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विदेश भेजकर नौकरी दिलवाने के नाम पर युवक से 67 लाख रुपये ठगे
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गोहाना। गांव शामड़ी बूरान निवासी एक युवक से विदेश में नौकरी दिलवाने के नाम से 67 लाख रुपये ठगी कर ली गई। आरोपियों ने युवक को आस्ट्रेलिया में नौकरी के साथ ही वहां की स्थायी नागरिकता दिलवाने का झांसा देकर ठगी की। उसने मामले की शिकायत एसपी को दी। एसपी के आदेश पर सदर थाना पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
गांव शामड़ी बूरान निवासी भूपेंद्र ने बताया कि वह स्नातक करने के बाद वर्ष 2014 में एक एडवोकेट के पास बतौर पीएसओ की नौकरी करता था। इससे पहले वर्ष 2008 में बोबी बजाड़ की मुलाकात उसकी मौसी की लड़के फरीदाबाद निवासी बिजेंद्र गुलिया उर्फ निटू के साथ उसके शोरूम पर हुई थी। इसके बाद कई कार्यक्रमों ने उससे मुलाकात होती रही। इस बीच बोबी बजाड़ ने उसे भरोसा दिलाया कि वह और उसका पूरा परिवार ऑस्ट्रेलिया का स्थायी निवासी है। उसने उसे झांसा दिया कि ऑस्ट्रेलिया में सिक्योरिटी की नौकरी मिलने पर महीने में लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। उसने ऑस्ट्रेलिया में स्थायी नागरिकता दिलाने में सक्षम होने की भी बात कही।
भूपेंद्र के अनुसार, बोबी बजाड़ ने उसे बताया वह मूलरूप से रोहतक जिले के गांव मकड़ौली का रहने वाला है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की स्थायी नागरिकता मिलने के कारण उसकी यहां के सभी पहचान-पत्र समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद मूल निवासी होने के कारण वह देश में आ सकते हैं। बोबी ने उसे आश्वासन दिया कि वह उसका वहां का वीजा पूरे परिवार का करवा सकता है। उसने कहा कि पहली बार चार साल का वीजा और बाद मे स्थायी नागरिकता लेने के लिए अधिक रुपये खर्च होंगे। इस कारण उसने अपना, पत्नी व बेटी के लिए चार साल का वीजा और बाद में स्थायी नागरिकता लेने के लिए आवेदन किया। इसके लिए उसने अपने घर में 14 जनवरी 2014 को बोबी को 15 लाख रुपये दिए। इसके बाद 6 जनवरी 2015 को 12 लाख, 15 मार्च 2015 को 15 लाख रुपये कृष्णा चौधरी व महेंद्र चौधरी को दिए। भूपेंद्र ने बताया कि उसे व उसकी पत्नी को 8 मई 2015 को वीजा मिला, लेकिन बाद में पता चला कि इतने रुपये तो चार साल वीजा दिलाने के लिए थे। लेकिन उनका ऑस्ट्रेलिया का वीजा सिर्फ एक साल के लिए करवा के दिया। जब उसने बोबी बजाड से शिकायत की तो उसने कहा कि चार साल के लिए वीजा व स्थायी नागरिकता थोड़े समय में ही करवा देगा। लेकिन वीजा न बढ़ने के कारण उसे दिसंबर 2016 में वापस भारत आना पड़ा। जब उसने बोबी व उसके माता-पिता को इसकी शिकायत की तो उन्होंने जल्द इसका प्रबंध करने की बात कही। उसका व उसकी पत्नी का तलाक भी हो गया और आरोपियों ने उससे 67 लाख रुपये ले लिए। इसके बावजूद वीजा नहीं आया। बाद में उसे पता चला कि आरोपी गिरोह बनाकर लोगों को झांसे में लेकर ठगी करते हैं। अब उसने इसकी शिकायत एसपी को दी। एसपी के आदेश पर सदर थाना गोहाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
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गांव शामड़ी बूरान निवासी भूपेंद्र ने बताया कि वह स्नातक करने के बाद वर्ष 2014 में एक एडवोकेट के पास बतौर पीएसओ की नौकरी करता था। इससे पहले वर्ष 2008 में बोबी बजाड़ की मुलाकात उसकी मौसी की लड़के फरीदाबाद निवासी बिजेंद्र गुलिया उर्फ निटू के साथ उसके शोरूम पर हुई थी। इसके बाद कई कार्यक्रमों ने उससे मुलाकात होती रही। इस बीच बोबी बजाड़ ने उसे भरोसा दिलाया कि वह और उसका पूरा परिवार ऑस्ट्रेलिया का स्थायी निवासी है। उसने उसे झांसा दिया कि ऑस्ट्रेलिया में सिक्योरिटी की नौकरी मिलने पर महीने में लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं। उसने ऑस्ट्रेलिया में स्थायी नागरिकता दिलाने में सक्षम होने की भी बात कही।
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भूपेंद्र के अनुसार, बोबी बजाड़ ने उसे बताया वह मूलरूप से रोहतक जिले के गांव मकड़ौली का रहने वाला है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की स्थायी नागरिकता मिलने के कारण उसकी यहां के सभी पहचान-पत्र समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद मूल निवासी होने के कारण वह देश में आ सकते हैं। बोबी ने उसे आश्वासन दिया कि वह उसका वहां का वीजा पूरे परिवार का करवा सकता है। उसने कहा कि पहली बार चार साल का वीजा और बाद मे स्थायी नागरिकता लेने के लिए अधिक रुपये खर्च होंगे। इस कारण उसने अपना, पत्नी व बेटी के लिए चार साल का वीजा और बाद में स्थायी नागरिकता लेने के लिए आवेदन किया। इसके लिए उसने अपने घर में 14 जनवरी 2014 को बोबी को 15 लाख रुपये दिए। इसके बाद 6 जनवरी 2015 को 12 लाख, 15 मार्च 2015 को 15 लाख रुपये कृष्णा चौधरी व महेंद्र चौधरी को दिए। भूपेंद्र ने बताया कि उसे व उसकी पत्नी को 8 मई 2015 को वीजा मिला, लेकिन बाद में पता चला कि इतने रुपये तो चार साल वीजा दिलाने के लिए थे। लेकिन उनका ऑस्ट्रेलिया का वीजा सिर्फ एक साल के लिए करवा के दिया। जब उसने बोबी बजाड से शिकायत की तो उसने कहा कि चार साल के लिए वीजा व स्थायी नागरिकता थोड़े समय में ही करवा देगा। लेकिन वीजा न बढ़ने के कारण उसे दिसंबर 2016 में वापस भारत आना पड़ा। जब उसने बोबी व उसके माता-पिता को इसकी शिकायत की तो उन्होंने जल्द इसका प्रबंध करने की बात कही। उसका व उसकी पत्नी का तलाक भी हो गया और आरोपियों ने उससे 67 लाख रुपये ले लिए। इसके बावजूद वीजा नहीं आया। बाद में उसे पता चला कि आरोपी गिरोह बनाकर लोगों को झांसे में लेकर ठगी करते हैं। अब उसने इसकी शिकायत एसपी को दी। एसपी के आदेश पर सदर थाना गोहाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
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