{"_id":"590f683f4f1c1bdc55851112","slug":"hundred-mechanic-place-only-twenty-25-buses-stand-in-workshop","type":"story","status":"publish","title_hn":"100 की जगह केवल 20 मैकेनिक, 25 बसें वर्कशॉप में खड़ी हो रहीं कंडम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
100 की जगह केवल 20 मैकेनिक, 25 बसें वर्कशॉप में खड़ी हो रहीं कंडम
ब्यूरो अमर उजाला सोनीपत
Updated Mon, 08 May 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
वर्कशॉप में ठीक करने के लिए खोले गए बसों के इंजन।
- फोटो : amarujala beuro
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बस डिपो की कार्यशाला में 100 की जगह केवल 20 मैकेनिक ही कार्य कर रहे हैं। मैकेनिक की कमी होने के कारण 25 बसें वर्कशॉप में कंडम हो रही हैं। वर्कशॉप में पिछले छह महीने से बसों की बैट्री नहीं आ रही है। अन्य सामान भी देरी से पहुंच रहा है। इस दौरान अगर कोई बस खराब होती है तो महीनों तक ठीक नहीं हो पाती। इन बसों की खराबी के चलते करीब आधा दर्ज रूट प्रभावित हो रहे हैं। इस कारण यात्रियों को समय पर बस सुविधा नहीं मिल रही और उनको परेशानी उठानी पड़ती है।
160 बसों का है बेड़ा
सोनीपत डिपो में 160 बसों का बेड़ा है। ये बसें हर रोज ग्रामीण एरिया से लेकर दूसरे राज्यों तक जाती हैं। हर रोज बस चलने के कारण इनमें खराबी आना भी स्वाभाविक है। ऐसे में चालक की ओर से बस को वर्कशॉप में ठीक करवाया जाता है। इसके लिए ही बस डिपो पर रोडवेज की ओर से एक बड़ा वर्कशॉप बनाया गया है, लेकिन यह वर्कशॉप लंबे समय से मैकेनिक की कमी से जूझ रहा है। वर्कशॉप अधिकारियों के अनुसार यहां लगभग 100 मैकेनिक की जरूरत है, लेकिन फिलहाल 20 मैकेनिक की कार्य कर रहे हैं। इन मैकेनिक की ड्यूटी तीन शिफ्टों में लगाई गई।
एक महीना लग जाता है बस ठीक होने में
प्रत्येक शिफ्ट में 50 गाड़ियों का कार्य होता है। इनमें से दो या तीन मैकेनिक का रेस्ट रहता है और दो से तीन किसी कारणवश अवकाश पर चले जाते हैं। हालात यह हैं कि वर्कशॉप में 25 बस खराब खड़ी हैं, जबकि चार बसें हर रोज रूटों से खराब होकर आ रही हैं। ऐसे में मैकेनिक नहीं होने से बस ठीक होने में महीने भर का समय भी बीत जाता है और इससे सबसे बड़ी परेशानी आम लोगों को हो रही है।
विज्ञापन
10 बसें बिना बैट्री के खड़ी
वर्कशॉप में खराब खड़ी 25 बसों में से 10 बस ऐसी हैं जो बैट्री न होने के कारण खराब खड़ी हैं। वर्कशॉप में पिछले छह महीने से बसों की बैट्री नहीं आ रही है। इसके अलावा 10 बसें मैकेनिक न होने के कारण ठीक नहीं हो रही हैं और पांच बस अन्य कारणों से खराब हैं। वहीं, अन्य सामान भी देरी से पहुंच रहा है। सामान से लेकर मैकेनिक न होने के कारण समय पर बस ठीक नहीं हो रही हैं।
बसों की कमी से आधा दर्जन लंबे रूट प्रभावित
रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार डिपो में 200 से ज्यादा बस होनी चाहिए, जबकि फिलहाल 160 बस ही शामिल हैं। इनमें से 25 बस खराब खड़ी है तो रूटों पर 135 बस ही चल रही हैं। बसों की कमी के चलते जहां पहले रोडवेज के आगरा, अलीगढ़, नारनौल व जालंधर रूट को बंद किया जा चुका है। वहीं, चंडीगढ़, रोहतक, बड़ौत, बागपत समेत आधा दर्जन रूट प्रभावित हैं। इससे जहां यात्रियों को समय पर बस न मिलने से परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर रोडवेज को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
