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Sonipat News: 11 साल में सीएचसी से सामान्य अस्पताल तक का किया सफर, सुविधाएं अधूरी
Sun, 04 Jan 2026 12:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:31 AM IST
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फोटो :10: सोनीपत के खरखौदा स्थित सामान्य अस्पताल। संवाद
खरखौदा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के रूप में 11 वर्ष पहले नए भवन में शुरू हुआ खरखौदा का सरकारी अस्पताल आज उपमंडल स्तरीय सामान्य अस्पताल का दर्जा प्राप्त कर चुका है। सालभर पहले इसे फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) घोषित किया गया तो लोगों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद जगी मगर जमीनी हकीकत यह है कि सुविधाएं आज भी अधूरी हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एफआरयू का दर्जा मिलने के बाद भी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन अब तक स्थापित नहीं हो पाई है। इससे गर्भववर्ती, दुर्घटना में घयाल और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जांच के लिए सोनीपत नागरिक अस्पताल या निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों के लिए यह प्रक्रिया न केवल परेशान करने वाली है बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ा रही है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च संस्थानों में रेफर कर दिया जाता है।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, आधुनिक जांच सुविधाओं का अभाव और सीमित संसाधनों के चलते यहां गंभीर रोगों का प्रभावी उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में मरीजों को रोहतक, सोनीपत या निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
स्थानीय नागरिक महेश, राजेश, मनोज का कहना है कि जब अस्पताल का दर्जा बढ़ाया गया तो उनके अनुरूप सुविधाओं और मानव संसाधनों में भी विस्तार होना चाहिए था। वास्तविकता यह है कि अस्पताल अब भी सीमित संसाधनों के सहारे चल रहा है।
ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है जबकि उसी अनुपात में न तो डॉक्टर बढ़ रहे न हीं स्टाफ और न ही आवश्यक आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
सतीश और कुलीदीप ने कहा कि खरखौदा सामान्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा, पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और सशक्त आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं। ऐसे में क्षेत्र के हजारों लोगों को बाहर इलाज कराने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।अस्पताल का दर्जा कागजों में तो बढ़ा है लेकिन सुविधाओं के अभाव में यह आमजन की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है।
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सबसे बड़ी विडंबना यह है कि एफआरयू का दर्जा मिलने के बाद भी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन अब तक स्थापित नहीं हो पाई है। इससे गर्भववर्ती, दुर्घटना में घयाल और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जांच के लिए सोनीपत नागरिक अस्पताल या निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
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ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों के लिए यह प्रक्रिया न केवल परेशान करने वाली है बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ा रही है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च संस्थानों में रेफर कर दिया जाता है।
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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, आधुनिक जांच सुविधाओं का अभाव और सीमित संसाधनों के चलते यहां गंभीर रोगों का प्रभावी उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में मरीजों को रोहतक, सोनीपत या निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
स्थानीय नागरिक महेश, राजेश, मनोज का कहना है कि जब अस्पताल का दर्जा बढ़ाया गया तो उनके अनुरूप सुविधाओं और मानव संसाधनों में भी विस्तार होना चाहिए था। वास्तविकता यह है कि अस्पताल अब भी सीमित संसाधनों के सहारे चल रहा है।
ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है जबकि उसी अनुपात में न तो डॉक्टर बढ़ रहे न हीं स्टाफ और न ही आवश्यक आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
सतीश और कुलीदीप ने कहा कि खरखौदा सामान्य अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा, पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और सशक्त आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं। ऐसे में क्षेत्र के हजारों लोगों को बाहर इलाज कराने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।अस्पताल का दर्जा कागजों में तो बढ़ा है लेकिन सुविधाओं के अभाव में यह आमजन की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहा है।