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सुख-दुख मानव जीवन का हिस्सा, उनसे विचलित न हों: उपेंद्र मुनि
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फोटो 12: सोनीपत के गन्नौर स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते उपेंद्र मुनि महाराज। स्रोत: पाठक
- फोटो : स्रोत : परिजन
गन्नौर। जैन संत उपेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि इंसान के जीवन में सुख और दुख आना स्वाभाविक है, लेकिन इनसे विचलित नहीं होना चाहिए। वह शुक्रवार को गन्नौर के जैन स्थानक में प्रवचनों के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
जैन संत उपेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन बनाए रखता है, वही वास्तव में सुखी रहता है। दुख को छिपाकर भी मुस्कुराना एक साहस है। मुनि महाराज ने कहा कि जो सीढ़ी नहीं चढ़ सकता, वो पहाड़ क्या चढ़ेगा। जिंदगी का मकसद सेवा और सकारात्मक सोच होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि स्वर्ग, नरक या पाताल में भी संपूर्ण सुख नहीं है, असली सुख दूसरों की मदद और अपने कर्तव्य निभाने में है। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाराज के विचारों से लाभान्वित हुए।
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फोटो 12: सोनीपत के गन्नौर स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते उपेंद्र मुनि महाराज। स्रोत: पाठक
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जैन संत उपेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन बनाए रखता है, वही वास्तव में सुखी रहता है। दुख को छिपाकर भी मुस्कुराना एक साहस है। मुनि महाराज ने कहा कि जो सीढ़ी नहीं चढ़ सकता, वो पहाड़ क्या चढ़ेगा। जिंदगी का मकसद सेवा और सकारात्मक सोच होना चाहिए।
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उन्होंने आगे कहा कि स्वर्ग, नरक या पाताल में भी संपूर्ण सुख नहीं है, असली सुख दूसरों की मदद और अपने कर्तव्य निभाने में है। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाराज के विचारों से लाभान्वित हुए।
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फोटो 12: सोनीपत के गन्नौर स्थित जैन स्थानक में प्रवचन करते उपेंद्र मुनि महाराज। स्रोत: पाठक