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एक राष्ट्र, एक चुनाव कानून लागू होने से सरकारी कार्यों को मिलेगी अधिक गति : कुलपति
Mon, 08 Sep 2025 01:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 08 Sep 2025 01:56 AM IST
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फोटो 10- सोनीपत के राई स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सम्मे
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। राजीव गांधी एजुकेशन सिटी राई स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में एक राष्ट्र, एक चुनाव, संवैधानिक, संघीय एवं लोकतांत्रिक आयाम पर चल रहे राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन का नेतृत्व कुलपति प्रो. डॉ. देविंद्र सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव कानून लागू होने से सरकारी कार्यों को गति मिलेगी।
मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉलेज के डीन डॉ. बलराम पाणि, विशिष्ट अतिथि रामानुजन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रसाल सिंह रहे। कुलपति प्रो. डॉ. देविंद्र सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों व जिलों में विभिन्न चुनाव होने के कारण सरकारी कार्य बार-बार प्रभावित होते हैं।
इससे देश में विकास की रफ्तार थम जाती है जो विकसित राष्ट्र के सपने को साकार करने के रास्ते में बड़ी चुनौती है। एक देश एक चुनाव कानून लागू होने से सरकारी कार्यों को अधिक गति मिलेगी।
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मुख्य वक्ता डॉ. बलराम पाणि ने एक राष्ट्र, एक चुनाव की व्यवस्था से प्राप्त होने वाले राजनीतिक, सामाजिक लाभों व नैतिक मानदंडों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसके सही व गलत पहलुओं का उचित अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्यों के संघ को इस व्यवस्था के लिए एक वरदान बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रसाल सिंह ने कहा कि समय की मांग है कि वर्ष 2029 के संसदीय चुनावों में, लोकसभा व सभी राज्यों के चुनाव एक साथ हों। उन्होंने रामनाथ कोविंद समिति का जिक्र करते हुए कहा कि केरल कम्युनिस्ट पार्टी के कमजोर होने के बाद लोकसभा व राज्यों के चुनाव अलग-अलग होने लगे। शुरुआत में यहीं से एक राष्ट्र, एक चुनाव की व्यवस्था बाधित हुई। उन्होंने सरकार के मूल अर्थ, जनता के कल्याण के लिए काम करने पर जोर दिया।
कुलसचिव डॉ. आशुतोष मिश्रा ने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव पर सम्मेलन में विश्वविद्यालय को 11 राज्यों से उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिली है। इनमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दमन और दीव शामिल हैं।
कुछ केंद्रीय संगठन जैसे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय, ओपी जिंदल ने भी इस विषय का समर्थन किया। कार्यक्रम में विधि विश्वविद्यालय की ओर से एक राष्ट्र एक चुनाव पुस्तक का विमोचन किया गया। सम्मेलन में शिक्षक, गैर शिक्षक वर्ग व विद्यार्थी शामिल रहे।
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सोनीपत। राजीव गांधी एजुकेशन सिटी राई स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में एक राष्ट्र, एक चुनाव, संवैधानिक, संघीय एवं लोकतांत्रिक आयाम पर चल रहे राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन का नेतृत्व कुलपति प्रो. डॉ. देविंद्र सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव कानून लागू होने से सरकारी कार्यों को गति मिलेगी।
मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉलेज के डीन डॉ. बलराम पाणि, विशिष्ट अतिथि रामानुजन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रसाल सिंह रहे। कुलपति प्रो. डॉ. देविंद्र सिंह ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों व जिलों में विभिन्न चुनाव होने के कारण सरकारी कार्य बार-बार प्रभावित होते हैं।
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इससे देश में विकास की रफ्तार थम जाती है जो विकसित राष्ट्र के सपने को साकार करने के रास्ते में बड़ी चुनौती है। एक देश एक चुनाव कानून लागू होने से सरकारी कार्यों को अधिक गति मिलेगी।
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मुख्य वक्ता डॉ. बलराम पाणि ने एक राष्ट्र, एक चुनाव की व्यवस्था से प्राप्त होने वाले राजनीतिक, सामाजिक लाभों व नैतिक मानदंडों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसके सही व गलत पहलुओं का उचित अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्यों के संघ को इस व्यवस्था के लिए एक वरदान बताया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रसाल सिंह ने कहा कि समय की मांग है कि वर्ष 2029 के संसदीय चुनावों में, लोकसभा व सभी राज्यों के चुनाव एक साथ हों। उन्होंने रामनाथ कोविंद समिति का जिक्र करते हुए कहा कि केरल कम्युनिस्ट पार्टी के कमजोर होने के बाद लोकसभा व राज्यों के चुनाव अलग-अलग होने लगे। शुरुआत में यहीं से एक राष्ट्र, एक चुनाव की व्यवस्था बाधित हुई। उन्होंने सरकार के मूल अर्थ, जनता के कल्याण के लिए काम करने पर जोर दिया।
कुलसचिव डॉ. आशुतोष मिश्रा ने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव पर सम्मेलन में विश्वविद्यालय को 11 राज्यों से उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिली है। इनमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दमन और दीव शामिल हैं।
कुछ केंद्रीय संगठन जैसे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय, ओपी जिंदल ने भी इस विषय का समर्थन किया। कार्यक्रम में विधि विश्वविद्यालय की ओर से एक राष्ट्र एक चुनाव पुस्तक का विमोचन किया गया। सम्मेलन में शिक्षक, गैर शिक्षक वर्ग व विद्यार्थी शामिल रहे।