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Sonipat News: छुट्टी पर थे...युद्ध का बुलावा आ गया, मोर्चा संभालने पहुंच गए लक्ष्मण

Fri, 11 Jul 2025 08:47 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jul 2025 08:47 PM IST
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It was a holiday ... a call for war was given, the front reached the front
फोटो : 10: पत्नी शकुंतला व दोनों बेटों के साथ शहीद लक्ष्मण सिंह। स्रोत पुत्र
शिवकुमार सिंह जादौन
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सोनीपत। महलाना गांव के बलिदानी हवलदार लक्ष्मण सिंह के साहस व त्याग की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। कारगिल युद्ध चल रहा था, वे छुट्टी पर थे। इसी दौरान सेना से बुलावा आया। आदेश आते ही बिना समय गंवाए वे मोर्चा संभालने के लिए रवाना हो गए। पत्नी से वादा किया कि पाकिस्तान से युद्ध जीतने के बाद वे लंबी छुट्टी लेकर आएंगे जिससे अपना घर बनवा सकें लेकिन नौवें दिन उनके शहीद होने की सूचना मिली।
शहीद लक्ष्मण सिंह बाल्यान के पुत्र जयवीर सिंह अपने पिता की शौर्यगाथा पूरे गर्व के साथ सुनाते हैं, पिता देश की खातिर जब शहीद हुए तब जयवीर की उम्र महज 11 साल थी, लेकिन पिता के साथ बिताया आखिरी पल उनके जेहन में आज भी ताजा है। वे बताते हैं कि पिता छुट्टी आए हुए थे ताकि पक्के मकान का निर्माण करवा सकें। छुट्टी खत्म नहीं हुई थीं।
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बीच में ही युद्ध का बुलावा आया। दुश्मनों को पराजित करने के संकल्प के साथ 1 जून 1999 को वे वर्दी पहनकर मोर्चा संभालने के लिए रवाना हो गए। पूरे गांव ने फूलों की माला पहनाकर उनको रवाना किया था, नौवें दिन मुश्कोह घाटी में दुश्मनों से लोहा लेते हुए वे शहीद हो गए। शहीद लक्ष्मण सिंह आठवीं जाट रेजिमेंट में हवलदार थे।
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जयवीर सिंह भावुक होते हुए कहते हैं कि युद्ध के लिए जाने से पहले पिता ने मां शकुंतला देवी से कहा था कि वे जरूर वापस आएंगे, लेकिन सूचना शहादत की मिली। शहीद लक्ष्मण सिंह की स्मृति में गांव का प्रवेश द्वार बना है। शहीद पार्क है, जिससे युवाओं को देश की सुरक्षा के लिए सेना में भर्ती होने की प्रेरणा मिलती है।

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39 साल की उम्र में हुए शहीद

हवलदार लक्ष्मण सिंह का जन्म 8 नवंबर 1960 को हरियाणा के सोनीपत जिले के महलाना गांव में रतन सिंह बाल्याण व शांति देवी के परिवार में हुआ था। 18 अप्रैल 1979 को वह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रारंभिक प्रशिक्षण के बाद उन्हें 8 जाट बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था। 09 जून 1999 को 39 साल की उम्र में वे शहीद हुए। उनकी पत्नी का निधन हो चुका है। बड़े बेटे पवन बाल्यान सोनीपत में रहकर व्यापार देखते हैं जबकि जयवीर सिंह डिफेंस में ऑडिट विभाग में हैं।

फोटो : 10: पत्नी शकुंतला व दोनों बेटों के साथ शहीद लक्ष्मण सिंह। स्रोत पुत्र

फोटो : 10: पत्नी शकुंतला व दोनों बेटों के साथ शहीद लक्ष्मण सिंह। स्रोत पुत्र

फोटो : 10: पत्नी शकुंतला व दोनों बेटों के साथ शहीद लक्ष्मण सिंह। स्रोत पुत्र

फोटो : 10: पत्नी शकुंतला व दोनों बेटों के साथ शहीद लक्ष्मण सिंह। स्रोत पुत्र

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