वर्कशॉप में 100 की जगह केवल 20 कर्मचारी हैं। छह माह से बसों की बैट्री नहीं आ रही। सामान भी देरी से आ रहा है। मैकेनिक की कमी होने के चलते समय पर बसें ठीक नहीं हो रही हैं। इससे वर्कशॉप में ट्रेनिंग कर रहे युवकों को भी कार्य सिखाने में बाधा आ रही है। जब तक मैकेनिक की पूरी भर्ती नहीं होगी तब तक यह परेशानी रहेगी।
-रणधीर सिंह, मुख्य मैकेनिक वर्कशॉप सोनीपत।
विज्ञापन
160 बसों का है बेड़ा
सोनीपत डिपो में 160 बसों का बेड़ा है। ये बसें हर रोज ग्रामीण एरिया से लेकर दूसरे राज्यों तक जाती हैं। हर रोज बस चलने के कारण इनमें खराबी आना भी स्वाभाविक है। ऐसे में चालक की ओर से बस को वर्कशॉप में ठीक करवाया जाता है। इसके लिए ही बस डिपो पर रोडवेज की ओर से एक बड़ा वर्कशॉप बनाया गया है, लेकिन यह वर्कशॉप लंबे समय से मैकेनिक की कमी से जूझ रहा है। वर्कशॉप अधिकारियों के अनुसार यहां लगभग 100 मैकेनिक की जरूरत है, लेकिन फिलहाल 20 मैकेनिक की कार्य कर रहे हैं। इन मैकेनिक की ड्यूटी तीन शिफ्टों में लगाई गई।
विज्ञापन
एक महीना लग जाता है बस ठीक होने में
प्रत्येक शिफ्ट में 50 गाड़ियों का कार्य होता है। इनमें से दो या तीन मैकेनिक का रेस्ट रहता है और दो से तीन किसी कारणवश अवकाश पर चले जाते हैं। हालात यह हैं कि वर्कशॉप में 25 बस खराब खड़ी हैं, जबकि चार बसें हर रोज रूटों से खराब होकर आ रही हैं। ऐसे में मैकेनिक नहीं होने से बस ठीक होने में महीने भर का समय भी बीत जाता है और इससे सबसे बड़ी परेशानी आम लोगों को हो रही है।
विज्ञापन
10 बसें बिना बैट्री के खड़ी
वर्कशॉप में खराब खड़ी 25 बसों में से 10 बस ऐसी हैं जो बैट्री न होने के कारण खराब खड़ी हैं। वर्कशॉप में पिछले छह महीने से बसों की बैट्री नहीं आ रही है। इसके अलावा 10 बसें मैकेनिक न होने के कारण ठीक नहीं हो रही हैं और पांच बस अन्य कारणों से खराब हैं। वहीं, अन्य सामान भी देरी से पहुंच रहा है। सामान से लेकर मैकेनिक न होने के कारण समय पर बस ठीक नहीं हो रही हैं।
बसों की कमी से आधा दर्जन लंबे रूट प्रभावित
रोडवेज कर्मचारियों के अनुसार डिपो में 200 से ज्यादा बस होनी चाहिए, जबकि फिलहाल 160 बस ही शामिल हैं। इनमें से 25 बस खराब खड़ी है तो रूटों पर 135 बस ही चल रही हैं। बसों की कमी के चलते जहां पहले रोडवेज के आगरा, अलीगढ़, नारनौल व जालंधर रूट को बंद किया जा चुका है। वहीं, चंडीगढ़, रोहतक, बड़ौत, बागपत समेत आधा दर्जन रूट प्रभावित हैं। इससे जहां यात्रियों को समय पर बस न मिलने से परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर रोडवेज को भी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
वर्कशॉप में 100 की जगह केवल 20 कर्मचारी हैं। छह माह से बसों की बैट्री नहीं आ रही। सामान भी देरी से आ रहा है। मैकेनिक की कमी होने के चलते समय पर बसें ठीक नहीं हो रही हैं। इससे वर्कशॉप में ट्रेनिंग कर रहे युवकों को भी कार्य सिखाने में बाधा आ रही है। जब तक मैकेनिक की पूरी भर्ती नहीं होगी तब तक यह परेशानी रहेगी।
-रणधीर सिंह, मुख्य मैकेनिक वर्कशॉप सोनीपत।