से जलनिकासी नहीं होने के कारण फसल सड़ने लगी है। करीब 200 एकड़ में फसल सड़ने से हुए नुकसान को लेकर किसानों में रोष है। किसानों ने वीरवार को लघु सचिवालय में पहुंचकर प्रशासन व सिंचाई विभाग के खिलाफ रोष जताया। उन्होंने एसडीएम सुभाष चंद्र से मिलकर खेतों से जलनिकासी कराने की मांग की।
एसडीएम ने सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता को फोन कर जल्द खेतों से पानी निकलवाने का निर्देश दिया। जिला पार्षद संजय बड़वासनी, हवा सिंह, सुनील, आजाद सिंह, बलजीत, वीरेंद्र, करतार ने बताया कि तीन गांव के खेतों में कई फुट पानी भरा हुआ है।
इस बार ज्वार, धान व सब्जियों की फसल नष्ट हो गई है। अगर समय रहते पानी नहीं निकला तो अगली फसल भी बर्बाद हो जाएगी। पानी रहने के कारण अगली फसल की बुवाई नहीं हो पाएगी। सिंचाई विभाग के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी पानी निकासी के लिए कोई भी प्रबंध किया गया है।
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विभाग के पास मात्र 25 पंप है जो चलते ही खराब हो जाते हैं। किसान खुद अपने पैसे लगाकर पानी निकासी कर रहे है। जिससे उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ईश्वर, सूरज, कुलदीप, प्रदीप, जोगिंद्र, महावीर ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द पानी निकासी का प्रबंध नहीं किया तो वह पशुओं, बच्चों के साथ लघु सचिवालय में डेरा डालने के लिए मजबूर हो जाएंगी। उनकी सरकार से मांग है कि सरकार किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजा दे और खेतों से पानी की निकासी जल्द कराए।
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एसडीएम ने सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता को फोन कर जल्द खेतों से पानी निकलवाने का निर्देश दिया। जिला पार्षद संजय बड़वासनी, हवा सिंह, सुनील, आजाद सिंह, बलजीत, वीरेंद्र, करतार ने बताया कि तीन गांव के खेतों में कई फुट पानी भरा हुआ है।
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इस बार ज्वार, धान व सब्जियों की फसल नष्ट हो गई है। अगर समय रहते पानी नहीं निकला तो अगली फसल भी बर्बाद हो जाएगी। पानी रहने के कारण अगली फसल की बुवाई नहीं हो पाएगी। सिंचाई विभाग के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी पानी निकासी के लिए कोई भी प्रबंध किया गया है।
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विभाग के पास मात्र 25 पंप है जो चलते ही खराब हो जाते हैं। किसान खुद अपने पैसे लगाकर पानी निकासी कर रहे है। जिससे उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ईश्वर, सूरज, कुलदीप, प्रदीप, जोगिंद्र, महावीर ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द पानी निकासी का प्रबंध नहीं किया तो वह पशुओं, बच्चों के साथ लघु सचिवालय में डेरा डालने के लिए मजबूर हो जाएंगी। उनकी सरकार से मांग है कि सरकार किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजा दे और खेतों से पानी की निकासी जल्द कराए।