{"_id":"69026f6d73529652d300687b","slug":"first-they-were-informed-about-the-law-and-then-they-were-made-to-take-an-oath-not-to-burn-stubble-sonipat-news-c-197-1-snp1012-144453-2025-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: पहले दी कानून की जानकारी फिर दिलाई पराली न जलाने की शपथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: पहले दी कानून की जानकारी फिर दिलाई पराली न जलाने की शपथ
Thu, 30 Oct 2025 01:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 30 Oct 2025 01:17 AM IST
विज्ञापन
फोटो : 12: विधिक साक्षरता शिविर में मौजूद ग्रामीण एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य। सूचना विभा
सोनीपत। राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से बुधवार को गांव ककरोई, रतनगढ़ व भटाना जाफराबाद में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें किसानों और ग्रामीणों को कानून की जानकारी दी गई। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पराली न जलाने की शपथ दिलाई गई।
अधिवक्ता सोनिया ने कहा कि जिन व्यक्तियों की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है वह अपने मामलों के लिए नि:शुल्क पैनल अधिवक्ता की सहायता ले सकते हैं। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण का कार्यालय जिला न्यायालय परिसर में स्थित है। वहां प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक नि:शुल्क कानूनी सलाह दी जाती है।
कृषि विभाग से आकाश ने किसानों को पराली जलाने के पर्यावरणीय नुकसान से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु में हानिकारक गैस मिलती हैं। इससे वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता में कमी और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पराली जलाना भारतीय दंड संहिता की धारा 188 एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत दंडनीय अपराध है। इसके लिए पांच से तीस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को पर्यावरण हितैषी विकल्प जैसे पूसा डी कंपोजर, कंपोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट तथा पशुचारे के रूप में पराली के उपयोग के विकल्प को अपनाने के लिए प्रेरित किया। अंत में किसानों और ग्रामीणों को पराली न जलाने की शपथ दिलाई गई।
विज्ञापन
अधिवक्ता सोनिया ने कहा कि जिन व्यक्तियों की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है वह अपने मामलों के लिए नि:शुल्क पैनल अधिवक्ता की सहायता ले सकते हैं। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण का कार्यालय जिला न्यायालय परिसर में स्थित है। वहां प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक नि:शुल्क कानूनी सलाह दी जाती है।
विज्ञापन
कृषि विभाग से आकाश ने किसानों को पराली जलाने के पर्यावरणीय नुकसान से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से वायु में हानिकारक गैस मिलती हैं। इससे वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरता में कमी और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि पराली जलाना भारतीय दंड संहिता की धारा 188 एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत दंडनीय अपराध है। इसके लिए पांच से तीस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को पर्यावरण हितैषी विकल्प जैसे पूसा डी कंपोजर, कंपोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट तथा पशुचारे के रूप में पराली के उपयोग के विकल्प को अपनाने के लिए प्रेरित किया। अंत में किसानों और ग्रामीणों को पराली न जलाने की शपथ दिलाई गई।