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Sonipat News: उप मुख्यमंत्री को पुरानी पेंशन नीति लागू करने का वादा याद दिलाएगा हरियाणा कर्मचारी महासंघ
Tue, 26 Sep 2023 01:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 26 Sep 2023 01:12 AM IST
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फोटो 41- बैठक में पहुंचे डिपो प्रधान मनजीत पहल और अन्य कर्मचारी। श्रोत : कर्मचारी
सोनीपत। रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा की बैठक सोमवार को डिपो प्रधान मनजीत पहल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। संचालन अनिल अंतिल ने किया। बैठक में मौजूद राज्य महासचिव जयबीर घणघस ने बताया कि प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री दुष्यन्त चौटाला ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कर्मचारियों को पुरानी पेंशन नीति बहाल करने की घोषणा की गई थी। अब सत्तासीन होने के बाद भी अपना वायदा पूरा नहीं कर रहे। जिससे कर्मचारियों में रोष हैं। हरियाणा कर्मचारी महासंघ 28 सितम्बर को उपमुख्यमंत्री को वायदा याद दिलाएगा। रोडवेज कर्मचारी उचाना में वादा याद करो, वादा लागू करो के प्रदर्शन में बढ चढ़ भाग लेंगे।
ओमप्रकाश ग्रेवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने साल 2004 व राज्य सरकार ने साल 2006 ने कर्मचारियों की पेंशन को सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ बताकर बंद कर दी थी और न्यू पेंशन योजना लागू की थी। जिसमें सरकार 14 फीसदी व 10 फीसदी कर्मचारियों के वेतन से अंश काटा जाता हैं। सरकार ने सारा पैसा शेयर मार्केट में लगा रखा हैं। जिससे शेयर मार्केट मालिको को बहुत फायदा हो रहा हैं। जबकि कर्मचारियों को नई पेंशन स्कीम के तहत नाममात्र की पेंशन 1200 से 3000 रुपये प्रतिमाह मिल रही हैं। अगर सरकार न्यू पेशन स्किम के तहत कर्मचारियों का सरकार की अंश जमा राशि को शेयर मार्केट में लगाने की बजाए सरकार अपने सरकारी खजाने में रखे तो ये रुपया देश के विकास में काम आ सकता हैं।
दूसरी तरफ वर्तमान व पूर्व सांसदों व विधायकों को पुरानी पेंशन स्कीम के तहत 80 हजार रुपये से लेकर 4 लाख तक प्रतिमाह पेंशन दी जा रही हैं। क्या देश व प्रदेश के वर्तमान व पूर्व मंत्री, सांसदों व विधायकों को पेंशन देने से देश का विकास हो रहा हैं।
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हमारी मांग है कि उपमुख्यमंत्री अपने किए गए वायदे अनुसार विधायकी शक्तियों का प्रयोग करके शीघ्र पुरानी पेंशन नीति लागू करे, हरियाणा कौशल रोजगार विभाग को तुरन्त भंग करे। शर्तो पर आधारित एक्सग्रेसिया स्किम को वापस लिया जाए, मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू की जाए, सभी विभागों में निजीकरण पर पूर्ण रोक लगाई जाए, खाली पड़े पदों पर पक्की भर्ती की जाए।
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ओमप्रकाश ग्रेवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने साल 2004 व राज्य सरकार ने साल 2006 ने कर्मचारियों की पेंशन को सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ बताकर बंद कर दी थी और न्यू पेंशन योजना लागू की थी। जिसमें सरकार 14 फीसदी व 10 फीसदी कर्मचारियों के वेतन से अंश काटा जाता हैं। सरकार ने सारा पैसा शेयर मार्केट में लगा रखा हैं। जिससे शेयर मार्केट मालिको को बहुत फायदा हो रहा हैं। जबकि कर्मचारियों को नई पेंशन स्कीम के तहत नाममात्र की पेंशन 1200 से 3000 रुपये प्रतिमाह मिल रही हैं। अगर सरकार न्यू पेशन स्किम के तहत कर्मचारियों का सरकार की अंश जमा राशि को शेयर मार्केट में लगाने की बजाए सरकार अपने सरकारी खजाने में रखे तो ये रुपया देश के विकास में काम आ सकता हैं।
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दूसरी तरफ वर्तमान व पूर्व सांसदों व विधायकों को पुरानी पेंशन स्कीम के तहत 80 हजार रुपये से लेकर 4 लाख तक प्रतिमाह पेंशन दी जा रही हैं। क्या देश व प्रदेश के वर्तमान व पूर्व मंत्री, सांसदों व विधायकों को पेंशन देने से देश का विकास हो रहा हैं।
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हमारी मांग है कि उपमुख्यमंत्री अपने किए गए वायदे अनुसार विधायकी शक्तियों का प्रयोग करके शीघ्र पुरानी पेंशन नीति लागू करे, हरियाणा कौशल रोजगार विभाग को तुरन्त भंग करे। शर्तो पर आधारित एक्सग्रेसिया स्किम को वापस लिया जाए, मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू की जाए, सभी विभागों में निजीकरण पर पूर्ण रोक लगाई जाए, खाली पड़े पदों पर पक्की भर्ती की जाए।

फोटो 41- बैठक में पहुंचे डिपो प्रधान मनजीत पहल और अन्य कर्मचारी। श्रोत : कर्मचारी