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खेलो इंडिया यूथ गेम्स की तैराकी स्पर्धा में हर्ष सरोहा ने हरियाणा की झोली में डाला दूसरा स्वर्ण पदक

Sat, 11 Jun 2022 12:57 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jun 2022 12:57 AM IST
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Harsh Saroha won Haryana's second gold medal in the swimming competition of Khelo India Youth Games
खेलो इंडिया यूथ गेम्स में तैराकी स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता हर्ष सरोहा पिता सुनील के साथ। संव - फोटो : Sonipat
पंचकूला में खेले जा रहे खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जिले के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जारी है। तैराकी स्पर्धा में हर्ष सरोहा ने हरियाणा की झोली में दूसरा स्पर्ण पदक डाला है। हर्ष ने शुक्रवार को 100 मीटर बटरफ्लाई फ्री स्टाइल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। हर्ष सरोहा व तीन अन्य तैराकों ने चार गुणा 400 मीटर व्यक्तिगत मेडले रिले में रजत पदक जीता। हर्ष इससे पहले 50 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। हर्ष की सफलता पर पिता सुनील सरोहा ने कहा कि बेटे ने तैराकी में कमाल करते हुए सुनहरी चमक बिखेरी है।
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सोनीपत के गांव राठधना निवासी हर्ष सरोहा के पिता सुनील सरोहा ने बताया कि पूल में उतरने के बाद हर्ष हमेशा बेहतर प्रदर्शन करता है। इसके पीछे कारण है कि हर्ष हमेशा खुद से ही मुकाबला करता है। उसका लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ देना होता है। अपने इसी लक्ष्य को पाने के लिए की गई मेहनत के बल पर ही हर्ष ने दोनों स्वर्ण पदक जीते हैं। उन्होंने बताया कि हर्ष ने शुक्रवार को अंबाला के नवनिर्मित आल वैदर पूल में 100 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में स्वर्ण पदक और चार गुणा 400 मीटर व्यक्तिगत मेडले रिले में रजत पदक जीता है। इसमें हर्ष के साथ कृष जैन, वंश पानू और रोहतक के वीर खटकड़ शामिल रहे।
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स्वर्ण पर रहती है हर्ष की निगाह
सुनील सरोहा ने बताया कि हर्ष ने वर्ष 2019 में दिल्ली में हुए राष्ट्रीय स्कूल में 2586 सेकेंड का समय निकालकर नया रिकार्ड बनाया था। उन्होंने बताया कि हर्ष का लक्ष्य सदैव स्वर्ण पदक जीतना होता है। जिसके लिए वह निरंतर कड़ा अभ्यास भी करता है। हर्ष के पिता बताते हैं कि जीवन की अपनी पहली प्रतियोगिता में हर्ष तीसरे स्थान पर रहा था। उसके बाद से हर्ष पहले स्थान पर रहने के लिए कड़ा अभ्यास कर रहा है।
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बेटे के लिए पिता ने छोड़ दिया था घर
हर्ष के हमेशा पहला स्थान पाने के जुनून को देखते हुए उसके पिता सुनील सरोहा ने अपना घर छोड़ दिया था। जिले में तैराकी सीखने की व्यवस्था न होने के कारण सुनील बंगलूरू में शिफ्ट हो गए थे। जहां हर्ष को तैराकी की बेहतर सुविधाएं दिलवाई। पिता के साथ ही राष्ट्रीय स्तर के तैराक रह चुके हर्ष के भाई ने भी हर्ष को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार से मिले सहयोग और हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की जिद का ही परिणाम है कि हर्ष प्रदेश की झोली में दो स्वर्ण पदक डालने में कामयाब हुआ।
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