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आई थी नौकरी की तलाश में, अब भीख मांगने को मजबूर
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sun, 14 Sep 2014 11:55 PM IST
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पश्चिम बंगाल की एक युवती को आई तो थी नौकरी की तलाश में, लेकिन तीन दिन से रेलवे कालोनी में भीख मांगने को मजबूर है। एक एजेंट के जरिए दिल्ली आई युवती 7 दिनों तक तो एक घर में नौकरी करती रही, लेकिन इसके बाद उसे एक महिला रेलवे स्टेशन पर छोड़ गई।
इसके बाद से वह दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस युवती को जब उसके घर पहुंचाने के लिये मीडिया कर्मी ने कोशिश की तो जीआरपी और आरपीएफ दोनों थानों के कर्मचारियों ने उसे रखने से मना कर दिया। हालांकि बाद में युवती को सिविल लाइन थाने में प्रभारी के हवाले किया गया। प्रभारी ने भी युवती को सकुशल वापस घर तक पहुंचाने का जिम्मा संभाला।
शहर के कुछ लोग रेलवे कॉलोनी की तरफ से गुजर रहे थे। उन्हें देख कुछ लोगों ने आवाज लगाई और युवती के बारे में जानकारी दी। इस पर वे लोग युवती को आरपीएफ थाना ले आए और थाना प्रभारी को इस संबंध में अवगत कराया। इस दौरान युवती से पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम सुनीता (20) पुत्री हरमोहन निवासी गांव गड़ोपुडा, थाना कलचीनी जिला न्यूजलपाईगुड़ी पश्चिम बंगाल के रूप में दी। उसने बताया कि वह एजेंट के जरिए सोनीपत आई थी। वह एक सप्ताह से कोठियों में सफाई का काम कर रही थी। गत 3 दिन पहले रात को एक महिला ने उसे रेलवे कालोनी में लाकर छोड़ दिया। है। वह जीआरपी चौकी के सामने एक बूढे़ भिखारी के पास पिछले 3 दिनों से शरण लिए है। वह अब भीख मांगने को मजबूर है।
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इससे पहले वह अशोक विहार, दिल्ली निकट दीप मार्केट के मकान नंबर-103 में भी काम कर चुकी है। वहां पर उसने लगातार तीन साल तक काम किया है। वहां भी वह एजेंट के जरिए आई थी। जब उसका मन ऊब गया था तब उसने मकान मालिक के जरिए अपने घर माता-पिता को फोन किया। इस दौरान उसे 6800 रुपये ही वेतन मिला था। वह अपने परिजनों के साथ पश्चिम बंगाल चली गई थी। बाद में वह एजेंट के जरिए फिर दिल्ली आ गई। 10 दिन पहले ही उसे दिल्ली से सोनीपत लाया गया।
इधर, आरपीएफ थाना प्रभारी ने जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मामला जीआरपी का है। इसके बाद संभ्रांत लोगों ने जीआरपी प्रभारी को मामले से अवगत कराया तो उन्होंने भी पीछे हटते हुए कह दिया कि यह एरिया हमारे पास नहीं है। कुछ पुलिसकर्मियों ने यहां तक कह दिया कि इस लड़की को ऐसे ही छोड़ दो, इन लड़कियों का ऐसे ही आना-जाना लगा रहता है।
इस पर संभ्रांत लोग की टीम सिविल लाइन थाना पहुंची। थाना प्रभारी नवीन कुमार ने तुरंत मामले पर गौर करते हुए लड़की से पूछताछ की। युवती ने बताया किस तरह से 7 दिन काम कराने के बाद जब उसनेे पैसे मांगे तथा घर जाने को कहा तो उसे रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया। पुलिस को यह भी बताया कि दिल्ली में कोई सम्राट सिनेमाघर भी है। उसके पास एजेंट का कार्यालय है। जहां पर सैकड़ों की तादाद में लड़कियों का आना जाना लगा रहता है। सिविल लाइन थाना प्रभारी नवीन कुमार ने युवती को लेकर जांच आरंभ कर दी है।
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इसके बाद से वह दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। इस युवती को जब उसके घर पहुंचाने के लिये मीडिया कर्मी ने कोशिश की तो जीआरपी और आरपीएफ दोनों थानों के कर्मचारियों ने उसे रखने से मना कर दिया। हालांकि बाद में युवती को सिविल लाइन थाने में प्रभारी के हवाले किया गया। प्रभारी ने भी युवती को सकुशल वापस घर तक पहुंचाने का जिम्मा संभाला।
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शहर के कुछ लोग रेलवे कॉलोनी की तरफ से गुजर रहे थे। उन्हें देख कुछ लोगों ने आवाज लगाई और युवती के बारे में जानकारी दी। इस पर वे लोग युवती को आरपीएफ थाना ले आए और थाना प्रभारी को इस संबंध में अवगत कराया। इस दौरान युवती से पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम सुनीता (20) पुत्री हरमोहन निवासी गांव गड़ोपुडा, थाना कलचीनी जिला न्यूजलपाईगुड़ी पश्चिम बंगाल के रूप में दी। उसने बताया कि वह एजेंट के जरिए सोनीपत आई थी। वह एक सप्ताह से कोठियों में सफाई का काम कर रही थी। गत 3 दिन पहले रात को एक महिला ने उसे रेलवे कालोनी में लाकर छोड़ दिया। है। वह जीआरपी चौकी के सामने एक बूढे़ भिखारी के पास पिछले 3 दिनों से शरण लिए है। वह अब भीख मांगने को मजबूर है।
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इससे पहले वह अशोक विहार, दिल्ली निकट दीप मार्केट के मकान नंबर-103 में भी काम कर चुकी है। वहां पर उसने लगातार तीन साल तक काम किया है। वहां भी वह एजेंट के जरिए आई थी। जब उसका मन ऊब गया था तब उसने मकान मालिक के जरिए अपने घर माता-पिता को फोन किया। इस दौरान उसे 6800 रुपये ही वेतन मिला था। वह अपने परिजनों के साथ पश्चिम बंगाल चली गई थी। बाद में वह एजेंट के जरिए फिर दिल्ली आ गई। 10 दिन पहले ही उसे दिल्ली से सोनीपत लाया गया।
इधर, आरपीएफ थाना प्रभारी ने जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मामला जीआरपी का है। इसके बाद संभ्रांत लोगों ने जीआरपी प्रभारी को मामले से अवगत कराया तो उन्होंने भी पीछे हटते हुए कह दिया कि यह एरिया हमारे पास नहीं है। कुछ पुलिसकर्मियों ने यहां तक कह दिया कि इस लड़की को ऐसे ही छोड़ दो, इन लड़कियों का ऐसे ही आना-जाना लगा रहता है।
इस पर संभ्रांत लोग की टीम सिविल लाइन थाना पहुंची। थाना प्रभारी नवीन कुमार ने तुरंत मामले पर गौर करते हुए लड़की से पूछताछ की। युवती ने बताया किस तरह से 7 दिन काम कराने के बाद जब उसनेे पैसे मांगे तथा घर जाने को कहा तो उसे रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया। पुलिस को यह भी बताया कि दिल्ली में कोई सम्राट सिनेमाघर भी है। उसके पास एजेंट का कार्यालय है। जहां पर सैकड़ों की तादाद में लड़कियों का आना जाना लगा रहता है। सिविल लाइन थाना प्रभारी नवीन कुमार ने युवती को लेकर जांच आरंभ कर दी है।