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Sonipat News: साधु भेष में आकर माता सीता का हरण कर लंका ले गया रावण
Thu, 10 Oct 2024 03:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 10 Oct 2024 03:55 AM IST
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फोटो 38- सोनीपत के सेक्टर-12 में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
सोनीपत। श्री रामलीला सभा की ओर से कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में सातवें दिन भरत मनावन, शूर्पणखा नासा भंग, सीता हरण, शबरी से भेंट की लीलाओं का मंचन किया गया। आचार्य सौरभ द्विवेदी के निर्देशन में वृंदावन से आए कलाकारों ने सभी प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया।
इससे पहले मंदिर श्री देवी त्रिलोकपुर वाली सेवा समिति, सोनीपत के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन श्रीराम चरित मानस के पूजन से मंचन प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर निगम पार्षद हरिप्रकाश सैनी ने की। मुख्यातिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश गुप्ता, पंडित अमित शौनक, राजकपूर जैन, सुमित माथुर व प्रवीण जैन ने शिरकत की। कलाकारों ने मंचन से दर्शाया कि जब श्रीराम, मां जानकी, लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के वनवास के लिए चले जाते हैं तो भरत अपनी तीनों माताओं, गुरुओं व अयोध्या वासियों के साथ श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंच जाते है। श्रीराम 14 वर्ष से पहले अयोध्या लौटने से इंकार कर देते हैं तो भरत उनकी खड़ाऊं लेकर वापस अयोध्या लौटते हैं।
उधर श्रीराम चित्रकूट छोड़कर पंचवटी में रहने लगते हैं, जहां एक दिन उनकी मुलाकात रावण की बहन शूर्पणखा से होती है। शूर्पणखा श्रीराम के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखती है, जिसे श्रीराम अस्वीकार कर देते हैं। तब वह लक्ष्मण के समक्ष भी यही प्रस्ताव रखती है, जिसे लक्ष्मण भी स्वीकार नहीं करते। तब शूर्पणखा सीता माता को मारने दौड़ती है तो लक्ष्मण जी गुस्से में उसकी नासा भंग कर देते हैं। रावण छल से माता सीता का हरण कर लेता है। दोनों भाई सीता को खोजते हुए मतंग ऋषि के आश्रम में पहुंचते हैं, जहां उनकी भेंट शबरी से होती है। कार्यक्रम में महेंद्र मंगला, राजकुमार गोयल, अमित कुच्छल, गजेंद्र मंगला, महेंद्र वर्मा, प्रवीण गोयल, अनिल जैन, रणबीर सिंह खत्री, बीएम कुच्छल, वीरेंद्र कटारिया व तरुण शर्मा मौजूद रहे।
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रावण के साथ युद्ध में जटायु महाराज को गंवाने पड़े प्राण
सोनीपत। सेक्टर-12 में श्री रामायण ट्रस्ट की ओर से चल रहे रामलीला मंचन के आठवें दिन सीता हरण व जटायु-रावण युद्ध के प्रसंग की लीला का मंचन किया गया। मंचन की शुरुआत श्री रामायण ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन व पूजा-अर्चना के साथ की। कलाकारों ने दर्शाया कि अयोध्या से वनवास मिलने के बाद श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण के साथ वन में रह रहे हैं। एक दिन सीता मायावी हिरण मारीच को विचरण करते हुए देखती हैं। वह श्रीराम से स्वर्ण हिरण को लेने की जिद करती हैं। श्रीराम मृग को पकड़ने उसके पीछे वन में चले जाते हैं। कुछ समय बाद रावण मायावी शक्ति से साधु के भेष में सीता को भिक्षा देने के बहाने लक्ष्मण रेखा से बाहर बुलाता है। बाहर आने पर रावण सीता का हरण करके ले जाता है। इसके बाद शबरी मिलन व जटायु-रावण युद्ध की लीला प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में श्री रामायण ट्रस्ट के संचालक विक्की कौशिक, रामलाल कौशिक, अमित कौशिक, मोहन कौशिक, प्रमोद कौशिक मौजूद रहे। संवाद
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इससे पहले मंदिर श्री देवी त्रिलोकपुर वाली सेवा समिति, सोनीपत के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन श्रीराम चरित मानस के पूजन से मंचन प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर निगम पार्षद हरिप्रकाश सैनी ने की। मुख्यातिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश गुप्ता, पंडित अमित शौनक, राजकपूर जैन, सुमित माथुर व प्रवीण जैन ने शिरकत की। कलाकारों ने मंचन से दर्शाया कि जब श्रीराम, मां जानकी, लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों के वनवास के लिए चले जाते हैं तो भरत अपनी तीनों माताओं, गुरुओं व अयोध्या वासियों के साथ श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंच जाते है। श्रीराम 14 वर्ष से पहले अयोध्या लौटने से इंकार कर देते हैं तो भरत उनकी खड़ाऊं लेकर वापस अयोध्या लौटते हैं।
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उधर श्रीराम चित्रकूट छोड़कर पंचवटी में रहने लगते हैं, जहां एक दिन उनकी मुलाकात रावण की बहन शूर्पणखा से होती है। शूर्पणखा श्रीराम के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखती है, जिसे श्रीराम अस्वीकार कर देते हैं। तब वह लक्ष्मण के समक्ष भी यही प्रस्ताव रखती है, जिसे लक्ष्मण भी स्वीकार नहीं करते। तब शूर्पणखा सीता माता को मारने दौड़ती है तो लक्ष्मण जी गुस्से में उसकी नासा भंग कर देते हैं। रावण छल से माता सीता का हरण कर लेता है। दोनों भाई सीता को खोजते हुए मतंग ऋषि के आश्रम में पहुंचते हैं, जहां उनकी भेंट शबरी से होती है। कार्यक्रम में महेंद्र मंगला, राजकुमार गोयल, अमित कुच्छल, गजेंद्र मंगला, महेंद्र वर्मा, प्रवीण गोयल, अनिल जैन, रणबीर सिंह खत्री, बीएम कुच्छल, वीरेंद्र कटारिया व तरुण शर्मा मौजूद रहे।
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रावण के साथ युद्ध में जटायु महाराज को गंवाने पड़े प्राण
सोनीपत। सेक्टर-12 में श्री रामायण ट्रस्ट की ओर से चल रहे रामलीला मंचन के आठवें दिन सीता हरण व जटायु-रावण युद्ध के प्रसंग की लीला का मंचन किया गया। मंचन की शुरुआत श्री रामायण ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन व पूजा-अर्चना के साथ की। कलाकारों ने दर्शाया कि अयोध्या से वनवास मिलने के बाद श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण के साथ वन में रह रहे हैं। एक दिन सीता मायावी हिरण मारीच को विचरण करते हुए देखती हैं। वह श्रीराम से स्वर्ण हिरण को लेने की जिद करती हैं। श्रीराम मृग को पकड़ने उसके पीछे वन में चले जाते हैं। कुछ समय बाद रावण मायावी शक्ति से साधु के भेष में सीता को भिक्षा देने के बहाने लक्ष्मण रेखा से बाहर बुलाता है। बाहर आने पर रावण सीता का हरण करके ले जाता है। इसके बाद शबरी मिलन व जटायु-रावण युद्ध की लीला प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में श्री रामायण ट्रस्ट के संचालक विक्की कौशिक, रामलाल कौशिक, अमित कौशिक, मोहन कौशिक, प्रमोद कौशिक मौजूद रहे। संवाद