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पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने के आधार पर मिलेंगे इंटरनल अंक

Tue, 07 Dec 2021 12:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 07 Dec 2021 12:45 AM IST
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Internal marks will be given on the basis of planting and taking care of it
विश्वविद्यालय परिसर में वन स्टूडेंट, वन ट्री योजना के को-ओर्डिनेटर डॉ. नरेश कुमार पांडया व अन्य क? - फोटो : Sonipat
विष्णु कुमार
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सोनीपत। दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषित होती जा रही हवा व बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को देखते हुए दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल (डीसीआरयूएसटी) ने अनूठी पहल शुरू की है। जिसके तहत अब विद्यार्थियों को पौधरोपण करने व उसकी देखभाल करने के आधार पर इंटरनल अंक देने का निर्णय लिया है। वन स्टूडेंट, वन ट्री के नाम से शुरू की गई योजना शैक्षणिक सत्र 2021-22 से लागू होगी। पर्यावरण संरक्षण के लिए इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने वाला डीसीआरयूएसटी देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। फिलहाल यह योजना विवि से संबंधित सभी 18 महाविद्यालयों में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में लागू की गई है।
मुरथल विश्वविद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में शुरू की गई वन स्टूडेंट, वन ट्री योजना के तहत हर विद्यार्थी को सत्र की शुरुआत में पौधरोपण करना होगा। विद्यार्थी को चार साल के पाठ्यक्रम के दौरान उस पौधे की देखभाल करनी होगी। हर सेमेस्टर के अंत में कक्षा इंचार्ज पौधे का निरीक्षण करेंगे और उसकी ग्रोथ के आधार पर विद्यार्थियों को इंटरनल अंक दिए जाएंगे। चार साल में पौधा पेड़ बन जाएगा। विवि प्रबंधन का कहना है कि अब तक इंजीनियरिंग के सभी पाठ्यक्रमों मेें इंटरनल के 25 अंकों का निर्धारण दो विषयों एनवायरमेंट व इंडक्शन प्रोग्राम के आधार पर होता था। अब 25 अंकों में से दोनों विषयों की गतिविधियों के 15 व पौधे की देखभाल के 10 अंक निर्धारित किए हैं। इसके लिए प्रत्येक विद्यार्थी को एक रिपोर्ट कार्ड दिया गया है। इसमें हर सेमेस्टर के अंत में कक्षा इंचार्ज द्वारा पौधे की ग्रोथ का विवरण होगा।
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2013 से कर रहे थे प्रयास
डीसीआरयूएसटी, मुरथल में वन स्टूडेंट, वन ट्री योजना के को-ऑर्डिनेटर डॉ. नरेश कुमार पांडया ने बताया कि वर्ष 2013 से वह पर्यावरण को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए प्रयास कर रहे थे। इसके लिए हर संभव प्रयास किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र कुमार अनायत ने इस प्रयास मेें पूरा सहयोग किया। इस बारे में एआईसीटीई (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन) के चेयरमैन से संपर्क किया। इसके बाद इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य हर विद्यार्थी को पर्यावरण से जोड़ना और भविष्य में पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की समस्या को जड़ से खत्म करना है। कुलपति अनायत ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इस दौरान विद्यार्थियों को रिपोर्ट कार्ड दिए गए।
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रिपोर्ट कार्ड में ऐेसे देना होगा विवरण
वन स्टूडेंट व वन ट्री योजना का सोमवार को शुभारंभ किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को इस योजना से अवगत कराते हुए सभी को एक रिपोर्ट कार्ड दिया गया। जिसमें सेमेस्टर के अंत में विद्यार्थी को लगाए गए पौधे की ग्रोथ का निरीक्षण कक्षा इंचार्ज से करवाना होगा। निरीक्षण के बाद कक्षा इंचार्ज इसमें गुड, सेटिसफेक्टरी व अन सेटिसफेक्टरी में से एक अंकित करेगा, जिसके आधार पर ही अंकों का निर्धारण होगा। डॉ. पांडया ने कहा कि विद्यार्थी यह पौधा विवि परिसर, अपने घर या क्षेत्र में कहीं पर भी लगा सकता है। घर या घर के आसपास पौधा लगाने पर विद्यार्थी को अपने क्षेत्र के सरपंच या वार्ड पार्षद से सेमेस्टर के अंत में पौधे की ग्रोथ को रिपोर्ट कार्ड पर सत्यापित करवाना होगा। संवाद

वर्जन
पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्वविद्यालय में वन स्टूडेंट, वन ट्री योजना शुरू की गई है। इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम का हर विद्यार्थी एक पौधा लगाएगा और उसकी देखभाल करेगा। पौधे की ग्रोथ के आधार पर विद्यार्थी को इंटरनल अंक दिए जाएंगे। पर्यावरण को पाठ्यक्रम में शामिल करने वाला डीसीआरयूएसटी देश का पहला विश्वविद्यालय बन गया है। इससे जहां हर विद्यार्थी को पर्यावरण के साथ जोड़ा जा सकेगा, वहीं हर साल गहराती पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को भी जड़ से खत्म किया जा सकेगा।
- डॉ. नरेश कुमार पांडया, को-ऑर्डिनेटर, वन स्टूडेंट, वन ट्री, डीसीआरयूएसटी, मुरथल
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