खेल दिवस: खिलाड़ी व परिजन बोले- खेलों में और बेहतर सुविधाएं मिलें तो परचम लहरा सकते हैं खिलाड़ी
हॉकी खिलाड़ी निशा वारसी के पिता शोहराब ने कहा कि ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन को देख इस खेल के प्रति लोगों की सोच बदलेगी। कोच प्रीतम सिवाच के प्रयास व सहयोग से ही बेटियां यहां तक पहुंच सकीं। अगर जिला प्रशासन द्वारा बेहतर सुविधाएं दी जाएं तो बेटियों के खेल में और निखार आ सकता है। बेहतर सुविधाएं मिलने पर और बेटियां भी आगे आकर देश के लिए पदक जीत सकती हैं।
विस्तार
हरियाणा में ओलंपिक ने देश का नाम रोशन किया। वहीं सोनीपत जिले के खिलाड़ियों ने अपना परचम लहराया। टोक्यो ओलंपिक में ताबड़तोड़ शानदार प्रदर्शन के बाद पूरे देश की निगाहें इस जिले के खिलाड़ियों पर टिक गई हैं। इतनी महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बाद अब खिलाड़ियों और उनके परिजनों का कहना है कि अभी भी जिस स्तर की सुविधाओं की दरकार हैं, उसमें और बेहतर हो सकता है। बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो ज्यादा खिलाड़ी निखरकर आएंगे सामने।
ओलंपिक का सफर अच्छा रहा। पूरी टीम योजना बनाकर खेली। जो कमियां रहीं, उन्हें दूर करेंगे। अभी दो महत्वपूर्ण टूर्नामेंट होने हैं। एशियन गेम्स जीतकर पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना चाहेंगे। उसके बाद कॉमनवेल्थ खेलों पर ध्यान देंगे। प्रयास रहेगा कि दोनों ही टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीत सकें। अगले माह से शिविर शुरू हो जाएगा। 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस पर इस बार सभी पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम से दिए जाएंगे। इससे सभी हॉकी खिलाड़ियों में खुशी है। बेहतर सुविधाओं की बात करें तो और अधिक एस्ट्रोटर्फ लगाए जाएं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी की जा सके। - सुमित, खिलाड़ी, भारतीय पुरुष हॉकी टीम
कड़ा संघर्ष कर पाया मुकाम
सुमित का हॉकी के प्रति बचपन से ही जुनून रहा है। इसके लिए उसने दिन देखा न रात। परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, सुमित ने कभी हार नहीं मानी। उसकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज वह इस मुकाम तक पहुंच सका। इस सफर में परिजनों के साथ ग्रामीणों ने भी पूरा सहयोग दिया। आज अगर हमारी मां हमारे बीच होतीं तो बहुत खुश होती। सुमित के संघर्ष ने जीवन सफल कर दिया। आज जिस गली से भी निकलते हैं तो लोग कहते हैं, सुमित का भाई जा रहा है। यह सुन गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है। सुमित आगे भी अपनी मेहनत से नए मुकाम हासिल करेगा। - अमित, हॉकी खिलाड़ी, सुमित का भाई
सभी खेलों में खिलाड़ियों को मिलनी चाहिए बेहतर सुविधाएं
भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने प्रदर्शन से देश में महिला हॉकी को नया मुकाम पर पहुंचाया है। सभी खिलाड़ियों ने इसके लिए कड़ा संघर्ष किया। खिलाड़ियों को दी जाने वाली सुविधाओं की बात करें तो कोच प्रीतम सिवाच ने अपने स्तर पर ही सभी सुविधाएं मुहैया करवाई हैं। जिला प्रशासन की तरफ से भी खिलाड़ियों को बेहतर सहयोग मिले और जिले में सभी खेलों के लिए पर्याप्त साधन मुहैया करवाए जाएं तो देश की झोली में और भी पदक आ सकते हैं। - श्याम सुंदर गोयल, हॉकी खिलाड़ी नेहा गोयल के ताऊ
डाइट मिलती है न कोई सुविधा, मैदान भी खुद करते हैं साफ
ओलंपिक में हमारी टीम ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए शानदार वापसी की लेकिन देश के लिए पदक जीतने से चूक गए। अब पूरा ध्यान एशियन व कॉमनवेल्थ खेलों पर रहेगा। ओलंपिक में जो कमियां रही हैं, उन्हें दूर कर स्वर्ण पदक लाने का प्रयास करेंगे। जिले में हॉकी खिलाड़ियों को न डाइट मिलती है और न ही किसी प्रकार की सुविधा। ग्राउंडमैन भी नहीं है, जिससे सभी खिलाड़ी पहले मैदान साफ करती हैं, फिर अभ्यास किया जाता है। जो सुविधाएं मिलीं, वे सभी कोच प्रीतम सिवाच ने ही मुहैया करवाई हैं। अगर जिला प्रशासन की तरफ से सुविधाएं मिलें और एस्ट्रोटर्फ की बेहतर सुविधा दी जाए तो कई खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं। - नेहा गोयल, खिलाड़ी, भारतीय महिला हॉकी टीम
बिना सुविधा कैसे तैयार होंगे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
भारतीय महिला हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। अगर यहां खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी, तो अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कैसे तैयार हो सकेंगे। हॉकी में लड़कियों को पारंगत करने के लिए शहर के अंदर एस्ट्रोटर्फ मैदान बनाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। इसकी फाइल तैयार कर डीसी को दी गई लेकिन यह मांग आज तक जिले से आगे ही नहीं बढ़ पाई। हालत यह है कि एस्ट्रोटर्फ मैदान की फाइल तक गुम कर दी गई है। खेल मंत्री व सरकार को भी इस तरफ ध्यान देना होगा, तभी खिलाड़ी देश के लिए पदक ला सकेंगे।- प्रीतम सिवाच, कोच एवं पूर्व कप्तान, भारतीय महिला हॉकी टीम