फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   green tax

बनने के बाद नहीं हुई ग्रीसिंग भी, भारी वाहनों के दबाव में हांफ रहा ओवरब्रिज

Wed, 09 Dec 2015 11:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Wed, 09 Dec 2015 11:15 PM IST
विज्ञापन
green tax
एक तरफ जहां ग्रीन टैक्स बचाने के चक्कर में भारी वाहन जैसे ट्रक और ट्रालों का रोहतक बाईपास पर जमावड़ा बढ़ता जा रहा है वहीं 20 साल पहले बना पुराना रेलवे ओवरब्रिज विभाग की अनदेखी के चलते हांफ रहा है। हालत यह है कि स्लैब के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है, क्योंकि दो स्लैब को जोड़ने वाली लोहे की पट्टी टूटकर खत्म हो चुकी है। मरम्मत की अनदेखी यहीं खत्म नहीं होती। बीते दो दशक से पुल की ग्रीसिंग तक नहीं हुई। गौरतलब है कि 1993 में पीडब्ल्यूडी ने ओल्ड डीसी रोड से कालूपुर चुंगी की तरफ जाने वाले रोहतक बाईपास पर रेलवे लाइन के ऊपर पुल बनाया था। दिल्ली-अंबाला रेल लाइन पर गाड़ियों की संख्या के चलते अक्सर जाम की स्थिति रहती थी, इसलिए इसका निर्माण किया गया था। दो साल में विभाग ने पुल का निर्माण पूरा कर दिया। 12 दिसंबर 1995 को पूर्व सीएम भजनलाल ने इसका उद्घाटन किया था।
विज्ञापन


50 साल लंबी उम्र का अनुमान, 20 में ही उखड़ने लगी सांसें
विशेषज्ञों के मुताबिक जिस समय ओवरब्रिज का निर्माण किया गया था, उस समय माना गया था कि यह 50 साल से भी ज्यादा समय तक सही-सलामत रहेगा। हालांकि मरम्मत के अभाव में यह 20 साल में ही बदहाल हो गया। नियमों के तहत हर साल पुल की ग्रीसिंग होनी चाहिए, लेकिन विभागीय सूत्र बताते हैं कि 1995 से 2015 तक एक बार भी ग्रीसिंग नहीं हुई है। इससे बेरिंग जाम हो गए हैं। जिसके चलते जब भारी वाहन पुल के ऊपर से गुजरते हैं कि कंपन की मात्रा निर्धारित मात्रा से दोगुनी बढ़ जाती है।
विज्ञापन


सर्द मौसम में बढ़ेगा खतरा
पुल के सबसे ऊपरी भाग से लेकर नीचे तक बीच-बीच में लोहे की पट्टी लगाई गई हैं, ताकि दबाव में पुल के अंदर निर्धारित लचक रहे। ट्रैफिक के दबाव में लोहे की पट्टी टूट गई हैं। ऐसे में विभाग ने कई पट्टी तो काट दी हैं, जबकि कई गलकर नष्ट हो गई हैं। इस कारण ओवरब्रिज के अंदर स्लैब के बीच का फासला बढ़ गया है। सर्दी के मौसम में तो लोहे की सरियों के चलते सिकुड़न और बढ़ेगी।  
विज्ञापन
विज्ञापन


विभाग में नहीं तालमेल, मौत बनकर गिर सकती है पानी की टंकी
सरकारी विभागों में तालमेल की कमी के चलते भी ओवरब्रिज की हालत खस्ता हैं। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बीएसएनएल ने लाइन बिछाने के लिए स्लैब उखाड़ दिया। दोबारा उन्हें अच्छी तरह से रखा नहीं। दूसरा, ओवरब्रिज के नजदीक पब्लिक हेल्थ की पानी की टंकी है। पानी लीकेज के चलते इसकी नींव कमजोर हो रही है। अब तक टंकी के पास बड़ा गड्ढा बन गया है। ऐसे में टंकी कब ओवरब्रिज से गुजर रहे वाहनों पर मौत बनकर टूट पड़े, कुछ कह नहीं सकते।

ट्रैफिक कहां लेकर जाएं, इंतजार के सिवाए नहीं विकल्प : एक्सईएन
पीडब्ल्यूडी के कुलदीप सुहाग से पूरे मामले में अमर उजाला ने की सीधी बातचीत।
सवाल :ओवरब्रिज की 20 साल बाद भी ग्रीसिंग नहीं की गई।
जवाब : मरम्मत के लिए डेढ़ करोड़ का टेंडर बनाया गया था, लेकिन ट्रैफिक का दूसरा विकल्प नहीं होने से काम नहीं हो सकता।
सवाल : कोई बड़ा हादसा हो गया तो, जिम्मेदारी किसकी होगी।
जवाब : तकनीकी रूप से ओवरब्रिज मजबूत है, केवल मरम्मत की जरूरत है।
सवाल : आखिर कब ओवरब्रिज की मरम्मत होगी।
सवाल : उम्मीद है कि एक साल में नया ओवरब्रिज बन जाएगा। तब वहां से ट्रैफिक गुजारा जाएगा। इसके बाद पुराने की मरम्मत होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed