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एक ही साल में प्रदीप 260वीं रैंक से पहले नंबर पर पहुंचे, हर चुनौती को स्वीकार कर आगे बढ़ते गए

Tue, 04 Aug 2020 09:06 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 09:06 PM IST
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In the same year, Pradeep reached number one before 260th rank, accepted every challenge and went ahead.
यूपीएससी टॉपर प्रदीप सिंह मलिक। - फोटो : Sonipat
सोनीपत। जब कोई लक्ष्य तय करके आगे बढ़ा जाता है तो कितनी भी चुनौतियां सामने आएं, उनको स्वीकार करते हुए निपटना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए। ऐसा ही कुछ यूपीएससी टॉपर प्रदीप सिंह के साथ रहा जो पहले आराम से इनकम टैक्स इंस्पेक्टर की नौकरी करना चाहते थे। इंस्पेक्टर की नौकरी के सहारे जिंदगी काटना चाहते थे तो पिता सुखबीर सिंह ने आईएएस की राह दिखाई। जब पिता की दिखाई राह से आईएएस बनने का लक्ष्य तय किया तो हर चुनौती को स्वीकार करके आगे बढ़ते रहे और एक ही साल में 260वीं रैंक से सीधे पहले नंबर पर पहुंच गए। इस तरह एक ही साल में सीधे 259 नंबर ऊपर छलांग लगाना यूपीएससी में एक बड़ी उपलब्धि है।
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स्कूल में पढ़ाई करते हुए ही अधिकतर विद्यार्थी अपना लक्ष्य तय कर लेते हैं और पढ़ाई में अच्छे विद्यार्थी अधिकतर सिविल सर्विस में जाना चाहते हैं। लेकिन यूपीएससी टॉपर प्रदीप सिंह ने पढ़ाई करते हुए ऐसा कोई लक्ष्य तय नहीं किया था। सोनीपत के शंभूदयाल मॉर्डन स्कूल से 10वीं व 12वीं करने वाले प्रदीप सिंह ने दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी मुरथल से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। उसके तुरंत बाद ही वर्ष 2015 इनकम टैक्स विभाग में इंस्पेक्टर बन गए और 32 रैंक होने के कारण दिल्ली में तैनाती हो गई। इस तरह प्रदीप सिंह को लगने लगा कि उनकी जिंदगी के सभी लक्ष्य तय हो गए हैं, क्योंकि परिवार में कोई सरकारी नौकरी वाला नहीं था। इसलिए इनकम टैक्स विभाग में इंस्पेक्टर बनकर आराम से जिंदगी बिताना चाहते थे। लेकिन पिता सुखबीर सिंह ने बेटे प्रदीप सिंह के लिए कुछ और सपना देखा था और वह बेटे को आईएएस बनाना चाहते थे। प्रदीप सिंह बताते हैं कि पिता ने प्रोत्साहित किया कि वह नौकरी करते हुए भी तैयारी करता रहे और उसे आईएएस बनना है। उसके बाद ही प्रदीप सिंह ने आईएएस बनने का लक्ष्य तय किया और नौकरी करते हुए पढ़ाई करने लगे। पहले साल प्री टेस्ट भी पास नहीं कर सके तो प्रदीप ने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे साल भी यूपीएससी की परीक्षा में बैठे। उस साल भी प्री टेस्ट पास नहीं कर सके, लेकिन आईएएस बनने का हौसला लेकर आगे बढ़ना नहीं छोड़ा। प्रदीप सिंह को तीसरी बार में कामयाबी की सीढ़ी मिली और वह उस सीढ़ी पर चढ़े जरूर, लेकिन वह 260वीं रैंक आने से आईएएस नहीं बन सके। प्रदीप को आईआरएस में जाना पड़ा तो फिर भी आईएएस बनने की राह नहीं छोड़ी। वर्ष 2019 में ट्रेनिंग के लिए ज्वाइन करके फिर आईएएस के लिए जुट गए और इस बार ऐसा कमाल किया कि 260वीं रैंक से सीधे पहले नंबर की छलांग लगा दी। इस तरह प्रदीप सिंह को आईएएस बनने का मुकाम टॉपर बनने के बाद मिला। हालांकि प्रदीप सिंह कहते हैं कि उनका लक्ष्य भले ही पूरा हो गया हो, लेकिन उनकी मेहनत अभी जारी रहेगी। क्योंकि अब उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है और उस जिम्मेदारी को बखूबी निभाना है।
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