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बूंदाबांदी ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत, धान की फसल में आई नमी, गेहूं की बुआई होगी प्रभावित
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सोनीपत अनाज मंडी में खुले में पड़ा किसानों का धान।
- फोटो : Sonipat
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सोनीपत। जिले में सुबह आसमान में छाए बादलों के बाद बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया। दोपहर तक हल्की बूंदाबांदी होती रही। जिससे किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। धान की फसल में नमी आई है, जिससे कटाई और कढ़ाई का काम प्रभावित हो गया है। वहीं गेहूं की बुआई भी एक-दो दिन देरी से होगी। बूंदाबांदी के बाद तापमान में भी गिरावट आ गई। मौसम विभाग के अनुसार वातावरण में नमी बने रहने और बादल छाए रहने का अनुमान है। बूंदाबांदी से मंडी में धान की खरीद का कार्य भी बाधित रहा, जिन किसानों का धान बिका उन्हें 50 से 100 रुपये कम का भाव दिया गया।
पश्चिमी विक्षोभ के चलते वीरवार सुबह ही आसमान में बादल छा गए थे, जिसके कुछ देर बाद ही हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। करीब छह घंटे बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। हालांकि तेज बूंदाबांदी नहीं हो सकी। उसके बावजूद खेतों और मंडी में धान भीग गया। जहां खेतों में कई किसानों की धान की फसल अभी खड़ी और कई ने फसल कटी हुई है। बूंदाबांदी के कारण फसल भीगने से कटाई और उसकी कढ़ाई का काम बाधित हो गया। किसानों को धान की फसल काला होने का डर सताने लगा है। अगर बारिश तेज होती है तो फसल प्रभावित हो सकी है। दूसरी तरफ मंडी में भी धान के ढेर लगे हैं। मंडी किसानों की धान की फसल से अटी हुई है। बूंदाबांदी में धान के भीगने के बाद उसकी खरीद नहीं हो सकी। कुछ किसानों ने अपनी धान की फसल बेची भी तो उन्हें 50 से 100 रुपये तक कम दाम मिले, जिससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। किसानों का आरोप है कि पहले ही धान का रेट कम मिल रहा है। अब धान भीगने का आरोप लगाकर कम रेट दिया जा रहा है।
गेहूं की बुआई का काम भी होगा प्रभावित
हरे चारे और धान की अगेती फसल उगाने वाले किसानों ने अपने खेतों में गेहूं की बुआई की तैयारी कर ली है। बहुत से किसानों ने अपने खेतों में गेहूं की बुआई के लिए सिंचाई कर रखी थी। अब बूंदाबांदी के बाद खेत में नमी बढ़ गई है। जिससे बुआई का काम दो से तीन दिन देरी से हो सकेगा। इसके साथ ही जिन किसानों ने एक दिन पहले ही गेहूं की बुआई की है, उसमें नुकसान हो सकता है। हालांकि हल्की तेज बूंद आने पर उसमें ज्यादा नुकसान का भय था।
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धान का रेट मिला कम
किसान हवा सिंह का कहना है कि हल्की बूंदाबांदी के मंडी में खुले में पड़ धान हल्का भीग गया। जिसके चलते किसानों को 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक कम रेट दिया गया। किसानों को लगातार दोहरी मार पड़ रही है। पहले ही किसान कम रेट की समस्या से जूझ रहे हैं।
वहीं सुखबीर सिंह ने कहा कि बूंदाबांदी के चलते खेतों में धान की कटाई का काम एक-दो दिन प्रभावित होगा। हालांकि बूंदाबांदी हल्की ही हुई थी, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। उसके बावजूद किसानों को दिक्कत जरूर हुई है। किसान देवेंद्र ने कहा कि सोनीपत अनाज मंडी में किसानों का धान खुले में आसमान के नीचे पड़ा है। अगर तेज बारिश होती है तो किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। मंडी में धान की फसल को ढकने के लिए बेहतर तिरपाल तक उपलब्ध नहीं है।
मौसम में बढ़ी ठंड, तापमान गिरा
