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Sonipat News: नवदीक्षित मुनियों और साध्वी को गुरुदेव नरेश मुनि ने सुनाया बड़ा दीक्षा पाठ

Mon, 12 Dec 2022 08:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 12 Dec 2022 08:30 AM IST
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Gurudev Naresh Muni recited a big initiation lesson to newly initiated sages and sadhvis
श्री दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित बड़ा दीक्षा पाठ महोत्सव में मौजूद विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ? - फोटो : Sonipat
सोनीपत। सामूहिक जैन भागवती दीक्षा के तहत मिशन रोड स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में बड़ा दीक्षा-पाठ महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान संघ संचालक गुरुदेव नरेश चंद्र महाराज ने नवदीक्षित मुनियों आदित्य, रक्षित, रोहण व साध्वी सिद्घायिका को बड़ा दीक्षा पाठ सुनाया।
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इससे पहले संघशास्ता गुरुदेव सुदर्शन लाल महाराज के संघ में चल रही दीक्षा के तहत बद्री धाम सोनीपत जैन स्थानक से जैन मुनियों को गुरु सुदर्शन महाराज के जयकारों के साथ श्री दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में लाया गया, जहां मुनियों ने नवदीक्षितों को बड़ी दीक्षा प्रदान की।
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इस दौरान बहुश्रुत गुरुदेव जय मुनि महाराज, संघसंचालक गुरुदेव नरेश मुनि महाराज व संघप्रमुखा महासाध्वी संयम प्रभा कमल महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि सन्यास का अर्थ निवृति व त्याग है। प्रधान जीवन अर्थात जो भोगों में सुख ढूंढे उसका नाम संसार है। जो त्याग, तप व संयम में सच्चा सुख प्राप्त करे, उसका नाम सन्यास है। सच्चा सुख उसे कहते है, जो कभी दुख में न बदले। जिसके पीछे दुख छिपा हुआ न हो। उन्होंने कहा कि साधना से विकारों को खत्म करके भगवता प्राप्त करना ही शास्वत सुख है।
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गुरुदेव नरेश मुनि महाराज ने कहा कि गुरुदेव सुदर्शन कहते थे कि जिसमें शांति समता नहीं है, वह संत या धार्मिक नहीं हो सकता है। क्रोध की कोई खुराक नहीं है। क्रोधी किसी से प्रेम नहीं करता। अत: उससे भी कोई प्रेम नहीं करता। मुनि या धर्मात्मा को अपना सम्मान व साधना सुरक्षित रखनी है तो क्रोध कषाय से बचकर रहना चाहिए।
बहुश्रुत गुरुदेव जय मुनि महाराज ने ब्रह्मचर्य व्रत की कठोरता का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े नियमों की सुरक्षा के लिए छोटे नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। जहां इस युग में सर्वत्र अश्लीलता का बोल बाला है, वहां जैन मुनियों को हार्दिक नमन है, जो ऐसी कठिन तपस्या करते हैं। जैन मुनियों के पास कोई रुपया, जमीन, जायदाद व मठ धाम आदि कुछ नहीं होता है। इस मौके पर एसएस जैन सभा, गुड़मंडी के प्रधान सुरेश कुमार जैन, पूर्णचंद जैन, पवन कुमार जैन, बसंत जैन व माणिक जैन मौजूद रहे।

श्री दिगंबर जैन मंदिर में जैन मुनियों ने चारों नवदीक्षित मुनि व साध्वी को बड़ा दीक्षा पाठ सुनाकर संदेश दिया। इस दौरान नवदीक्षित आदित्य मुनि को गुरु आदिश के शिष्य, रक्षित मुनि को गुरु राकेश के शिष्य, रोहण मुनि को गुरु आदिश का शिष्य व साध्वी सिद्घायिका को महासाध्वी सुनंदा की शिष्य बनाया गया।
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