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नई रणनीति: संसद के बाहर चलेगी किसानों की संसद, स्पीकर-डिप्टी स्पीकर की होगी नियुक्ति, कृषि कानूनों पर होगी चर्चा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Wed, 21 Jul 2021 12:04 AM IST

सार

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों ने संसद कूच से पहले अपनी रणनीति में बदलाव किया है। किसान अब संसद के बाहर प्रदर्शन नहीं करेंगे। इसके स्थान पर संसद के बाहर वह अपनी संसद चलाएंगे। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति भी किसान करेंगे। इस दौरान कृषि कानूनों पर चर्चा की जाएगी और यह बताया जाएगा कि इन कानूनों में काला क्या है। 
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कुंडली बॉर्डर पर बैठक में मौजूद किसान नेता।
कुंडली बॉर्डर पर बैठक में मौजूद किसान नेता। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

संसद के बाहर किसान प्रदर्शन नहीं करेंगे, बल्कि वे अपनी संसद चलाएंगे। इसके लिए पहले स्पीकर व डिप्टी स्पीकर चुने जाएंगे और उसके बाद कृषि कानूनों पर चर्चा होगी। संसद के बाहर किसान संसद लगाने का सिलसिला लगातार चलेगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने संसद कूच का पूरा कार्यक्रम तय कर दिया है। 
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कुंडली बॉर्डर धरनास्थल पर किसान नेताओं की बैठक में पूरा कार्यक्रम तैयार किया गया। किसान नेता मनजीत सिंह राय, बलवंत सिंह, गुरजीत सिंह महमा ने बताया कि जिस तरह से सदन के भीतर सांसद बैठते हैं, उसी तरह बाहर किसानों की संसद होगी। उन्होंने बताया कि 22 जुलाई को सुबह 8 बजे धरना स्थल पर किसान संगठनों के सदस्यों को बुलाया गया है, जिससे यहां से 9 बजे किसान संसद के लिए कूच करेंगे। 


किसान संसद के बाहर उस जगह तक जाएंगे, जहां तक आम लोग जा सकते हैं। उसके बाद वहां किसान संसद लगाई जाएगी और उसमें कृषि कानूनों का एजेंडा रखकर उससे होने वाले नुकसान पर चर्चा की जाएगी। किसान संसद के दौरान यह बताया जाएगा कि आखिर कृषि कानूनों में काला क्या है। किसान नेताओं ने कहा कि जितने दिन तक संसद चलेगी, उतने दिन तक ही बाहर किसान संसद भी जारी रहेगी। इस बीच, 26 जुलाई को महिला संसद लगाई जाएगी। 

भाजपा व आरएसएस के लोगों पर मार्च निकाल माहौल खराब करने का आरोप
किसान नेताओं ने कहा कि भाजपा व आरएसएस के लोग माहौल खराब करने के 21 जुलाई को सिंघु बॉर्डर तक पैदल मार्च निकाल रहे हैं। अगर इससे किसी तरह का माहौल खराब होता है तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। मोर्चा नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन से किसी को कोई परेशानी नहीं है। 

पंजाब में किसानों को आने लगे समन
वहीं, पंजाब के किसान नेताओं ने कहा कि कोरोना महामारी के समय पंजाब सरकार ने किसानों पर करीब छह हजार मुकदमे दर्ज किए थे। सीएम ने सभी मुकदमे निरस्त करने का वादा किया था लेकिन लोगों को समन आने शुरू हो गए हैं। समन निरस्त करने की मांग की गई और ऐसा न होने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी गई। इसके साथ ही किसान आंदोलन के कारण चंडीगढ़ में धारा 144 लगाने की भी निंदा की गई।

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