बूंदाबांदी और प्रदेश में कुछ स्थानों पर हुई ओलावृष्टि का असर तापमान पर भी पड़ा है, जहां वीरवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा, वहीं न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस सप्ताह तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना रहेगा। जिससे लोगों को ठंडक का एहसास होगा। मौसम विभाग के अनुसार इस सप्ताह मौसम का मिलाजुला असर रहा। कभी बादल छाए रहेंगे तो कभी आसमान खुला रहेगा।
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पश्चिमी विक्षोभ के चलते वीरवार सुबह ही आसमान में बादल छा गए थे, जिसके कुछ देर बाद ही हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। करीब छह घंटे बूंदाबांदी का दौर चलता रहा। हालांकि तेज बूंदाबांदी नहीं हो सकी। उसके बावजूद खेतों और मंडी में धान भीग गया। जहां खेतों में कई किसानों की धान की फसल अभी खड़ी और कई ने फसल कटी हुई है। बूंदाबांदी के कारण फसल भीगने से कटाई और उसकी कढ़ाई का काम बाधित हो गया। किसानों को धान की फसल काला होने का डर सताने लगा है। अगर बारिश तेज होती है तो फसल प्रभावित हो सकी है। दूसरी तरफ मंडी में भी धान के ढेर लगे हैं। मंडी किसानों की धान की फसल से अटी हुई है। बूंदाबांदी में धान के भीगने के बाद उसकी खरीद नहीं हो सकी। कुछ किसानों ने अपनी धान की फसल बेची भी तो उन्हें 50 से 100 रुपये तक कम दाम मिले, जिससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। किसानों का आरोप है कि पहले ही धान का रेट कम मिल रहा है। अब धान भीगने का आरोप लगाकर कम रेट दिया जा रहा है।
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गेहूं की बुआई का काम भी होगा प्रभावित
हरे चारे और धान की अगेती फसल उगाने वाले किसानों ने अपने खेतों में गेहूं की बुआई की तैयारी कर ली है। बहुत से किसानों ने अपने खेतों में गेहूं की बुआई के लिए सिंचाई कर रखी थी। अब बूंदाबांदी के बाद खेत में नमी बढ़ गई है। जिससे बुआई का काम दो से तीन दिन देरी से हो सकेगा। इसके साथ ही जिन किसानों ने एक दिन पहले ही गेहूं की बुआई की है, उसमें नुकसान हो सकता है। हालांकि हल्की तेज बूंद आने पर उसमें ज्यादा नुकसान का भय था।
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धान का रेट मिला कम
किसान हवा सिंह का कहना है कि हल्की बूंदाबांदी के मंडी में खुले में पड़ धान हल्का भीग गया। जिसके चलते किसानों को 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल तक कम रेट दिया गया। किसानों को लगातार दोहरी मार पड़ रही है। पहले ही किसान कम रेट की समस्या से जूझ रहे हैं।
वहीं सुखबीर सिंह ने कहा कि बूंदाबांदी के चलते खेतों में धान की कटाई का काम एक-दो दिन प्रभावित होगा। हालांकि बूंदाबांदी हल्की ही हुई थी, जिससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। उसके बावजूद किसानों को दिक्कत जरूर हुई है। किसान देवेंद्र ने कहा कि सोनीपत अनाज मंडी में किसानों का धान खुले में आसमान के नीचे पड़ा है। अगर तेज बारिश होती है तो किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। मंडी में धान की फसल को ढकने के लिए बेहतर तिरपाल तक उपलब्ध नहीं है।
मौसम में बढ़ी ठंड, तापमान गिरा
बूंदाबांदी और प्रदेश में कुछ स्थानों पर हुई ओलावृष्टि का असर तापमान पर भी पड़ा है, जहां वीरवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा, वहीं न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस सप्ताह तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना रहेगा। जिससे लोगों को ठंडक का एहसास होगा। मौसम विभाग के अनुसार इस सप्ताह मौसम का मिलाजुला असर रहा। कभी बादल छाए रहेंगे तो कभी आसमान खुला रहेगा।