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लोक नृत्य सांस्कृतिक विरासत की पहचान : डॉ. सरिता
Tue, 07 Jul 2026 07:23 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 07 Jul 2026 07:23 PM IST
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हरियाणवी लोक नृत्य की बारीकियां सीखती राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बुटाना की छात्राएं
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। भारत सरकार की गुरु-शिष्य परंपरा योजना के तहत धर्म पुत्र कला मंच, गोहाना की ओर से राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बुटाना में हरियाणवी लोक नृत्य पर निशुल्क संवाद एवं कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार ने की।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. सरिता देवी ने कहा कि लोक नृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना और संरक्षित रखना समय की जरूरत है। धर्म पुत्र कला मंच के अध्यक्ष मनोज जाले ने छात्राओं को हरियाणवी लोक नृत्य के इतिहास, महत्व और विभिन्न शैलियों की जानकारी दी।
सोनीपत से आए लोक नृत्य विशेषज्ञ सुधीर दिलावर ने छात्राओं को ताल, लय, भाव-भंगिमा, मंच प्रस्तुति और नृत्य की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक की जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ लोक कला का ज्ञान भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है। कार्यशाला में करीब 100 छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान विद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और धर्म पुत्र कला मंच के सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
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गोहाना। भारत सरकार की गुरु-शिष्य परंपरा योजना के तहत धर्म पुत्र कला मंच, गोहाना की ओर से राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बुटाना में हरियाणवी लोक नृत्य पर निशुल्क संवाद एवं कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार ने की।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. सरिता देवी ने कहा कि लोक नृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना और संरक्षित रखना समय की जरूरत है। धर्म पुत्र कला मंच के अध्यक्ष मनोज जाले ने छात्राओं को हरियाणवी लोक नृत्य के इतिहास, महत्व और विभिन्न शैलियों की जानकारी दी।
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सोनीपत से आए लोक नृत्य विशेषज्ञ सुधीर दिलावर ने छात्राओं को ताल, लय, भाव-भंगिमा, मंच प्रस्तुति और नृत्य की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक की जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ लोक कला का ज्ञान भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है। कार्यशाला में करीब 100 छात्राओं ने भाग लिया। इस दौरान विद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और धर्म पुत्र कला मंच के सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।